आमोद कुमार


आमोद कुमार 
बांदा ट्रैक्टर-ट्रॉली की चोरी केवल एक वाहन का गायब होना नहीं, बल्कि किसान, व्यापारी और मेहनतकश परिवार की रोज़ी-रोटी पर डाका है। ऐसे अपराध तब और गंभीर हो जाते हैं, जब वे अंतरजनपदीय गिरोहों का संगठित कारोबार बन जाएं। बांदा में हुई इस कार्रवाई ने साबित किया कि अपराधी चाहे रायबरेली से आए हों या बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को अपनी सुरक्षित राह समझ रहे हों, कानून की पकड़ उनसे कहीं अधिक मजबूत है।पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में थानाध्यक्ष चन्द्रप्रकाश तिवारी के नेतृत्व में थाना बिसंडा पुलिस और एसओजी टीम ने जिस सतर्कता और रणनीति के साथ जयचन्द्र और मोहम्मद नफीस को गिरफ्तार किया, वह केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि संगठित वाहन चोर गिरोहों के लिए कड़ा संदेश है। उनके कब्जे से चोरी का ट्रैक्टर-ट्रॉली, अवैध तमंचा, कारतूस और चोरी की ट्रॉली बेचकर प्राप्त 20 हजार रुपये की बरामदगी यह दर्शाती है कि अपराध का पूरा तंत्र कानून की निगाह में था।इस सफलता के पीछे उपनिरीक्षक पवन कुमार पाण्डेय, श्याम बहादुर सिंह, हेड कांस्टेबल महेश्वरी प्रसाद त्रिपाठी, एसओजी के अश्वनी प्रताप सिंह, प्रतीक सिंह, अमित त्रिपाठी, ऋषभ कुमार और अनूप कुमार की सक्रिय भूमिका भी उल्लेखनीय रही। यह टीमवर्क बताता है कि अपराध से लड़ाई केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना, धैर्य और समन्वय से जीती जाती है।
फिर भी कहानी पूरी नहीं हुई है। गिरोह का तीसरा सदस्य रज्जन अभी फरार है। जब तक वह कानून की गिरफ्त में नहीं आता और चोरी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक इस अभियान का अंतिम अध्याय लिखा जाना बाकी है।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि अपराधी सीमाएं बदल सकते हैं, नाम बदल सकते हैं, रास्ते बदल सकते हैं, लेकिन यदि नेतृत्व पलाश बंसल जैसा हो और मैदान में चन्द्रप्रकाश तिवारी जैसी टीम सक्रिय हो, तो कानून की पकड़ से बच निकलना आसान नहीं होता।

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