डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा भाग–1 : समता-सूर्य उदय (100 दोहे) (1) जय भीम का ऊँचा ध्वज, जग में फैले शोर। संविधान का दीप यह, उजियारे हर ओर॥ (2) जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, फोड़ी अंधी राह। ज्ञान दिया हर जन को, कर दी जीवन चाह॥ (3) श्रमिक, किसान, दलित निराश, सबको दी पहचान। भीम विच


डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा

(1)
जय भीम का ऊँचा ध्वज, जग में फैले शोर।
संविधान का दीप यह, उजियारे हर ओर॥

(2)
जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, फोड़ी अंधी राह।
ज्ञान दिया हर जन को, कर दी जीवन चाह॥

(3)
श्रमिक, किसान, दलित निराश, सबको दी पहचान।
भीम विचार का नाद है, भारत की शान॥

(4)
अंधकार में दीप थे, जब नभ था बेजान।
भीमराव ने की जगत में, नव संविधान॥

(5)
कानूनी भाषा में लिखा, जनमन का इतिहास।
न्याय-समानता का दिया, अमर उपदेश प्रकाश॥

(6)
महासंघ की शपथ यही, मानवता का धर्म।
संविधान ही देवता, सेवा ही कर्म॥

(7)
अशिक्षा की जंजीर को, तोड़ा ज्ञान पुकार।
साक्षरता से नव युग आया, भीम थे आधार॥

(8)
दलितों के मस्तक चढ़ी, आत्मगौरव माला।
संविधान की छत्रछाया, भीम की दीवाला॥

(9)
सत्य अहिंसा का पथ दिखाया, बुद्ध विचार अपनाए।
भीमपथ का जो भी चलता, मानव धर्म निभाए॥

(10)
संविधान के अक्षर बोले, न्याय-समान विचार।
हर नागरिक का हो सम्मान, यही भीम उपहार॥

(11)
भूख-प्यास से जूझता, श्रमिक जब रोया रात।
भीम उसे अधिकार दिलाए, दी नव सौगात॥

(12)
कर्मभूमि संसद बनी, लेखनी बनी तलवार।
अन्यायों के विरुद्ध चली, जनशक्ति अपार॥

(13)
भीमराव का जीवन है, संघर्षों की गाथा।
हर आँसू ने गढ़ दिया, नव युग की परिभाषा॥

(14)
महासंघ का स्वर गूंजे, संविधान का मान।
दलित-पिछड़ों संग उठे, भारत महान॥

(15)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, तीन दीप प्रज्वाल।
भीम का यह मंत्र अमर, जन जन में लाल॥

(16)
कायम रहे संविधान का, हर अक्षर साकार।
लोकतंत्र की नींव यही, सबसे मजबूत आधार॥

(17)
महासंघ के हर सदस्य का, एक यही संदेश।
न्याय-समानता बिन नहीं, सच्चा देश विशेष॥

(18)
अंधभक्ति का अंत कर, विवेक दीप जलाए।
भीमविचार के अनुयायी, जग में मान बढ़ाए॥

(19)
सत्ता का जब खेल हुआ, छला गया इंसान।
भीम खड़े थे सच्चाई से, बोले संविधान॥

(20)
संविधान के पृष्ठों में, जन का जीवन बसता।
हर अनुच्छेद में चमके, भीम का नाता सच्चा॥

(21)
अंग्रेजों की बेड़ी टूटी, पर मन अब भी दास।
भीम उठे जब मंच पर, गूंजा नव विकास॥

(22)
समान अवसर हर जन को, यह था भीम विचार।
कर्म से ही ऊँचाई मापो, यही जग का सार॥

(23)
जात-पात को दूर कर, मानवता का नाम।
भीम ने भारत में किया, समता का प्रचाम॥

(24)
नारी को सम्मान दे, शिक्षा का वरदान।
संविधान ने खोलीं राहें, जग में पहचान॥

(25)
महासंघ का गीत यही, सेवा धर्म महान।
भीमविचार अमर रहे, जन जन के प्राण॥

(26)
न्याय-समानता के बिना, लोकतंत्र अधूरा।
भीमराव का स्वप्न था, हर मन हो पूरा॥

(27)
धन नहीं, ज्ञान ही असली, शक्ति बने समाज।
भीमपथ यह सिखलाए, तोड़े हर लाज॥

(28)
संविधान की शपथ लेकर, चलें सदा औदार्य।
मानवता के व्रत धरे, करें नव निर्माण कार्य॥

(29)
महासंघ का दीप जले, भीम विचार समेट।
हर दलित के स्वप्न में, न्याय का गीत बहे॥

(30)
जय संविधान! जय भीम! यही महासंघ नाद।
भारत भू पर गूंज उठे, मानवता प्रसाद॥

(31)
भीम नाम का अर्थ है, अंधकार का अंत।
अन्यायों की भीड़ में, सत्य रहे संत॥

(32)
पढ़ लिखकर जब बोले भीम, गूंजे देश उजियार।
शब्द बने थे शक्ति तब, शासन हुआ लाचार॥

(33)
कानपुर से संसद तक, भीम चले निर्भीक।
कर्मपथ पर सत्य था, वाणी में संगीत॥

(34)
महासंघ की नींव में, श्रमिक जन की पीर।
दलितों की वह आह थी, जिसने दी तक़दीर॥

(35)
विनम्रता में वीरता, और वाणी में आग।
भीम खड़े थे सत्य पर, टूटे सब अभाग॥

(36)
संविधान के अनुच्छेद, जीवन का प्रकाश।
हर नागरिक को दे रहा, समानता का विश्वास॥

