“रिसिया ब्लॉक में झोलाछापों का साम्राज्य: स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता या संगठित भ्रष्टाचार?” रिपोर्टर: आदहम ख़ान भूमिका: एक जिले की उपेक्षा, एक क्षेत्र का दर्द बहराइच जिले का रिसिया ब्लॉक उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था का संकट केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा


“रिसिया ब्लॉक में झोलाछापों का साम्राज्य: स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता या संगठित भ्रष्टाचार?”
रिपोर्टर: आदहम ख़ान

भूमिका: एक जिले की उपेक्षा, एक क्षेत्र का दर्द

बहराइच जिले का रिसिया ब्लॉक उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ स्वास्थ्य व्यवस्था का संकट केवल कागज़ों में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में साफ दिखाई देता है। यहाँ पर सरकारी अस्पतालों की स्थिति, चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य अधिकारियों का रवैया लंबे समय से सवालों के घेरे में रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या में विस्फोटक रूप से वृद्धि हुई है। इन झोलाछापों ने न केवल गरीब और अशिक्षित ग्रामीण जनता का शोषण किया है, बल्कि कई मामलों में लोगों की जान तक चली गई है।

और सबसे चिंताजनक बात—
इन सबके बावजूद स्वास्थ्य विभाग चुप है, और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन की राजनीति चल रही है।

पहला अध्याय: झोलाछाप डॉक्टर—एक अवैध चिकित्सा तंत्र

रिसिया क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की पकड़ उस समय से मजबूत होती चली गई जब स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण बंद कर दिए। गाँवों में डॉक्टरों की कमी का फायदा उठाकर इन लोगों ने अपने अवैध क्लीनिक खोल लिए।
यह झोलाछाप किसी भी तरह की मेडिकल डिग्री या प्रशिक्षण के बिना—

इंजेक्शन लगाते हैं

ड्रिप चढ़ाते हैं

गर्भवती महिलाओं का इलाज करते हैं

गंभीर बीमारियों में भी अपनी दवा देते हैं

एन्टीबायोटिक, स्टेरॉयड, और खतरनाक इंजेक्शन तक लगाकर मरीज को “तुरंत ठीक” करने का दावा करते हैं

इनका उद्देश्य इलाज नहीं, बल्कि पैसे कमाना होता है।
जिस जनता के पास न जागरूकता है, न पैसा, न सुविधा—वही सबसे बड़ा शिकार बनती है।

दूसरा अध्याय: स्वास्थ्य विभाग की भूमिका—निष्क्रियता या मिलीभगत?

AB TAK TV की टीम ने जब इस विषय पर स्थानीय अधिकारियों से बात की, तो शुरुआत में CMO बहराइच ने कहा कि—

“झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।”

लेकिन हफ्तों बीत गए, और कोई जांच नहीं हुई।
जनता का सवाल—आखिर क्यों?

जब दोबारा संपर्क किया गया, तो नया जवाब मिला—

“सीएचसी अधीक्षक रिसिया को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।”

लेकिन इस बार भी वही कहानी…
जांच का नाम तक नहीं लिया गया, न कोई टीम भेजी गई।

रिसिया के ग्रामीणों का आरोप बेहद गंभीर है—

“सीएचसी अधीक्षक को झोलाछाप डॉक्टर प्रति माह 5000 रुपये देते हैं, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होती।”

यदि यह सच है, तो यह एक सामान्य भ्रष्टाचार की घटना नहीं, बल्कि—

गरीबों की जान को पैसे के बदले खतरे में डालने का अपराध है।

तीसरा अध्याय: अस्पताल की दवाएँ गायब, मेडिकल स्टोर की भरमार

सीएचसी रिसिया में एक और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के अनुसार:

डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध फ्री दवाएँ नहीं देते

इसके बजाय वे मरीज को नजदीकी मेडिकल स्टोर से महंगी दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं

कई मेडिकल स्टोर डॉक्टरों से सेटिंग करके चलते हैं

हर पर्ची पर वही 3-4 मेडिकल स्टोर का नाम लिखा होता है

यह सीधा सरासर भ्रष्टाचार है। अस्पताल को मिलने वाली दवाओं का हिसाब अक्सर कागज़ों में पूरा दिखाया जाता है, जबकि जमीन पर मरीजों को कुछ नहीं मिलता।

चौथा अध्याय: स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की धज्जियाँ

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने बार-बार कहा है कि—

अवैध क्लीनिक बंद किए जाएँ

झोलाछापों पर कार्रवाई हो

सरकारी दवाएँ मरीजों को ही मिलें

भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

लेकिन रिसिया की स्थिति बताती है कि
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग मंत्री के आदेशों को धूल चटा रहा है।

सरकारी मशीनरी तब तक नहीं जागती जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
लेकिन सवाल है कि क्या गरीबों की जान की कीमत भी कोई हादसा ही होता है?

पांचवां अध्याय: ग्रामीणों की पीड़ा—“किसके सहारे जियें?”

AB TAK TV ने जब अलग-अलग गांवों में जाकर बात की तो गरीबों का दर्द साफ झलकता है।

एक बुजुर्ग महिला ने कहा:
“बेटा, सरकारी अस्पताल में डॉक्टर कहते हैं दवा नहीं है। बाहर से 700 रुपये की दवा खरीदो। हम गरीब लोग कहाँ से लाएँ?”

