बस्ती बचाने को ग्रामीणों ने लगाई गुहार, प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट


चित्रकूट। विकासखंड पहाड़ी के ग्राम अरछा बरेठी में पैसुनी नदी का लगातार बढ़ता कटान अब गांव के अस्तित्व पर संकट बनकर मंडरा रहा है। बाढ़ और कटान से तबाह हो रही बस्ती को बचाने के लिए ग्रामीणों ने समाजसेवी शंकर प्रसाद यादव के नेतृत्व में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर कटानरोधी कार्य कराए जाने की मांग की थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने तत्काल सिंचाई विभाग को मौके पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

डीएम के आदेश पर सोमवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद और अवर अभियंता जयप्रकाश गांव पहुंचे। अधिकारियों ने नदी किनारे बसे बस्ती क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को कटान से हो रहे नुकसान की हकीकत दिखाई।
पूर्व प्रधान सुमेर सिंह ने बताया कि अरछा बरेठी गांव वर्षों से बाढ़ की मार झेल रहा है। जैसे ही पैसुनी नदी उफान पर आती है, नदी का कटान तेज हो जाता है और घर दरकने लगते हैं। अब तक करीब 50 परिवारों के मकान बाढ़ में जमींदोज हो चुके हैं। कई परिवारों को मजबूरन अन्यत्र आशियाना बनाना पड़ा है।

ग्रामीणों के अनुसार निषाद, चौकीदार, राजपूत, प्रजापति और अनुसूचित जाति समुदाय के लगभग एक सैकड़ा लोग बाढ़ और कटान से प्रभावित होकर पलायन कर चुके हैं। बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन और खड़ी फसलें भी हर साल नदी की भेंट चढ़ रही हैं। बरसात का मौसम आते ही जान-माल का खतरा मंडराने लगता है और लोग भय के साये में जीवन यापन करने को विवश हो जाते हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नदी के कगार पर ठोस कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया, तो बरेठी गांव की शेष बस्ती भी नदी में समा सकती है। इससे पूरे गांव के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा।

इस संबंध में अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है। मौके की स्थिति का आकलन कर लिया गया है और ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गई हैं। निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। उच्चाधिकारियों से चर्चा के बाद आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फिलहाल अरछा बरेठी के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले मानसून में हालात और भयावह होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

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