(37)
महासंघ का हर सदस्य, कर्म करे निश्छल।
जनहित को ही मान ले, अपना जीवन फल॥

(38)
जाति धर्म से ऊपर उठ, मानवता को गले।
भीम बताएं राह जो, उसी दिशा चले॥

(39)
वोट नहीं बस चेतना, यही भीम का भाव।
लोकतंत्र में जन बने, शासन का प्रभाव॥

(40)
राजनीति में नैतिकता, भीम का बड़ा उपदेश।
बिना नीति के देश क्या, मिटेगा हर शेष॥

(41)
अस्पृश्यता का कलंक जो, सदी सदी का दाग।
भीम ने धो डाला उसे, लिख दी नई जाग॥

(42)
संविधान की हर पंक्ति, लिखी लहू से भीम।
जनमन में जोश भर गई, टूटी हर जंजीम॥

(43)
नौजवान उठ खड़े हुए, ज्ञान हुआ हथियार।
भीमविचार के दीप से, जग में फैला प्यार॥

(44)
महासंघ की रीत यही, सेवा बन परमार्थ।
न्याय-समानता धर्म बन, चलो भीम के साथ॥

(45)
सत्ता का वह सिंहासन भी, झुके विचार महान।
भीमराव के नाम पर, गूंजा हिंदुस्तान॥

(46)
महासंघ का नारा गूंजे, “संविधान है जान।”
दलित-पिछड़ा एक हो, बने भारत महान॥

(47)
पाठशालाओं में गूंजे, बुद्ध विचार के गीत।
शिक्षा ही वह शस्त्र है, तोड़े हर प्रतीत॥

(48)
महासंघ की यात्रा में, कर्मपथ हो शुद्ध।
भीम विचार की धारा से, मिटे अंधी बुद्ध॥

(49)
समान अवसर सबको दो, यह भीम का उपदेश।
मेहनत से ही ऊँचाई, यही जग का संदेश॥

(50)
संविधान का रक्षक बन, महासंघ उठे।
अन्यायों के जाल को, सत्य से काटे॥

(51)
दलित, किसान, मजदूर संग, बने विकास प्रवाह।
भीम के शब्दों से मिले, नव भारत की राह॥

(52)
महिलाओं को भी मिले, शिक्षा का अधिकार।
भीम ने समाज में किया, मानवता विस्तार॥

(53)
भीमराव के एक हस्ताक्षर, बदले भाग्य हजार।
संविधान में अंकित हुआ, भारत का आधार॥

(54)
संविधान न केवल ग्रंथ, जीवन का विज्ञान।
हर जन में विद्यमान है, भीम का सम्मान॥

(55)
शोषित, पीड़ित, वंचित जन, पाओ अब अधिकार।
भीम तुम्हारे संग हैं, मिटेगा अंधकार॥

(56)
महासंघ का दीप जले, न्याय बने निशान।
दलितों के होठों पर, मुस्कान बने गान॥

(57)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, जीवन का संदेश।
भीम के इस तीन मंत्र से, जगे जन-प्रदेश॥

(58)
भ्रष्टाचार की दीवारें, ढहें सत्य की चोट।
संविधान का पालन ही, सच्ची जन की वोट॥

(59)
भीम का नाम अमर रहे, जन-जन का विश्वास।
महासंघ की शपथ यही, सबको दे उल्लास॥

(60)
समता का जो दीप जले, वही सच्चा धर्म।
भीमराव ने सिखलाया, मानवता का कर्म॥

(61)
संविधान की शक्ति से, जग में शांति छाए।
न्याय समानता से ही, नव युग बन जाए॥

(62)
सत्ता जब अन्याय करे, महासंघ ललकार।
भीमपथ पर चल पड़े, जन जन की पुकार॥

(63)
दलितों की आवाज है, भीमपथ का गीत।
जिसमें गूंजे समता का, अमर संगीत॥

(64)
महासंघ की शपथ यही, देश बने समभाव।
जाति-धर्म का हो न भेद, बस मानवता भाव॥

(65)
असमानता की रात को, भोर बनाएं भीम।
हर जन को अधिकार दे, मिटा दें सीम॥

(66)
संविधान की आत्मा में, छिपा है करुण भाव।
जनसेवा ही श्रेष्ठ कर्म, यही भीम प्रभाव॥

(67)
कर्म से ही पहचान हो, जाति से न माप।
भीम यही उपदेश दे, तोड़े हर पाप॥

(68)
श्रम की महिमा गाई जो, वही सच्चा वीर।
महासंघ के कर्मठ जन, करें नित नूतन पीर॥

(69)
अंबेडकर का नाम लो, भीम पथ अपनाओ।
संविधान की राह पर, जन जन को लाओ॥

(70)
समाज सुधारक भीम थे, मानवता का दीप।
हर युग में गूंजेगा नाम, उनके शब्द अतीव॥

(71)
महासंघ का विस्तार हो, हर जिले हर गाँव।
संविधान का मान रखे, हर भारतवासी नाम॥

(72)
समानता की फसल उगे, मिटे द्वेष का बीज।
भीम विचार के खेत में, उगे प्रेम का सीज॥

(73)
न्याय बिना प्रगति नहीं, यही संविधान कहे।
जन-जन में जागे विवेक, मानवता सहे॥

(74)
महासंघ का ध्वज लहराए, नीला नभ में शान।
जय संविधान! जय भीम! बने जग पहचान॥

(75)
शिक्षा मंदिर हर गाँव में, खुले उजियारा द्वार।
भीमपथ पर चल पड़ा, भारत का परिवार॥

(76)
राज्य नीति की धार से, मिटे अन्याय निशान।
संविधान की शक्ति से, बदले हिंदुस्तान॥