एक किसान ने कहा:
“झोलाछाप 100–200 रुपये में इलाज कर देता है, पर कई बार हालत और खराब कर देता है।”

एक महिला ने रोते हुए बताया:
“मेरी बहू का गलत इंजेक्शन से गर्भपात हो गया। डॉक्टर झोलाछाप था। कहीं सुनवाई नहीं हुई।”

यह सिर्फ कुछ आवाजें हैं। ऐसे दर्जनों नहीं, सैकड़ों मामले क्षेत्र में मौजूद हैं।

छठा अध्याय: भ्रष्टाचार की कड़ी—झोलाछाप, मेडिकल माफिया, और अधिकारी

पड़ताल के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—

कुछ झोलाछाप डॉक्टर खुद मेडिकल स्टोर चलाते हैं

कई झोलाछाप सरकारी दवाएँ भी बेचते हैं

कुछ पशु चिकित्सक मानव इलाज कर रहे हैं

कई युवक बिना किसी डिग्री के इंजेक्शन, सलाइन, एंटीबायोटिक पहले से ही दे रहे हैं

सबसे अहम—ठीक इन्हीं क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग का कोई निरीक्षण वर्षों से नहीं हुआ

जब अधिकारियों से पूछा गया कि निरीक्षण क्यों नहीं होता, तो जवाब मिला—

“कर्मचारियों की कमी है।”

जबकि असली वजह लोगों के अनुसार सिर्फ एक है—
मासिक वसूली।

सातवां अध्याय: जानलेवा इंजेक्शन और खतरनाक इलाज

झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ इंजेक्शन बेहद खतरनाक हैं—

डेक्सा

पेनिसिलिन

सेफ्ट्रियाक्सोन

एनाल्जिसिक स्टेरॉयड

बिना जांच के ग्लूकोज

गलत मात्रा में एंटीबायोटिक्स

इनका इस्तेमाल करने से:

मरीज को एलर्जी

शॉक

ब्लड प्रेशर गिरना

सांस रुकना

गर्भपात

किडनी खराब

जान तक चली जाती है

लेकिन चूंकि झोलाछापों को जिम्मेदारी का कोई डर नहीं, इसलिए इलाज एक जुआ बन गया है जिसमें दांव जनता की जान है।

आठवां अध्याय: AB TAK TV की पड़ताल—“जांच नहीं, सिर्फ खानापूर्ति”

हमारी टीम ने जब सीएचसी रिसिया जाकर जानकारी मांगी, तो कई कर्मचारी असहज हो गए।
कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि:

आखिरी बार झोलाछापों की जांच कब की गई?

कितने क्लीनिक बंद किए गए?

कितनी दवा मरीजों को मिली?

दवाएँ कहाँ जाती हैं?

यह चुप्पी ही सबसे बड़ा सबूत है कि सिस्टम में सब ठीक नहीं है।

नौवां अध्याय: जनता की मांग—“भ्रष्टाचारी अधिकारियों को हटाओ”

ग्रामीणों की मांगें बेहद स्पष्ट हैं—

झोलाछाप डॉक्टरों पर तत्काल कार्रवाई हो

सीएचसी अधीक्षक को हटाया जाए

मेडिकल माफिया पर FIR दर्ज हो

सरकारी दवाओं की आपूर्ति की निगरानी हो

CMO कार्यालय की विशेष जांच हो

स्वास्थ्य मंत्री हस्तक्षेप करें

जिले में हेल्थ इमरजेंसी घोषित की जाए

लोग कहते हैं—

“यदि घूस लेकर अवैध डॉक्टरों को संरक्षण दिया जा रहा है, तो यह गरीबों के साथ सबसे बड़ा धोखा है।”

दसवां अध्याय: क्या होगी कार्रवाई या फिर सब धुल जाएगा?

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार गंभीर है।
लेकिन यदि ऐसे ब्लॉक स्तर के अधिकारी ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगे, तो ऊपर से दिए गए आदेश धरातल पर कैसे उतरेंगे?

रिसिया ब्लॉक की स्थिति यह साबित करती है कि—

जब अधिकारी भ्रष्ट हो जाएँ, तो जनता की जान सबसे सस्ती चीज बन जाती है।

CMO का आदेश सिर्फ कागज़ों में रह गया।
अधीक्षक ने पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया।
झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले पहले से ज्यादा बुलंद हैं।
और गरीब जनता… अपने हाल पर छोड़ दी गई है।

निष्कर्ष: यह सिर्फ रिसिया की कहानी नहीं

बहराइच में स्वास्थ्य सेवाओं की जड़ें खोखली होना किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं।
यह उस व्यवस्था की पहचान है जिसमें:

आदेश होते हैं

जांच का आश्वासन होता है

भ्रष्टाचार जमकर फलता है

और सबसे अंत में मरता है तो सिर्फ गरीब

AB TAK TV इस मुद्दे को आगे भी उठाता रहेगा, जब तक—

जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती

झोलाछापों का नेटवर्क नहीं टूटता

और गरीबों को न्याय नहीं मि

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