राजकुमार वर्मा


 

जनपद पीलीभीत के ब्लॉक बीसलपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत उगनपुर मरौरी में पंचायत व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई, जब वोटर कार्ड सुधार के दौरान ग्रामीणों ने परिवार रजिस्टर की नकल मांगी। रजिस्टर देखते ही हड़कंप मच गया—पूरे गांव की पहचान ही काग़ज़ों में गलत निकली।

ब्लॉक कार्यालय में रखे गए परिवार रजिस्टर में उगनपुर मरौरी और बसारा गांव का तथाकथित “सर्वे” पंचायत सहायक द्वारा किया गया, लेकिन सच्चाई यह है कि यह सर्वे बिना सत्यापन, बिना घर-घर जांच और बिना जिम्मेदारी के तैयार किया गया काग़ज़ी खेल साबित हुआ।

जांच में सामने आया कि लगभग हर परिवार के नाम, जन्मतिथि, पारिवारिक संरचना और सदस्य संख्या तक गलत दर्ज है। यह मामूली चूक नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड से ग्रामीणों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस गड़बड़ी का शिकार खुद पत्रकार पियूष कुमार भी हुए, जिनके पूरे परिवार की जानकारी रजिस्टर में गलत पाई गई। इसके बाद जब गांव के दो पत्रकारों ने रजिस्टर की गहन पड़ताल की, तो यह साफ हो गया कि पूरे गांव का परिवार रजिस्टर ही झूठ और लापरवाही की बुनियाद पर खड़ा है।

हद तो तब हो गई जब ग्राम प्रधान की ही प्रविष्टियां गलत मिलीं। सवाल यह उठता है कि जब प्रधान ही नहीं बचे, तो आम ग्रामीणों का क्या हाल होगा? आखिर यह सर्वे किसके दबाव और किस मकसद से पास किया गया? मामला उजागर होते ही ग्राम पंचायत सचिव मुकेश राणा हरकत में आए और पंचायत सहायक को सुधार के निर्देश दिए। आनन-फानन में कुछ नाम बदलकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन ग्रामीणों का साफ आरोप है कि यह केवल लीपापोती है, समाधान नहीं।

ग्रामीणों का कहना है कि परिवार रजिस्टर जैसे मूल दस्तावेज में गड़बड़ी का सीधा असर वोटर लिस्ट, राशन कार्ड, पेंशन, आवास और सरकारी योजनाओं
पर पड़ता है। ऐसे में यह लापरवाही नहीं, बल्कि अधिकारों की चोरी है।

अब गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या जिम्मेदार पंचायत सहायक पर कार्रवाई होगी? या फिर सिस्टम अपने ही गुनहगारों को बचा लेगा?

ग्रामीणों ने पूरे परिवार रजिस्टर की दोबारा निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की है। फिलहाल, उगनपुर मरौरी ही नहीं, बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की विश्वसनीयता कटघरे में खड़ी है।

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