(77)
दलित पीड़ित संगठित हों, तोड़े बंधन जाल।
भीमपथ पर चल पड़ें, मिटे हर विकार॥

(78)
महासंघ का आह्वान है, उठो जागो जनमान।
संविधान का गीत गाओ, बनो महान॥

(79)
अंधविश्वास मिटा दो, ज्ञान बने प्रकाश।
भीमराव के पथ पे चलो, यही सच्चा विकास॥

(80)
महासंघ के मंच से, गूंजे सच्चा स्वर।
मानवता की जीत ही, भीम का है वर॥

(81)
बुद्ध, भीम, और संविधान, तीन दीप समान।
तीनों की ज्वाला से बने, मानवता महान॥

(82)
महासंघ की पुकार है, शिक्षा हर जन पाय।
ज्ञान बिना समाज में, समता न आए॥

(83)
न्यायालय से संसद तक, गूंजे एक विचार।
संविधान की गरिमा रखे, भारत सदा अपार॥

(84)
भीमपथ का अनुसरण, हर बालक सीखे।
जाति-भेद की दीवारें, एक दिन ढही के॥

(85)
महासंघ का कर्म यही, सेवा धर्म महान।
दलितोद्धारक भीम का, चलता अभियान॥

(86)
जाति रहित जो देश हो, वही सच्चा स्वराज।
संविधान से ही मिले, हर मन को आवाज॥

(87)
अंधकार पर प्रहार कर, जलाए ज्ञानदीप।
भीमराव के अनुयायी, करें सत्य प्रतीक॥

(88)
नारी शक्ति का मान कर, बढ़ा समभाव प्रीत।
महासंघ के मंच पर, गूंजे नव संगीत॥

(89)
भीमपथ का साधक बन, जो जन सेवा करे।
वह सच्चा अनुयायी है, जो अन्याय हरे॥

(90)
संविधान ही धर्म है, यह संदेश महान।
महासंघ का नाद गूंजे, गाए हिंदुस्तान॥

(91)
भूख न रहे, न भेद हो, यही भीम विचार।
समान अवसर हर जन को, मिले अधिकार॥

(92)
संविधान का रक्षक हो, हर जनमानस आज।
महासंघ के अनुशासन से, मिटे अन्याय का राज॥

(93)
भीमराव की प्रेरणा से, जन जन में बल आए।
संविधान की चेतना, हर हृदय बस जाए॥

(94)
महासंघ का दीप जलाए, सत्य और न्याय।
संविधान का अनुशासन ही, मानवता की माया॥

(95)
जाति नहीं पहचान अब, कर्म बने आधार।
भीम का यह सन्देश है, जीवन का सार॥

(96)
महासंघ की छाया में, सुख का सागर हो।
हर गरीब का जीवन भी, शिक्षा से भरपूर हो॥

(97)
संविधान का गान सदा, बच्चों के मुख से।
भीमराव का नाम जपे, भारत हर सुख से॥

(98)
श्रमिक, किसान, मजदूर संग, बने एक परिवार।
भीमविचार का घर बने, यह जग अपार॥

(99)
महासंघ का ध्वज लहराए, सत्य का परचाम।
संविधान के अनुयायी हों, जन जन में नाम॥

(100)
जय भीम! जय संविधान! जय मानवता धर्म।
महासंघ का यह प्रण रहे, सेवा ही कर्म॥

(101)
संविधान की ज्योति से, जग में फैला प्रकाश।
अंधकार अब मिट गया, आया नव विश्वास॥

(102)
भीमराव के कर्म से, जग ने जाना सत्य।
ज्ञान बना अस्त्र जब, टूटा अन्याय पथ्य॥

(103)
जाति नहीं इंसानियत, भीम का था विचार।
हर मानव का हो सम्मान, यही सच्चा प्यार॥

(104)
संविधान का अर्थ है, सबको हो अधिकार।
भेद-भाव का अंत हो, न्याय मिले अपार॥

(105)
महासंघ के अनुयायी, करें सच्ची साध।
भीमपथ के दीप से, जग में फैलें वाद॥

(106)
शिक्षा का उपहार दो, हर घर हो विद्यालय।
भीमराव के स्वप्न से, मिटे अन्याय जाल॥

(107)
दलितों की आवाज़ में, भीम का जोश समाए।
संविधान की शक्ति से, हर अन्याय ढह जाए॥

(108)
महासंघ का मिशन यही, ज्ञान बने हथियार।
अन्यायों से युद्ध कर, पाओ सच्चा प्यार॥

(109)
भीम विचार की मशाल से, जलता हर मन दीप।
न्याय-समानता का बन, भारत हो अतीव॥

(110)
संगठन की शक्ति से, पर्वत भी झुके।
संविधान का धर्म यही, एकता के ध्वज फहरें॥

(111)
श्रमिक-किसान की पुकार, महासंघ सुने।
संविधान का नियम यही, सब मिल साथ बने॥

(112)
महासंघ का गीत गाओ, भीमपथ अपनाओ।
मानवता का धर्म यही, प्रेम-पथ दिखलाओ॥

(113)
जात-पात की दीवारें, टूटें ज्ञान के बल।
भीम के उपदेश से ही, जग में हो सरल॥

(114)
संविधान की शक्ति से, भारत जाग उठा।
न्याय-समानता की धुन, जन-जन में गूंज उठा॥

