लव सिंह यादव/ब्यूरो चीफ़,अब तक न्याय


*92 करोड़ का यमुना पुल बार-बार क्षतिग्रस्त, ओवरलोड ट्रकों की धड़ल्ले से आवाजाही जारी; मुख्यधारा मीडिया ने उठाई आवाज, लेकिन अधिकारी मौन!*

*लव सिंह यादव/ब्यूरो चीफ़,अब तक न्याय*

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में किशनपुर-दांदो यमुना पुल की बदहाल स्थिति अब बड़ा हादसा बुलावा बन चुकी है। 2023 में करीब 92 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल मात्र दो साल में कम से कम पांच बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। मुख्य कारण ओवरलोड ट्रक-ट्रैक्टरों का निरंतर परिवहन और बाढ़ का प्रकोप है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा भारी वाहनों पर सख्त रोक के बावजूद, बांदा जिले से आने वाले सैकड़ों मोरंग-गिट्टी लदे ओवरलोड वाहन (अधिकतर बिना नंबर प्लेट वाले) रात-दिन इस क्षतिग्रस्त पुल से गुजर रहे हैं। इससे पुल की संरचना और कमजोर हो रही है, जबकि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
यह पुल फतेहपुर और बांदा जिलों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है, जो लाखों लोगों की जीवनरेखा है।
2023 में लोकसभा चुनाव से पहले वर्चुअल उद्घाटन हुआ था।
निर्माण के कुछ महीनों बाद ही पहली बारिश में अप्रोच रोड और इंटरलॉकिंग टूट गई।
अगस्त 2025 में यमुना बाढ़ से अप्रोच रोड धंस गया, सहायक तुर्की नाला पुल भी प्रभावित हुआ।
नवंबर 2025 में IIT कानपुर की टीम ने निरीक्षण कर तकनीकी सुझाव दिए, लेकिन मरम्मत कार्य अब तक अधर में।
दिसंबर 2025 तक भी क्षतिग्रस्त हिस्सों पर ओवरलोड वाहन फर्राटा भर रहे हैं, जैसा कि स्थानीय पत्रकारों के वीडियो और फोटो से स्पष्ट है।
ओवरलोड वाहनों का खुलेआम खेल और अवैध खनन का गठजोड़बांदा के चरका मोरंग खदान से देर रात कंडम, बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक-डंपर ओवरलोड होकर आते हैं।
ये वाहन टूटी अप्रोच रोड और ध्वस्त सड़क से गुजरते हैं, जिससे पुल की उम्र और घट रही है।
धूल का गुबार इतना कि किशनपुर क्षेत्र में स्कूली बच्चे और स्थानीय निवासी सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।
वैकल्पिक रास्ते भी जोखिम भरे, जहां वाहन जान हथेली पर रखकर निकलते हैं।
UP STF की हालिया कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन और परिवहन थम नहीं रहा।
कई बार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी जमीनी कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय डिजिटल पत्रकार लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर प्रशासन को जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अफसरों की "नींद" नहीं खुल रही।

क्षेत्रवासियों का आरोप- अवैध खनन माफिया और कुछ अधिकारियों के गठजोड़ से यह सब हो रहा है। पुलिस और परिवहन विभाग को टैग करने के बावजूद सख्ती नहीं दिख रही।
यह स्थिति न केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और अवैध खनन के सिंडिकेट को भी बेनकाब करती है।

मुख्यधारा मीडिया की आवाज के बावजूद अधिकारी मौन हैं, जबकि हादसे का खतरा हर पल बढ़ रहा है। जिला प्रशासन, PWD और पुलिस से तत्काल सख्त हस्तक्षेप की जरूरत है वरना बड़ा हादसा अपरिहार्य है।

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