संगोलीपुर मडैयन घाट पर बालू माफिया बेकाबू, किसानों का गुस्सा फिर फूटा, चक्का जाम के बाद भी नहीं सुधरा कुछ
लव सिंह यादव/अब तक न्याय
यमुना किनारे स्थित संगोलीपुर मडैयन बालू घाट एक बार फिर सुर्खियों में है। जहाँ एक तरफ जिला प्रशासन और पुलिस ओवरलोड ट्रकों पर चाबुक चला रही है, दर्जनों वाहन सीज कर रही है, लाखों के चालान काट रही है, वहीं दूसरी तरफ इसी घाट के ओवरलोड ट्रक और अवैध परिवहन से त्रस्त किसानों का गुस्सा लगातार सातवें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा।ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही सैकड़ों किसानों-महिलाओं ने यहीं सड़क पर चक्का जाम किया था। फावड़ों से सड़क खोदकर खनन ट्रकों का रास्ता रोक दिया था। नायब तहसीलदार अरविंद कुमार और थाना प्रभारी सत्यदेव गौतम को मौके पर आना पड़ा था। लंबी वार्ता के बाद खदान संचालकों को सख्त हिदायत दी गई थी कि धूल, टूटी सड़कें, फसलों का नुकसान, पानी की किल्लत और ओवरलोड परिवहन जैसी सभी समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण करेंगे, तभी परिवहन होगा।लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद एक भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उल्टे रात-दिन ओवरलोड ट्रक और तेजी से दौड़ रहे हैं। धूल का गुबार इतना है कि दिन में भी लाइट जलानी पड़ रही है। फसलें बर्बाद हो रही हैं, बच्चे-बूढ़े बीमार पड़ रहे हैं।सोमवार को फिर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और चेतावनी दी कि
“अगर 48 घंटे में ठोस काम नहीं हुआ तो फिर से अनिश्चितकालीन चक्का जाम करेंगे, इस बार पूरा घाट ही बंद करवा देंगे।”प्रदर्शन कर रहे किसान विनीत गर्ग, जितेंद्र त्रिपाठी, वीरेंद्र त्रिपाठी, कमलेश, राममिलन, उदयभान, मैना देवी, सविता, रिचा समेत अन्य ग्रामीणों ने साफ कहा,
“प्रशासन सिर्फ चालान काटकर और छोटे ट्रक पकड़कर अपना काम पूरा समझ रहा है। असली मालिक और बड़े माफिया खुलेआम घूम रहे हैं। जब तक हमारे गांव की सड़क नहीं बनेगी, धूल नहीं रुकेगी, फसल का मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे।”इधर प्रशासन का दावा है कि घाट पर लगातार चेकिंग हो रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। लेकिन किसानों का सवाल एक ही है,
“जब कार्रवाई हो ही रही है तो हमारे गांव में दिन-रात 50-60 ओवरलोड ट्रक कैसे दौड़ रहे हैं?” अब देखना यह है कि संगोलीपुर मडैयन घाट पर प्रशासन किसानों की मांगों को गंभीरता से लेता है या फिर एक बार फिर चक्का जाम की नौबत आती है। फिलहाल तनाव चरम पर है और ग्रामीण पूरी तरह आंदोलन के मूड में हैं।
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