बीआरसी पर हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम का हुआ आयोजन
सहजनवा गोरखपुर *बीआरसी सहजनवा पर हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्लाक सहजनवा के ब्लाक
यूजीसी के समर्थन में सिधौली में जोरदार प्रदर्शन, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
यूजीसी के समर्थन में सिधौली में जोरदार प्रदर्शन, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
सीतापुर (सिधौली), 10 फरवरी 2026।
माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबंधित प्रावधानों पर लगाई गई रोक को हटाने तथा यूजीसी के नियमों को देश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किए जाने की मांग को लेकर आज तहसील सिधौली के बहादुरापुर स्थित डॉ. अंबेडकर पार्क में एक विशाल जनसभा एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। उपस्थित जनसमूह ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कर शिक्षा में समानता, सामाजिक न्याय और अवसर की समता के संकल्प को दोहराया। सभा का आयोजन महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिद्धार्थ के आह्वान पर किया गया, जिन्होंने यूजीसी के प्रावधानों को सामाजिक न्याय की आधारशिला बताया।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यूजीसी के प्रावधान उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और शैक्षणिक मानकों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी संबंधी व्यवस्थाओं के प्रभावहीन होने से देश के अनेक विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में वंचित, दलित, पिछड़े एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं के साथ जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा की घटनाएँ बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को जानबूझकर कम अंक दिए जाने, शोध और वाइवा के दौरान जातिगत टिप्पणी किए जाने तथा छात्रवृत्ति, छात्रावास एवं अन्य शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित रखने जैसी शिकायतें सामने आई हैं, जो न केवल संविधान की भावना के विरुद्ध हैं, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और गरिमा के साथ शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है। यदि उच्च शिक्षा संस्थानों में ही भेदभाव का वातावरण बनेगा तो सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया बाधित होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यूजीसी से संबंधित व्यवस्थाओं को पुनः प्रभावी बनाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि देश के सभी शिक्षण संस्थान समान मानकों और नियमों का पालन करें।
राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष श्री अभय प्रताप सिंह त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि “सबको शिक्षा, सबको सम्मान” केवल एक नारा नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है और यदि शिक्षा में भेदभाव होगा तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित रहें और शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज उठाते रहें।
सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शी, जवाबदेह और भेदभाव-रहित वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी के नियमों का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ सामाजिक न्याय की रक्षा करना है। यदि इन नियमों का समुचित पालन हो, तो देश के लाखों छात्रों को सुरक्षित और समान शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है।
प्रदर्शन के दौरान “यूजीसी लागू करो”, “सबको शिक्षा–सबको सम्मान”, “जातिगत भेदभाव बंद करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और प्रशासन की मौजूदगी में व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के उपरांत एक प्रतिनिधिमंडल ने माननीय प्रधानमंत्री महोदय एवं माननीय राष्ट्रपति महोदया के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सिधौली के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से यूजीसी से संबंधित रोक को हटाने, समस्त शिक्षण संस्थानों में यूजीसी कानून एवं दिशानिर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने, जातिगत भेदभाव की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और छात्रों की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।
इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वंश राज भारती, अनुज कुमार गौतम, संदीप राठौर, कुलदीप गौतम, विनोद गौतम, रामनरेश गौतम, राजू गौतम, गजोधर प्रसाद बादल, नेता संदीप यादव, रामचंद्र गौतम, सोनम गौतम, मीना भारती, इंद्रसेन सिद्धार्थ, अशोक भार्गव, प्रमोद गौतम, बिंदेश्वरी यादव सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शिक्षा में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
अंत में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहते हुए आगे भी शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे। सभा का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, और उपस्थित जनसमूह ने सामाजिक न्याय एवं समान शिक्षा के संकल्प को पुनः दोहराया।
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