(115)
महासंघ की रीत यही, सेवा धर्म महान।
संविधान का पालन ही, सच्चा हिंदुस्तान॥

(116)
भीमराव ने दी दिशा, मानवता का मोल।
संविधान के अक्षरों में, छिपा सत्य अनमोल॥

(117)
अंधविश्वास मिटा दिया, तर्क बना आधार।
भीमराव की सोच से, निकला नव विचार॥

(118)
महासंघ के हर जन का, यह पावन अभियान।
संविधान की रक्षा में, दे जीवन बलिदान॥

(119)
दलित, पिछड़े, शोषित सब, बने एक परिवार।
भीम विचार के सागर में, करें प्रेम विस्तार॥

(120)
महासंघ का यह प्रण है, हर मन में हो प्रकाश।
संविधान के रक्षक बन, करें जग उजास॥

(121)
नारी शक्ति संग उठे, शिक्षा का अभियान।
भीमराव के आशीष से, बदले हिंदुस्तान॥

(122)
महासंघ का नारा गूंजे, “न्याय हो समान।”
दलित-पिछड़ा, सब मिलें, बनें देश महान॥

(123)
संविधान की आत्मा है, समता की पुकार।
हर जन में अधिकार हो, यही भीम विचार॥

(124)
भेद मिटाओ, प्रेम बढ़ाओ, यही महासंघ वचन।
संविधान की राह पर, हो मानवता सृजन॥

(125)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, यह मंत्र महान।
भीमराव के शब्द में, बसा जन कल्याण॥

(126)
संविधान का पालन ही, सबसे बड़ा तप।
जो इसे निभाए सदा, वही मानव सब॥

(127)
महासंघ के कर्मवीर, सजग सदा तैयार।
न्याय-धर्म के पथ पर, करें जन प्रचार॥

(128)
दलितोद्धार की ज्योति जले, सबको दे उजास।
संविधान के पथ पर चल, बने जन विकास॥

(129)
भीमराव के मार्ग पर, चलना ही उपकार।
जात-पात से मुक्त हो, बने देश महान॥

(130)
महासंघ का ध्येय यही, मानवता विस्तार।
संविधान के दीप से, जग हो जगमगदार॥

(131)
शोषण का इतिहास मिटे, उठे नया समाज।
संविधान की छत्रछाया में, मिले सबको काज॥

(132)
भीमराव का स्वप्न था, हर जन हो स्वतंत्र।
भेदभाव के नाम पर, न हो कोई बंध॥

(133)
महासंघ के मंच से, उठे जन-स्वर नाद।
संविधान के गान से, मिटे हर विवाद॥

(134)
न्याय-समानता का बने, मानव का आधार।
संविधान की ज्योति से, मिटे अंधकार॥

(135)
भीमपथ का अनुयायी, सच्चा देश भक्त।
जो संविधान निभाए, वही श्रेष्ठ व्यक्त॥

(136)
महासंघ की लहर उठी, न्याय-सागर पार।
दलितों का अधिकार अब, होगा साकार॥

(137)
संविधान का धर्म यही, प्रेम और विवेक।
भीमराव का नाम ही, सच्चा दीप एक॥

(138)
महासंघ का कर्म यही, संगठित हो जन।
न्याय-समानता से बने, सच्चा भारत धन॥

(139)
संविधान का आदर कर, जीवन पथ सजाओ।
भीमराव के शब्दों को, कर्म में अपनाओ॥

(140)
नवयुग का निर्माण हो, शिक्षा की पुकार।
महासंघ का दीप बने, हर जन का आधार॥

(141)
दलित पीड़ित जन-जन में, नई चेतना आई।
भीमराव की वाणी से, दुनिया मुस्काई॥

(142)
महासंघ की एकता, भारत की पहचान।
संविधान के पथ पे चल, बन सच्चा इंसान॥

(143)
जाति रहित समाज हो, भीम का है सपना।
संविधान की शक्ति से, मिटे अन्याय अपना॥

(144)
संगठन की शक्ति से, उठे समता राग।
भीमराव के अनुयायी, करें नव परवाग॥

(145)
महासंघ का दीप जले, हर गाँव नगर में।
संविधान का नाद बजे, जन के स्वर में॥

(146)
शिक्षा के हर बीज से, उगे नई फसल।
भीमराव के पथ पर, भारत हो सफल॥

(147)
संविधान की नींव में, जनता का विश्वास।
महासंघ के कर्म से, आए नव प्रकाश॥

(148)
दलितोद्धार की ज्योति से, जग में फैले प्रेम।
भीम विचार का हो प्रभाव, मिटे हर नेम॥

(149)
महासंघ का ध्वज उठाओ, नीला नभ में शान।
संविधान के अनुयायी, गाएं जय-गान॥

(150)
भीमराव का नाम गूंजे, हर जन के मन में।
संविधान की बात रहे, हर भाषण-वचन में॥

(151)
श्रमिक किसान उठे सब, संग करें संघर्ष।
संविधान की शक्ति से, मिटे अन्याय का गर्व॥

(152)
महासंघ की राह चले, मानवता का फूल।
भीमविचार की छाया में, मिटे हर शूल॥

(153)
संविधान की आत्मा में, है जन का विश्वास।
भीमराव के शब्द से, हुआ भारत खास॥

(154)
महासंघ का नारा गूंजे, “सत्य हो आधार।”
संविधान का पालन हो, सच्चा उपहार॥

(155)
शिक्षा से ही शक्ति है, यह भीम ने बताया।
अनपढ़ मन में भी ज्ञान, दीपक बन जलाया॥

(156)
महासंघ के वीर जन, रखें दृढ़ संकल्प।
संविधान की शपथ लें, न्याय बने विकल्प॥

(157)
दलितों का उत्थान हो, भीम यही पुकार।
संविधान के मार्ग पर, बने जन आधार॥

(158)
महासंघ का कर्म यह, प्रेम और परमार्थ।
संविधान की छाया में, शुद्ध बने हर अर्थ॥

