संवादाता - मंडल ब्यूरो चीफ राजीव कुमार सिकरवार
आगरा उत्तर प्रदेश
क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा की धूमधाम से चल रहीं हैं।
श्रीकृष्ण - रूकमणी विवाह एंव बाल लीलाओं की कथा सुन भक्त हुए भाव-विभोर
आगरा संवाददाता बहादुर सिंह
बरौली अहीर। क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा की धूम देखने को मिल रही है कहीं कथा में भगवान कृष्ण -कन्हैया अपने बाल लीलाओं से भक्तों को भाव-विभोर कर रहे हैं तो कहीं कथा ब्यास अपने मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण -रूक्मणी विवाह का प्रंसग सुनाकर भक्तों को भक्तिमय कर रहे हैं।प्रेम के ही बस में है भगवान यदि प्रेम है तो भगवान के दर्शन और कृपा दोनों प्राप्त किया जा सकता है यह कहना है कहरई स्थिति सेंटर पार्क राम रघु एग्जाटिका मारूति सिटी रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के कथा ब्यास चन्द्र कान्त जी महराज का। श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ पूर्व मंत्री चौधरी उदयभान सिंह भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पंडित देवेन्द्र रावत ने श्रीमद्भागवत पुराण की आरती उतार कर संयुक्त रूप से किया। कथा की शुरुआत करते हुए चन्द्र कान्त जी महराज ने कहा कि भगवान प्रेम मय है प्रेम का भाव जगाने के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।इस लिए इन्हें प्रेमानंद भी कहा जाता है। गोपियां भगवान के प्रेम में स्वयं को भी भूल गयी थी । उद्धव के समझाने पर भी वे सब कुछ प्रेम को ही मानती थी।चन्द्र कान्त जी महराज ने शनिवार को रुक्मणि विवाह और कंस वध गोपियों के बिरह , रासलीला आदि
का प्रसंग सुनाया। प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।कथा ब्यास ने बताया कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी, तब पृथ्वी वासी भगवान से गुहार लगाने लगे। उनकी करूण पुकार सुनकर कर भगवान कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया। लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा।भला पूरी श्रृष्टि को चलाने वाले भगवान को कोई मार सकता है क्या,मगर कंस अहंकार में होने के कारण भगवान को भूल गया और अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी।कंस बंध की लीला सुन भक्त भगवान के जयकारे लगाए। रूक्मणी विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए ब्यास पीठ ने कहा कि रुकमणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थी, जो भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान कर विवाह करने की इच्छुक थी। लेकिन रुकमणी जी के पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे।
जरासंध और शिशुपाल को भी रूक्मणी के विवाह आमंत्रित किया । जैसे ही यह खबर रुकमणी को पता चली, तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने मन की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई। और भगवान ने रूक्मणी के आग्रह पर अपहरण कर द्वारिका में विधि-विधान से रूक्मणी के साथ विवाह किया। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया गया। इस दौरान पूर्व मंत्री चौधरी उदयभान सिंह,सांसद राजकुमार चाहर,गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, पूर्व विधायक जितेंद्र वर्मा, कालीचरण सुमन, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पंडित देवेन्द्र रावत,रालोद जिलाध्यक्ष गोबिंद शर्मा, जिला अध्यक्ष युवामोर्चा हरिओम रावत, पंकज कटारा ,अजय शर्मा, परीक्षित महेश चंद्र रावत , बैजनाथ रावत,रामेश्वर रावत आदि मौजूद रहे।
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