शिक्षा चौपाल लगाकर की गई निपुण भारत अभियान की चर्चा
खजनी ब्लाक के चरनाद, मंझरिया, विश्वनाथपुर, प्राथमिक विद्यालय बररोही, रामपुर पांडेय, अउजी
कौन है जिसका कमाई के पैसे नहीं भरा जा रहा है पेट जो प्रकृति को कर रहा है और करवा रहा नष्ट
कौशाम्बी जनपद में कौन है इतना बड़ा प्रकृति का दुश्मन जो संरक्षण देकर प्रकृति को नष्ट करवा रहा है संरक्षण देने वाले और प्राकृतिक को नष्ट करने वाले का क्या कमाई से पेट नहीं भरा जा रहा है जो इतने बड़े विशालकाय वृक्ष को नष्ट कर दिया है जो कड़ा विकास खण्ड क्षेत्र के तरसौरा गांव में आम के बौर की खुशबू नहीं बल्कि अवैध रूप से कट रहे हरे पेड़ों की कराह गूँज रही है विडंबना देखिए कि जहाँ एक तरफ सरकार वृक्षों को पुत्र समान बचाने की कसमें खाती है वहीं सिराथू की धरती पर लकड़ी माफिया का आरा बेखौफ होकर फलदार पेड़ों की बलि ले रहा है इस खबर का सबसे रहस्यमयी हिस्सा वह सन्नाटा है जो शहजादपुर पुलिस चौकी के भीतर पसरा है घटनास्थल से चंद कदमों की दूरी पर खाकी का पहरा है फिर भी माफिया को न तो कानून का खौफ है और न ही पुलिस की मौजूदगी का डर दिन के उजाले में हरे भरे पेड़ों का कत्लेआम होता रहा लकड़ियों से लदे डीसीएम चौकी के सामने से गुजरते रहे लेकिन साहब को कानों कान खबर तक नहीं हुई अब सवाल यह उठता है कि यह पुलिस की लापरवाही है या फिर माफिया के साथ साठगांठ की जुगलबंदी वन विभाग ने कागजों पर तो अपनी पीठ थपथपा ली है कि उन्होंने मुकदमा दर्ज कर लिया है लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां करती है ग्रामीणों का आरोप है कि माफिया ने अनुमति को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया है पेड़ की परमिशन बताकर आम के विशाल पेड़ को साफ कर देने की कला में माहिर इन सिंडिकेट्स ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कालिख पोत दी है जो पेड़ कल तक राहगीरों को छाया और फल देते थे आज वे माफिया की तिजोरी भरने के लिए जगह बना दिए गए हैं सत्ता और तंत्र के संरक्षण पर सवाल तरसौरा के ग्रामीण का सीधा सवाल है आखि क्या खाकी की खामोशी के पीछे कोई बड़ा लेन देन है या फिर प्रशासन ने मौन रहकर माफिया को यह खुली छूट दे दी है कि वह जब चाहे जहाँ चाहे कुल्हाड़ी चला दे वन विभाग का मुकदमा तो दर्ज हो गया पर क्या वह मुकदमा उन कुल्हाड़ियों को रोक पाएगा जो अभी भी बाकी बचे पेड़ों पर नजर गड़ाए बैठे हैं उच्च स्तरीय जांच की मांग अब केवल एक जरूरत नहीं बल्कि इस क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने की आखिरी पुकार है।
क्या वन विभाग ऐसे फलदार वृक्ष जिसका समय खुशबू देने का है ऐसे समय में परमिशन दिया है सवाल तो वन विभाग पर खड़ा हो रहा है यदि अगर परमिशन दिया है तो ऐसे फलदार वृक्ष का परमिशन कैसे दिया गया है जो खुशबू देने के समय में फलदार वृक्ष को धराशाई कर दिया गया है अब आगे देखना है कि पर कार्रवाई करती है या साठगांठ कर ठंडे बस्ते में डाल देती है।
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गोरखपुर के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) 2026 द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन हेतु बनाए गए विनियमन पर गंभीर आपत्ति जताई
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