(159)
भीमराव की दृष्टि से, बदल गया समाज।
अब अन्याय न टिक सके, जग में कोई राज॥

(160)
महासंघ का आह्वान है, मानवता की जीत।
संविधान का गान सदा, गूंजे हर संगीत॥

(161)
भेदभाव की बेड़ी तोड़ो, बनो विवेकवान।
संविधान का पालन ही, सच्चा सम्मान॥

(162)
महासंघ का दीप जले, सत्य का उजियार।
भीम विचार का नाम हो, जन-जन में पुकार॥

(163)
अशिक्षा मिटे सदा, जागे हर मन ज्ञान।
भीमराव के आदर्श से, बने देश महान॥

(164)
संविधान की राह चले, जनजन एक साथ।
महासंघ का लक्ष्य यही, मानवता की बात॥

(165)
संगठन की शक्ति से, अंधकार हो खत्म।
भीमपथ का अनुयायी, बने जगत का मित्र॥

(166)
महासंघ के कर्मवीर, करें देश निर्माण।
संविधान के पालन से, बढ़े भारत मान॥

(167)
भीमराव के नाम पर, उठे समता गीत।
दलित-पिछड़ों संग बजे, मानवता संगीत॥

(168)
संविधान का धर्म यही, समानता का मंत्र।
महासंघ का दीप बने, जनसेवा का केंद्र॥

(169)
भूख-प्यास मिटे सदा, शिक्षा का हो राज।
भीम विचार का पथ यही, सच्चा स्वराज॥

(170)
संविधान की नींव में, न्याय-सत्य का भाव।
महासंघ का आचरण, करे इसे प्रभाव॥

(171)
शोषण पर जो प्रहार करे, वही सच्चा वीर।
भीमराव की वाणी से, बदले तक़दीर॥

(172)
महासंघ का संदेश है, एकता का मान।
संविधान के अनुयायी, बने जग सम्मान॥

(173)
दलित पीड़ित संगठित हों, भीम विचार के साथ।
संविधान की शक्ति से, खुले न्याय के पथ॥

(174)
महासंघ की वाणी में, गूंजे सच्चा स्वर।
संविधान की रक्षक हो, यह जनशक्ति अमर॥

(175)
भीमराव के आदर्श से, नव युग की शुरुआत।
संविधान के पालन से, जगे हर प्रभात॥

(176)
महासंघ का दीप जले, हर दिल में उजियार।
संविधान का पालन हो, जीवन का आधार॥

(177)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, तीन रत्न समान।
भीम विचार का सार यही, बने भारत महान॥

(178)
संविधान की धारा में, न्याय-समानता बहे।
महासंघ की चेतना, हर दिल में रहे॥

(179)
भेद मिटे, प्रेम बढ़े, यही भीम उपदेश।
महासंघ का ध्येय यही, जनकल्याण विशेष॥

(180)
संविधान का गान सदा, गूंजे जन समाज।
भीमराव के नाम से, मिटे अन्याय का राज॥

(181)
महासंघ की राह चले, शिक्षा का प्रचार।
भीमपथ का अनुयायी, बने हर परिवार॥

(182)
संविधान के रक्षक बन, खड़े रहें सदा।
न्याय-समानता का ध्वज, ऊँचा रहे अदा॥

(183)
महासंघ का कार्य यही, जन में चेतना लाना।
भीमराव का नाम सदा, दिलों में बसाना॥

(184)
शोषण का इतिहास मिटे, उठे मानव मान।
संविधान की छत्रछाया, बने सदा वरदान॥

(185)
दलितों के संग महासंघ, करे नया सृजन।
संविधान के पालन से, जग में हो जीवन॥

(186)
भीमराव के चरणों में, न्याय-सत्य का सार।
संविधान की हर धरा, बने उजियार॥

(187)
महासंघ का दीप बने, सत्य का प्रतीक।
संविधान की शक्ति से, हो भारत अद्वितीय॥

(188)
जात-पात का अंत कर, मानवता का धर्म।
भीमराव ने गढ़ दिया, जीवन का मर्म॥

(189)
महासंघ की लहर उठे, बने जन आंदोलन।
संविधान की नींव में, रखे समर्पण॥

(190)
भीम विचार की रौशनी, फैलाए नव ज्ञान।
संविधान के अनुयायी, बनें जन महान॥

(191)
महासंघ का गीत बजे, मानवता की तान।
भीमराव की गाथा से, चमके हिंदुस्तान॥

(192)
संविधान का अर्थ यही, समानता की जीत।
महासंघ का व्रत यही, न्याय हो अतीत॥

(193)
शिक्षा से ही स्वतंत्रता, यह भीम ने कहा।
ज्ञान बिना जीवन अधूरा, सत्य यही रहा॥

(194)
महासंघ के अनुयायी, करें नव निर्माण।
संविधान की ज्योति से, बने सशक्त हिंदुस्तान॥

(195)
दलित-पिछड़ा संग उठे, करें जन उत्थान।
भीम विचार का दीप जले, बढ़े सम्मान॥

(196)
महासंघ का ध्येय यही, समता का संकल्प।
संविधान के पालन से, सजे नव विकल्प॥

(197)
भीमराव के स्वप्न को, जन-जन तक पहुँचाओ।
संविधान की राह से, नव भारत बनाओ॥

(198)
महासंघ का नारा गूंजे, “न्याय हो महान।”
संविधान की आत्मा से, बने देश महान॥

(199)
भीम विचार अमर रहे, जन-जन का विश्वास।
महासंघ का यह प्रण है, जग में उजियास॥

(200)
जय संविधान! जय भीम! जय मानवता धर्म।
महासंघ का यह संकल्प, सेवा ही कर्म॥

(201)
संघर्षों से बनी दिशा, भीमराव ने दी।
न्याय-समानता का पथ, जन-जन में लिख दी॥

(202)
महासंघ की मशाल से, जग में फैला नाद।
संविधान के शब्द ने, तोड़े अन्याय के बांध॥

