फतेहपुर ब्यूरो:फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) और जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) की संयुक्त टीम ने रूटीन चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध खेप पकड़ी। जांच में पता चला कि यह 148 जीवित कछुए (ज्यादातर संरक्षित प्रजाति के) अवैध रूप से पश्चिम बंगाल की ओर ले जाए जा रहे थे।


फतेहपुर रेलवे स्टेशन से 148 कछुए बरामद, तस्कर गिरफ्तार लेकिन वन हिरासत से मुख्य आरोपी भाग निकला

लव सिंह यादव ब्यूरो चीफ़ फतेहपुर अब तक न्याय

सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज लापरवाही थी या मिलीभगत?

 आरोपी को हिरासत में रखने वाली टीम से वह कैसे इतनी आसानी से भाग निकला?

 हिरासत की सुरक्षा, निगरानी और अंतर-विभागीय समन्वय में कहां चूक हुई?

फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) और जीआरपी (गवर्नमेंट रेलवे पुलिस) की संयुक्त टीम ने रूटीन चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध खेप पकड़ी। जांच में पता चला कि यह 148 जीवित कछुए (ज्यादातर संरक्षित प्रजाति के) अवैध रूप से पश्चिम बंगाल की ओर ले जाए जा रहे थे। इन कछुओं की बाजार में अनुमानित कीमत 40 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। टीम ने दो तस्करों को मौके पर गिरफ्तार किया और कछुओं को जब्त कर लिया। दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी कार्रवाई और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रक्रिया के लिए वन विभाग के हवाले कर दिया गया। लेकिन यहां से कहानी में ट्विस्ट आया गिरफ्तारी के महज कुछ घंटों बाद (लगभग 8 घंटे के भीतर), मुख्य आरोपी उमेश कंजड़ (निवासी: महेसुवा, थाना हनुमानगंज, जनपद सुल्तानपुर) ने वन विभाग की टीम को चकमा देकर हिरासत से फरार हो गया। यह घटना बुधवार सुबह हुई, जब विभागीय टीम आरोपी से पूछताछ और आगे की प्रक्रिया में लगी थी। आरोपी ने मौके का फायदा उठाकर भाग निकला, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया।

वन विभाग की लापरवाही और संदेह - डीएफओ (जिला वन अधिकारी) ने फरारी की पुष्टि की है।

फरार आरोपी की तलाश जारी है।

वन विभाग पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करा रहा है।

पूरे मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए गए हैं।

प्रारंभिक जांच में एक वनकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है।

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