इलाके के भुड़िया गांव में चल रही पंचम श्री रुद्र महायज्ञ श्री कथा में बुधवार को यज्ञाआचार्य


 इलाके के भुड़िया गांव में चल रही पंचम श्री रुद्र महायज्ञ श्री कथा में बुधवार को यज्ञाआचार्य मोहित मिश्र रसिक जी महाराज, नैमिष धाम से चल कर आई कथावाचिका रूपाली शुक्ला ने भगवान श्री राम महिमा का बखान करते हुए कहा कि ऋषियों द्वारा वन मे की जा रही यज्ञ व तपस्या में निशिचर व्यवधान उत्पन्न कर रहे थे। जिसकी रक्षा के लिए विश्वामित्र अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षार्थ राम और लक्ष्मण को मांग लिया। जिससे मोह में आकर राजा दशरथ ने मना कर दिया कहा कि यह दोनों बालक हैं।
जंगलों में रहकर निशिचर का सामना कैसे कर पाएंगे। इसके बदले मैं स्वयं अपनी सेना समेत चलकर यज्ञ की रक्षा करूंगा। लेकिन विश्वामित्र नहीं माने असमंजस की स्थिति में फंसकर राजा दशरथ ने गुरू वशिष्ठ से परामर्श लिया। उनकी सलाह पर महाराजा दशरथ ने विश्वामित्र को राम और लक्ष्मण को सौंप दिया। विश्वामित्र अयोध्या से राम-लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम वापस लौट आये। जब राम-लक्ष्मण विश्वामित्र की कुटिया की ओर जाते हैं उन्हें मार्ग में ताड़का नाम की

राक्षसी मिलती है। भगवान उसको एक ही बाण से मार देते हैं। आश्रम में रहकर राम और लक्ष्मण विश्वामित्र के यज्ञ स्थल की रक्षा करने लगे। यज्ञ के समय पर मारीच को वाण मारकर लंका भेज दिया और सुबाहू का वध कर देते हैं। इससे जंगल में रहने वाले अन्य साधु-संत अपने को सुरक्षित महसूस करने लगे। कथा के अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान राकेश सिंह तोमर,पदुम सिंह तोमर, राजेश सिंह तोमर समाज सेवी विकास सिंह तोमर, अवनीश सिंह तोमर यजमान विरेन्द्र सिंह तोमर,मित्तर पाल सिंह, सुशील त्रिपाठी छत्तर सिंह, लवकुश सिंह नितिन सिंह पंकज शर्मा,मगन ,हरिहर , जगपाल सिंह, सुशील त्रिपाठी,सहित कथा प्रेमी मौजूद रहे।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।