(203)
श्रमिक-किसान उठे सभी, न्याय हेतु पुकार।
भीम विचार की छाँव में, जग में हो सुधार॥

(204)
महासंघ का धर्म यही, सेवा मानव जात।
संविधान की छत्रछाया, सदा रहे साथ॥

(205)
भीमराव के आदर्श से, भारत बना महान।
दलितों के उत्थान का, खुला नया विधान॥

(206)
शिक्षा का दीपक जलाकर, मिटा अज्ञान अंधेर।
महासंघ ने दिखलाया, नवयुग का सवेर॥

(207)
संविधान की शक्ति से, टूटी अन्याय की दीवार।
भीम विचार की लौ बनी, जन का अधिकार॥

(208)
महासंघ के अनुयायी, करें सच्चा काम।
संविधान की राह पर, बढ़े देश का नाम॥

(209)
न्याय-समानता का गान, गूंजे हर दिल में।
भीमराव के शब्द रहें, जन-जन के मिल में॥

(210)
महासंघ का यह प्रण है, मानवता की जीत।
संविधान के पालन से, मिले नई प्रतीत॥

(211)
दलित-पिछड़ों की पुकार, पहुँचे हर सरकार।
भीमराव के मार्ग से, हो जनकल्याण विस्तार॥

(212)
महासंघ का दीप बने, सच्चाई की लौ।
संविधान के सागर में, जग नव आलोक खो॥

(213)
संगठन की शक्ति से, सबको मिलें अधिकार।
भीमराव की राह में, बस न्याय का विचार॥

(214)
जाति-पात मिटा सको, तो सच्चे हो वीर।
भीमराव का नाम लो, बढ़े जन अधीर॥

(215)
महासंघ के कर्तव्य में, छिपा जन उत्थान।
संविधान की शक्ति से, बने सशक्त इंसान॥

(216)
न्याय-सत्य का दीप जले, हर जन के द्वार।
भीमराव की राह से, जग हो उजियार॥

(217)
महासंघ की एकता, टूटे भेदभाव।
संविधान के सूत्र से, बहे नव प्रवाह॥

(218)
दलितों की मुस्कान में, भीम विचार बसाए।
महासंघ के कर्मवीर, जनमानस जगाए॥

(219)
शिक्षा से ही मुक्ति है, यह भीम ने कहा।
महासंघ ने उस पथ पर, दीपक बन रहा॥

(220)
संविधान के पथ पर चल, जन जन जागे साथ।
महासंघ का ध्येय यही, मानवता की बात॥

(221)
भीम के शब्द अमर रहें, गूंजें भारत में।
संविधान की छाया हो, हर एक नर में॥

(222)
महासंघ के कर्मवीर, करें नित्य प्रयास।
दलित-पिछड़ों संग मिले, सच्चा विकास॥

(223)
संविधान की मर्यादा, रखे हर इंसान।
भीमराव का आदर्श ही, सच्चा सम्मान॥

(224)
भेदभाव मिटे सभी, प्रेम बहे निर्मल।
महासंघ का कार्य यही, समता का पल॥

(225)
न्याय-समानता का गान, गूंजे ग्राम नगर।
संविधान का आदर्श बन, हो जन उजागर॥

(226)
महासंघ का धर्म यही, जनता की सेवा।
भीमराव की राह से, मिले सबको मेवा॥

(227)
दलित उत्थान की शपथ, महासंघ ने ली।
संविधान के पालन की, प्रतिज्ञा रची॥

(228)
ज्ञान बना हथियार जब, टूटी बेड़ी जात।
भीम विचार का सन्देश, बना जग का साथ॥

(229)
महासंघ की चेतना, जग में लाए सुधार।
संविधान की भाषा में, मिले अधिकार॥

(230)
भीमराव का नाम ही, है जीवन का मंत्र।
संविधान की शक्ति से, बने मानव केंद्र॥

(231)
श्रमिकों के हक की बात, महासंघ करे।
संविधान के आदेश से, सबका कल्याण भरे॥

(232)
दलित, किसान, मजदूर सब, हों एक विचार।
भीम विचार की धारा में, बहें बारंबार॥

(233)
महासंघ की एकता, न्याय की निशानी।
संविधान का पालन ही, भारत की कहानी॥

(234)
भीमराव के संदेश से, जगे जन विचार।
समानता का पथ बने, सच्चा उपहार॥

(235)
शिक्षा का दीप जले सदा, हर घर आंगन में।
महासंघ का स्वप्न यही, हर मन जीवन में॥

(236)
संविधान की रक्षा में, खड़ा महासंघ।
भीमराव के आदर्श से, बढ़े जन-संघ॥

(237)
भेदभाव का अंत हो, यही जन पुकार।
महासंघ की आस्था में, प्रेम अपार॥

(238)
शिक्षित समाज बने तभी, मिलेगा अधिकार।
भीमराव ने दी यही, सच्ची सरकार॥

(239)
महासंघ का कर्म है, मानवता का मान।
संविधान के दीप से, चमके हिंदुस्तान॥

(240)
भीमराव की राह पर, चलना धर्म महान।
संविधान का पालन ही, जीवन का सम्मान॥

(241)
महासंघ के अनुयायी, करें नव सृजन।
संविधान की धारा से, पाएं नव जीवन॥

(242)
दलित-पिछड़ों के संग, चले एक स्वर में।
भीमराव के आदर्श हों, हर देश घर में॥

(243)
संविधान की मर्यादा, बन जाए प्रणाम।
महासंघ का नारा गूंजे, “जय संविधान!”॥

(244)
न्याय-सत्य की ज्वाला से, जलता हर अन्याय।
भीमराव की शिक्षा से, मिलता जन न्याय॥

