बिना मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के बच्चों के खाद्य पैकेट बरामद, पुलिस पर उठे सवाल
प्रयागराज (मांडा) — थाना मांडा क्षेत्र अंतर्गत बामपुर फाटक के पास स्थित नायरा पेट्रोल पंप के सामने एक गोदाम से छोटे बच्चों के खाने के पैकेटों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। “पीएम एके मेकइन इंडिया” नामक इस गोदाम में रखे गए लाखों रुपये के खाद्य पैकेटों पर न तो मैन्युफैक्चरिंग डेट अंकित है और न ही एक्सपायरी डेट। इतना ही नहीं, कई पैकेटों पर किसी प्रकार का सीरियल नंबर भी नहीं पाया गया, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
जानकारी के अनुसार, गोदाम में “गड़बड़”, “चाट”, “मोटू पतलू”, “मंचूरियन”, “पुराना हवेली”, “पापा की गुड़िया”, “पाप की परी”, “नमकीन” और “भिंडी” जैसे अलग-अलग नामों से पैकेट रखे गए थे यह सभी उत्पाद फनप्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है। इन उत्पादों की गुणवत्ता और वैधता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि ये पैकेट बच्चों के उपभोग के लिए बताए जा रहे हैं।
गोदाम के मालिक अश्विनी कुमार पाण्डेय, निवासी चकडिहा, जिला प्रयागराज ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले में संबंधित कंपनी के सेल्समैन बृजेश कुमार पाण्डेय से संपर्क किया, तो उन्हें सलाह दी गई कि वे खुद ही सभी पैकेटों पर अपनी सुविधा के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के स्टिकर लगाकर बाजार में भेज दें। अश्विनी कुमार पाण्डेय का कहना है कि उन्होंने इस अनियमित और गैरकानूनी कार्य से साफ इनकार कर दिया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब अश्विनी कुमार पाण्डेय के इनकार के बाद कथित रूप से भारतगंज चौकी प्रभारी द्वारा दबाव बनाते हुए पूरे माल को एक ट्रक (नंबर UP41/AT 3683) में लोड करवा दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, खासकर यह कि बिना जांच और वैधानिक प्रक्रिया के माल को क्यों हटाया गया।
जब इस संबंध में आंचलिक संवाददाता ने चौकी प्रभारी से बात करने का प्रयास किया, तो उनका जवाब भी विवादित रहा। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “आप पत्रकार हैं तो क्यों इंटरफेयर कर रहे हैं, माल जाने दीजिए।” जब उनसे पूछा गया कि क्या बिना डेट और सीरियल नंबर के खाद्य सामग्री रखना अपराध की श्रेणी में नहीं आता, तो उन्होंने फोन काट दिया।
यह पूरा मामला न केवल खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में इस प्रकार की लापरवाही स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा विभाग इस पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप कर ऐसे उत्पादों की जांच करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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