कर्नाटक में लीडरशिप में परिवर्तन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही थीं. क्या सिद्धारमैया की सरकार बदल जाएगी और मुख्यमंत्री पद को डीके शिवकुमार को सौंपा जाएगा? इन सभी चर्चाओं पर कांग्रेस ने रोक लगा दी है और इसका सॉल्यूशन निकाला है. कर्नाटक के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस


कर्नाटक में लीडरशिप बदलने की अटकलों पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से आधिकारिक तौर पर रोक लगा दी गई है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थक कर्नाटक कांग्रेस विधायकों काएक ग्रुप और पार्टी चीफ मल्लिकार्जुन खरगे के बीच एक मीटिंग हुई थी, जिसके बाद राज्य में लीडरशिप बदलने की अफवाहें तेज हो गई थीं, क्योंकि हाल ही में सिद्धारमैया की सरकार ने आधिकारिक तौर पर ढाई साल पूरे कर लिए हैं.

 

सत्ता परिवर्तन की अटकलों पर रोक लगाते हुए सांसद और कर्नाटक के इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लीडरशिप बदलने की चर्चा को खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कांग्रेस सरकार के खिलाफ BJP के कैंपेन का हिस्सा है.

सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद सुरजेवाला ने कहा कि उन्होंने सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ बातचीत की है. दोनों ने ही इस बात पर अपनी सहमति जताई है कि BJP कर्नाटक और उसकी कांग्रेस सरकार को बदनाम करने वाला कैंपेन चला रही है. उन्होंने कांग्रेस नेताओं और MLA को लीडरशिप के मुद्दे पर कोई भी पब्लिक स्टेटमेंट देने से बचने की बात कही है. साथ ही यह भी कहा है कि अपने फ़ायदे के लिए चलाए जा रहे एजेंडा में भी बिल्कुल ना आएं.

हाईकमान का फैसला दोनों को सुनना चाहिए

सिद्धारमैया ने फिर से दोहराते हुए कहा कि लीडरशिप बदलने का फैसला सिर्फ कांग्रेस हाईकमान ही करेगा, जाहिर तौर पर उनका इशारा खरगे और गांधी परिवार की ओर था. उन्होंने कहा कि हाईकमान जो भी फैसला करे, दोनों को सुनना चाहिए, उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को भी. सभी को हाईकमान की बात माननी चाहिए. मैं आगे बढ़कर बजट पेश करूंगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बेंगलुरु आ रहे हैं, मैं उनसे बात करूंगा.

सिद्धारमैया ने सवाल पूछा कि क्या हाईकमान ने अब तक कुछ कहा है? सिद्धारमैया ने कर्नाटक में लीडरशिप बदलने की किसी भी बात को खारिज कर दिया है और कहा है कि सिर्फ कैबिनेट में फेरबदल की बात हो रही है.

जब यह कहा गया कि ढाई साल बाद कैबिनेट में फेरबदल किया जा सकता है, तभी मुख्यमंत्री बदलने का मुद्दा सामने आया है. पार्टी नेताओं को कैबिनेट फेरबदल पर फैसला लेने की जरूरत है. कुल 34 मंत्री पद हैं, जिनमें से दो पद खाली हैं. ये खाली मंत्री पद कैबिनेट फेरबदल के दौरान भरे जाएंगे.

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