सिधौली, जनपद सीतापुर (उत्तर प्रदेश), दिनांक —
सिधौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ एवं प्रदेश उपाध्यक्ष किसान कांग्रेस, ने कहा कि भारत की धरती ने ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है, जिन्होंने पूरी मानवता को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने विशेष रूप से गौतम बुद्ध और अशोक महान के जीवन और विचारों पर विस्तृत प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि तथागत गौतम बुद्ध ने मानवता को करुणा, अहिंसा और समता का जो संदेश दिया, वही आगे चलकर सम्राट अशोक के जीवन का आधार बना। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने मनुष्य को भीतर से बदलने की शक्ति दी और अशोक ने उसी शक्ति को शासन और समाज में उतारकर इतिहास रच दिया।
उन्होंने गौतम बुद्ध के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन त्याग, साधना और सत्य की खोज का अद्भुत उदाहरण है। राजसी जीवन छोड़कर उन्होंने संसार के दुःखों का समाधान खोजा और मानवता को चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का सबसे बड़ा संदेश यह था कि सभी मनुष्य समान हैं, हिंसा का कोई स्थान नहीं है और करुणा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-पाति और भेदभाव का विरोध किया और समानता की स्थापना का मार्ग दिखाया।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में सम्राट अशोक के जीवन का विस्तृत उल्लेख करते हुए कहा कि अशोक प्रारंभ में एक शक्तिशाली और विजेता शासक थे, जिन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए कई युद्ध लड़े। किंतु कलिंग युद्ध उनके जीवन का निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। इस युद्ध में हुई व्यापक जनहानि और पीड़ा को देखकर उनका हृदय परिवर्तन हुआ। उन्होंने महसूस किया कि सच्ची विजय युद्ध में नहीं, बल्कि मानवता और शांति में है।
कलिंग युद्ध के पश्चात अशोक ने हिंसा का मार्ग त्याग दिया और बुद्ध के सिद्धांतों को अपनाया। उन्होंने अपने शासन को धम्म के आधार पर संचालित किया। राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि अशोक का धम्म केवल धार्मिक अवधारणा नहीं था, बल्कि यह एक नैतिक और सामाजिक व्यवस्था थी, जिसमें सत्य, अहिंसा, करुणा, सहिष्णुता और प्रजा के कल्याण को सर्वोच्च स्थान दिया गया।
उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में जनकल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने सड़कों का निर्माण कराया, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया, पेयजल की व्यवस्था की और वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया। उन्होंने पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए भी अनेक कदम उठाए। अशोक ने अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए शिलालेखों और स्तंभों का निर्माण कराया, जिनमें नैतिक जीवन और प्रशासनिक नीतियों का उल्लेख किया गया था।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए अपने दूतों को विभिन्न देशों में भेजा। इससे बौद्ध धर्म का विस्तार भारत के बाहर भी हुआ और यह एक वैश्विक विचारधारा के रूप में स्थापित हुआ।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान समय की परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि आज समाज में असमानता, भेदभाव और हिंसा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बुद्ध और अशोक के विचार अत्यंत प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शिक्षा को अपनाएं, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और सामाजिक न्याय के लिए संगठित होकर कार्य करें।
उन्होंने कहा कि यदि समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाना है तो हमें बुद्ध के विचारों को आत्मसात करना होगा और अशोक के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना होगा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से प्रेरणा लें और एक न्यायपूर्ण एवं समतामूलक समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने राजेश कुमार सिद्धार्थ के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और उनका समर्थन किया।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जनसभा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता अभियान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज बुद्ध और अशोक के मार्ग पर चलेगा तो निश्चित रूप से एक शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।
यह प्रेस विज्ञप्ति सिधौली में आयोजित जनसभा के दौरान दिए गए उनके विस्तृत संबोधन पर आधारित है, जिसमें उन्होंने इतिहास, समाज और मानवता के मूल्यों को जोड़ते हुए एक सशक्त संदेश प्रस्तुत किया।
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