(245)
महासंघ का दीप सदा, जलता रहे महान।
संविधान की लहर में, बहता हिंदुस्तान॥

(246)
शिक्षा, संगठन, संघर्ष— तीन रत्न अमोल।
भीम विचार के दीप से, जग में उजियोल॥

(247)
महासंघ का लक्ष्य यही, दलित का उत्थान।
संविधान के पालन से, बढ़े सम्मान॥

(248)
जात-पात का अंत हो, बने एक समाज।
भीमराव का स्वप्न यही, सच्चा काज॥

(249)
संविधान के नियम से, चले हर इंसान।
महासंघ का पथ यही, नव भारत निर्माण॥

(250)
भीमराव की दृष्टि में, छिपा जन कल्याण।
संविधान की भाषा में, गूंजे हिंदुस्तान॥

(251)
महासंघ का गीत बजे, गाँव-गाँव नगर।
संविधान की गूंज बने, हर मानव घर॥

(252)
दलितों की मुस्कान से, सजे भारत भूमि।
भीम विचार की शक्ति से, जग में नई झूमी॥

(253)
संविधान की मर्यादा, रखे हर नागरिक।
महासंघ की चेतना, बने जन आशावादी॥

(254)
भीमराव के उपदेश से, मिटे अंधकार।
संविधान की लौ बने, मानव का आधार॥

(255)
महासंघ का धर्म यही, सेवा और सत्य।
संविधान की शक्ति से, मिटे हर व्यत्यय॥

(256)
न्याय-समानता की डगर, कठिन मगर महान।
भीमराव के मार्ग पर, चल भारत जान॥

(257)
महासंघ के कर्मवीर, करें नित्य प्रयास।
संविधान के पालन से, मिले विकास॥

(258)
भूख-अशिक्षा मिटे सदा, जागे नव युगमान।
भीम विचार का प्रकाश दे, जन-जन सम्मान॥

(259)
महासंघ का यह प्रण है, मानवता की शान।
संविधान के दीप तले, बढ़े हिंदुस्तान॥

(260)
भीमराव का नाम सदा, रहे जन के साथ।
संविधान की वाणी में, हो जीवन का नाथ॥

(261)
समानता का गान बजे, महासंघ के संग।
भीमराव के अनुयायी, जग में हों प्रखर॥

(262)
संविधान की आत्मा से, सजे भारत भूमि।
महासंघ का स्वप्न यही, प्रेम बने झूमी॥

(263)
दलित उत्थान की कथा, जन मन में बसी।
भीमराव की शिक्षा ने, हर बेड़ी कसी॥

(264)
महासंघ के मंच से, उठे नव उदघोष।
संविधान के पालन का, रहे सत्य जोश॥

(265)
श्रमिक किसान उठे सदा, लेकर नव विचार।
भीमराव की राह पर, जग में उजियार॥

(266)
महासंघ का दीप बना, सबका मार्गदर्शक।
संविधान की शक्ति से, भारत हो उत्कर्षक॥

(267)
भेद मिटे, प्रेम जगे, शिक्षा हो प्रसार।
महासंघ का उद्देश्य यही, सच्चा उपहार॥

(268)
संविधान का पालन ही, सबसे बड़ा धर्म।
भीमराव के अनुयायी, करें जगत पर कर्म॥

(269)
दलितोद्धार की लहर उठे, महासंघ के संग।
संविधान की मर्यादा, बने सदा अमंग॥

(270)
भीमराव का स्वप्न था, समता का समाज।
महासंघ के हाथों से, पूरा हो काज॥

(271)
नारी को भी मिले सदा, शिक्षा का अधिकार।
संविधान का यह नियम, अमिट उपहार॥

(272)
महासंघ का आह्वान, एकता का गीत।
भीम विचार की वाणी से, मिले नई प्रतीत॥

(273)
संविधान की रक्षा में, लगे हर जवान।
महासंघ का नाम रहे, सदा महान॥

(274)
दलित, गरीब, किसान सब, बनें एक स्वर।
भीमराव की वाणी गूंजे, जग में अमर॥

(275)
महासंघ के कार्य में, सच्चा प्रेम बसे।
संविधान की छाया में, जन जन हँसे॥

(276)
न्याय-सत्य की ज्योति से, जलता हर मन।
भीमराव के शब्दों में, सच्चा जीवन॥

(277)
महासंघ का ध्येय यही, सबका उत्थान।
संविधान की राह बने, जन कल्याण॥

(278)
दलितोद्धार की मशाल, जले हर नगर।
भीम विचार की शक्ति से, हो भारत अमर॥

(279)
संविधान के नियम से, मिले सबको स्थान।
महासंघ की भावना से, बढ़े सम्मान॥

(280)
भीमराव का संदेश है, शिक्षा ही शस्त्र।
महासंघ का नारा यही, ज्ञान ही अस्त्र॥

(281)
भेद मिटाओ, संग बढ़ाओ, यही महासंघ मंत्र।
संविधान की आत्मा में, बसा न्याय केंद्र॥

