बांदा जिले बुंदेलखंड के लिए यह गर्व का ऐसा पल हैं जिसने पूरे क्षेत्र को आत्म सम्मान और उत्साह से भर दिया


ड्रीम्स ऑफ़ लाइफ फाउंडेशन की संस्थापिका मंतशा को आगामी 20 दिसंबर को केशव कल्चर साहित्यिक संस्था
की तरफ से डॉक्टरेट मानद उपाधि शिरोमणि सम्मान से नवाजा जाएगा केशव कल्चर साहित्यिक संस्था की संस्थापिका डॉ दीप्ति शुक्ला डॉ नीरज कुमार "नीर" अंतरराष्ट्रीय कवि के  आज्ञा अनुसार यह घोषणा किया गया यह सामान समारोह भव्य तरीके से यह प्रतिष्ठत उपाधि उन्हें देश की राजधानी दिल्ली (APV STUDIO) शास्त्री नगर में  आयोजित साहित्य महोत्सव सम्मान समारोह में प्रदान की जाएगी जहां देश भर के साहित्यकार शिक्षा वेद बॉलीवुड सिंगर सामाजिक कार्यकर्ता और (मुख्य अतिथि) अब्दुल गफ्फार खान साहब जी  (बॉलीवुड एक्टर) (विशिष्ट अतिथि ) महंत डॉ नानक दास जी महाराज (पूर्व केंद्रीय टी बोर्ड सदस्य भारत सरकार ) इनके सब के शुभ हाथों से सम्मानित होने का मौका मिलेगा इसी के साथ डॉ नीरज जी,  डॉ दीप्ति जी  का बहुत बहुत शुक्रिया आमंत्रित करने के लिए सम्मान के लिए मंतशा का चयन न केवल उनकी साहित्यिक प्रतिभा और  शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए चुना गया 
बल्कि बांदा की धरती बुंदेलखंड संस्कृति धरोहर हैं  सिर्फ एक जिला नहीं, बुंदेलखंड की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक संपदा का प्रतीक है,मंतशा के सम्मान की खबर फैलते ही खुशी की लहर दौड़ गई सभी अपनों का प्यार मिला 
मंतशा ने कहा यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि बांदा के समृद्ध सांस्कृतिक चेतना और सर्जन शीलता का सम्मान है 
सामाजिक सरोकार और प्राकृतिक के प्रति गहरा लगाव झलकता है उनकी विनम्रता सहजता और लोक संवेदनाओं के प्रति संपूर्ण ने उन्हें जनता के हृदय में विशेष स्थान दिलाया हैं मंतशा को इससे पहले भारत रत्न अटल सम्मान,विश्व भूषण सम्मान, रविंद्र नाथ टैगोर देशभक्ति सम्मान, नारी शक्ति सम्मान ,कबीर कोहिनूर सम्मान ,कई सम्मानों से नवाजी जा चुकी है मंतशा की पहली पुस्तक (अब तलक महफूज है) उत्तराखंड से प्रकाशित हो चुकी है जो साहित्य जगत की खूबसूरत गजलों से भरपूर है डॉक्टरेट कि मानव उपाधि प्राप्त करना एक ऐसा विशिष्ट सम्मान है जो किसी के जीवन कार्य को व्यापक स्वीकृति और समाज के प्रति उनके योगदान की उच्चतम सराहाना हैं।यह पल  प्रेरणा का सूत्र बनेगा कि छोटे से जिले से उठकर भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है कुल मिलाकर 20 दिसंबर को दिल्ली में  होने वाला सम्मान समारोह न केवल मंतशा के लिए जीवन का प्रमुख क्षण होगा बल्कि बांदा की साहित्यिक और सामाजिक  पहचान को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला ऐतिहासिक अवसर भी बनेगा 
और मैं इसे उन तमाम स्त्रियों को समर्पित करती हूं जो कलम से बदलाव की राह बना रही है और सामाजिक कार्य कर रही है 
और हमारे अपनों का साथ मिला बताते हुए बहुत खुशी महसूस हो रही है की ड्रीम्स आफ लाइफ फाउंडेशन संस्था के कार्यों को देखते हुए यह मानव उपाधि पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ड्रीम्स ऑफ लाइफ फाउंडेशन के संरक्षक चंद्रमौली भारद्वाज संरक्षक अरुणेश सिंह ,सह संरक्षक डॉ मनोज कुमार संरक्षिका डॉ रीमा आर्या सह संरक्षिका डॉ संगीता सिंह,जो हमेशा आगे बढ़ाने की राह बताती है किस तरह एनजीओ को आगे बढ़ाना है।

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