भारत के गौरवशाली लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिन 26 नवंबर, जिसे संपूर्ण देश संविधान दिवस के रूप में मनाता है, उसी अवसर पर कांग्रेस के लखनऊ कार्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


लखनऊ। भारत के गौरवशाली लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिन 26 नवंबर, जिसे संपूर्ण देश संविधान दिवस के रूप में मनाता है, उसी अवसर पर कांग्रेस के लखनऊ कार्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, छात्र व विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने भारतीय संविधान के महत्व, उसकी ऐतिहासिक यात्रा और आज के भारत में उसकी अनिवार्यता पर अत्यंत विस्तृत और प्रभावशाली भाषण दिया। कार्यक्रम में राकेश कुमार, एस. एल. सिंह, सोनम गौतम सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया।
कार्यक्रम सुबह से ही उत्साह के वातावरण में प्रारंभ हुआ। सभा स्थल को संविधान की प्रस्तावना, राष्ट्र निर्माताओं की ऐतिहासिक तस्वीरों और बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्रों से सजाया गया था। जैसे ही राष्ट्रगान के मधुर स्वरों के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ, पूरा परिसर लोकतंत्र और भारतीय गणराज्य की भावनाओं से स्पंदित हो उठा।
सभा में उपस्थित लोगों का मनोबल तब और ऊंचा हुआ जब किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ मंच पर पहुँचे और अपने विस्तृत, प्रभावशाली तथा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित संबोधन की शुरुआत की।
राजेश कुमार सिद्धार्थ का विस्तृत संबोधन : संविधान के जन्म से लेकर आज तक की यात्रा का समग्र वर्णन
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि 26 नवंबर भारत के लिए केवल एक ‘तारीख’ नहीं है, बल्कि यह वह दिवस है जब भारतीय इतिहास ने वह मोड़ लिया जिससे आधुनिक भारत की दिशा और दशा निश्चित हुई। इस दिन हमारे संविधान को विधिवत् रूप से अंगीकृत किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान के बिना कोई राष्ट्र मजबूत लोकतंत्र की परिकल्पना तक नहीं कर सकता। इसलिए संविधान दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि कर्तव्य, उत्तरदायित्व और जागरूकता का दिन है।
उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत आज़ादी के संघर्ष की गाथा से की। उन्होंने गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना आज़ाद, सुभाष बोस, लाला लाजपत राय, भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों का स्मरण किया और कहा कि इन महानायकों के संघर्ष की परिणति आज़ादी में हुई, लेकिन आज़ादी के बाद देश को दिशा देने वाला मार्गदर्शक दस्तावेज़ बनाने की जिम्मेदारी संविधानसभा पर थी। संविधानसभा की 2 वर्ष 11 माह 18 दिन की कठिन परिश्रमपूर्ण यात्रा का उन्होंने विस्तार से वर्णन किया।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संविधान का मसौदा तैयार करने वाली ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर इतिहास के सबसे महान विधिवेत्ता और सामाजिक न्याय के प्रबल प्रहरी थे। उनके नेतृत्व में भारत ने ऐसा संविधान प्राप्त किया जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की आधारशिला बना और आज भी देश का सबसे मजबूत स्तंभ है। उन्होंने कहा कि संविधान वास्तव में समता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता का अद्भुत संगम है, जो केवल कानूनी दस्तावेज़ नहीं बल्कि विचारधारा, दर्शन और मानवता के उच्चतम मूल्यों का प्रतीक है।

उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का शाब्दिक उल्लेख करते हुए कहा कि "हम भारत के लोग" से शुरू होने वाला यह वाक्यांश केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण सत्ता और अधिकारों का स्रोत है। इसमें निहित जनता सर्वोपरिता का सिद्धांत भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने सभा को बताया कि प्रस्तावना में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के चार स्तंभ न केवल भारत को मजबूत करते हैं, बल्कि एक आदर्श राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
संविधान के विभिन्न भागों और विशेषताओं की विस्तृत चर्चा
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने संविधान के भाग, अनुच्छेद, अनुसूचियों की संरचना और उनकी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक महत्ता पर भी गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जिसमें सैकड़ों अनुच्छेद और अनेक अनुसूचियां सम्मिलित हैं। उन्होंने मौलिक अधिकारों का विस्तार से विवरण दिया, जिनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक उपचार शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार नागरिकों की ढाल हैं और उनके बिना कोई भी राष्ट्र स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को पूरा नहीं कर सकता। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि संविधान केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि कर्तव्यों की भी अपेक्षा करता है। नागरिकों के मूल कर्तव्यों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र, समाज, पर्यावरण, विरासत और संविधान के प्रति जिम्मेदारी हर नागरिक के भीतर जागरूक रहनी चाहिए।
उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था, संघीय ढांचे, सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, विधानमंडलों, केंद्र और राज्यों के अधिकार क्षेत्र तथा संविधान में दिए गए संशोधन प्रावधानों का उल्लेख करते हुए विस्तार से समझाया कि भारत का लोकतंत्र कितनी व्यापक सोच और मजबूत नींव पर खड़ा है।
26 नवंबर का आज के परिप्रेक्ष्य में महत्व
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि आज जबकि विश्व अनेक राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों से गुजर रहा है, भारतीय संविधान हमें एक स्थिर, मजबूत और न्यायपूर्ण राष्ट्र बनाने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि संविधान लोकतंत्र का ऐसा दीपस्तंभ है जो अंधकार में भी दिशा दिखाता है। आज के समय में जब लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के सामने चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं, तब संविधान दिवस हमें इन मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराने का अवसर देता है।
उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान केवल नेताओं का नहीं, बल्कि हर नागरिक का दस्तावेज़ है। इसे पढ़ना, समझना और इसके अनुरूप आचरण करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से संविधान की प्रस्तावना को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करने की अपील  की
समाज में समानता, न्याय और भाईचारे का संदेश
अपने भाषण के दौरान उन्होंने सामाजिक समानता और न्याय पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को बिना किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा या लिंग के भेदभाव के समान अधिकार दिए हैं। यह भारतीय संविधान की सबसे बड़ी खूबी है कि यह विविधता में एकता को संरक्षित करता है और सभी नागरिकों को अवसरों की समानता प्रदान करता है।
उन्होंने बाबा साहब अम्बेडकर के उस प्रसिद्ध विचार का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “किसी संविधान का सफल होना इस बात पर निर्भर करता है कि उसका पालन करने वाले लोग कितने जिम्मेदार हैं।” उन्होंने कहा कि आज समाज के सभी वर्गों की जिम्मेदारी है कि संविधान को पूर्ण सम्मान दें, उसकी मूल भावना को समझें और उसकी रक्षा करें।
कार्यक्रम के अन्य वक्ताओं का संबोधन
सभा में राकेश कुमार, एस. एल. सिंह, सोनम गौतम और अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे। उनके वक्तव्यों में संविधान की गरिमा, लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा, जनता सर्वोपरिता, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भागीदारी की बात प्रमुख रूप से शामिल थी। वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की पक्षधर रही है और आगे भी संविधान के मूल्यों की रक्षा में निरन्तर प्रयास करती रहेगी।
कार्यक्रम का समापन और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया और यह संकल्प लिया कि संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और राष्ट्र की एकता के लिए वे पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करेंगे।

लखनऊ कांग्रेस कार्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक उत्सव था, बल्कि संविधान की आत्मा, दर्शन और मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास भी था। उपस्थित लोगों में संविधान के प्रति सम्मान, जागरूकता और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

इस प्रकार, संविधान दिवस के अवसर पर लखनऊ कांग्रेस कार्यालय में आयोजित यह भव्य समारोह राष्ट्र के लोकतांत्रिक चरित्र, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना को समर्पित रहा, जिसमें किसान कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ का विस्तृत और प्रेरणादायक संबोधन कार्यक्रम की मुख्य धुरी बनकर उभरा।

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