(282)
भीम विचार की राह पर, चलें सब इंसान।
संविधान का अनुशासन, बने पहचान॥

(283)
महासंघ का दीप सदा, मानवता का नाम।
संविधान की किरणों से, चमके हिंदुस्तान॥

(284)
दलितों की पुकार में, न्याय की पुकार।
भीमराव की वाणी में, सत्य अपार॥

(285)
संविधान के अक्षर में, छिपा नव युगदान।
महासंघ का पथ बने, मानवता महान॥

(286)
श्रमिक किसान संग उठे, शिक्षा हो आधार।
भीम विचार की धारा से, हो उजियार॥

(287)
महासंघ के कर्मवीर, रहें एकजुट सदा।
संविधान की ज्योति में, हो नव युग जगा॥

(288)
न्याय-समानता की लहर, उठे हर ओर।
भीमराव के अनुयायी, करें जन शोर॥

(289)
संविधान का गान सदा, हो जीवन गीत।
महासंघ की चेतना, बने नव प्रतीत॥

(290)
भीम विचार अमर रहे, मानव के साथ।
महासंघ का नाम गूंजे, जन-जन के नाथ॥

(291)
शोषण की बेड़ी तोड़कर, बनो विवेकवान।
संविधान की राह चले, बढ़े हिंदुस्तान॥

(292)
महासंघ की आस्था में, शिक्षा का प्रकाश।
भीमराव के मार्ग से, हो जन विकास॥

(293)
दलितों का उत्थान ही, महासंघ का धर्म।
संविधान की रक्षा ही, कर्म का मर्म॥

(294)
संविधान का दीप सदा, जले मानव मन।
भीमराव का नाम रहे, जीवन का धन॥

(295)
महासंघ का संकल्प है, समता का समाज।
संविधान की लहर बने, सच्चा काज॥

(296)
भीमराव के शब्दों से, जन में जागे जोश।
संविधान के पालन से, मिटे हर दोष॥

(297)
महासंघ के अनुयायी, बनें प्रेरक दीप।
संविधान की राह पर, चमके हर तीर्थ॥

(298)
न्याय-सत्य की विजय हो, अन्याय पर हार।
भीम विचार की छाया से, हो जन उद्धार॥

(299)
महासंघ का जयघोष, गूंजे चारों ओर।
संविधान की शक्ति से, टूटे अंधेर कोर॥

(300)
जय भीम! जय संविधान! जय समता समाज।
महासंघ का यह प्रण रहे, मानवता का राज॥

(351)
न्याय बिना समाज क्या, केवल भीड़ अंधी।
भीमराव ने दी दिशा, खोली बुद्धि पंधी॥

(352)
समानता का दीप है, संविधान महान।
हर जन को अधिकार दे, मिटाए हर मान॥

(353)
न्याय की यह ध्वजा उठी, महासंघ के हाथ।
अन्यायों के ताज को, उतारा एक साथ॥

(354)
भीम-विचार अमर रहे, जन-जन के दिल में।
संविधान की शक्ति हो, भारत के खिल में॥

(355)
जो बोले न्याय-सत्य का, वही देश-प्रेमी वीर।
अन्यायों के सामने, रहता अडिग अधीर॥

(356)
समानता की राह पर, बढ़ो निडर जवान।
भीमराव की सीख से, जग में पहचान॥

(357)
संविधान का हर नियम, जन का रक्षक नाम।
महासंघ ने साध लिया, इसका हर काम॥

(358)
जो झुका अत्याचार पर, उसने खोई लाज।
जो डटा भीम के संग, वही सच्चा साज॥

(359)
न्याय बिना स्वाधीनता, अधूरी है बात।
भीमराव ने समझाया, यह जीवन का साथ॥

(360)
दलित, श्रमिक, महिला हों, सबको मिले सम्मान।
संविधान का अर्थ यही, मानव का विधान॥

(361)
कानून बना कवच जब, थमी अन्याय की चाल।
महासंघ ने बांध दी, समता की ढाल॥

(362)
भीमराव की वाणी ने, दिल में दी आग।
अन्याय मिटाने लगा, जन का अनुराग॥

(363)
न्याय के प्रहरी बनो, यही महासंघ पुकार।
समानता के रक्षक हो, यही जीवन सार॥

(364)
जात-पात के बंधनों को, संविधान ने तोड़ा।
सत्य, करुणा, श्रम से ही, नव युग जोड़ा॥

(365)
भीमराव ने लिख दिया, मानव का इतिहास।
न्याय समानता धर्म से, बढ़ा नया विकास॥

(366)
न्यायालय में गूंजता, बाबा का विचार।
“हर जन को मिले हक़ समान”, यही अधिकार॥

(367)
महासंघ की सभा में, हुआ वही विचार।
न्याय-समानता से ही, बढ़े देश अपार॥

(368)
संविधान का धर्म है, सबको जोड़ बनाना।
मनु-विचार की राख से, नया जगत सजाना॥

(369)
जो संविधान बचाएगा, वही देश बचाए।
अन्यायों की आँधी में, दीप वही जलाए॥

(370)
महासंघ का रक्षक दल, जनता की आवाज़।
समानता की मशाल से, कर दे अन्याय लाज॥

(371)
भीमराव की लेखनी, सागर जैसी गहरी।
हर पंक्ति में दिखती है, भारत माता सहेरी॥

(372)
न्याय के उस सिंहासन पर, बैठा जन-धर्म।
भीमराव ने रच दिया, मानवता का कर्म॥

(373)
जो बोले न्याय की बात, वही सच्चा देश।
संविधान का पालन ही, जन का परिवेश॥

(374)
महासंघ ने सिख दिया, न्याय-समता नीति।
भीम-संविधान बना दिया, जन की सच्ची रीति॥

(375)
जो दबा, उठे उसी की, आवाज़ बनो साथ।
भीमराव के सैनिक हो, चलो जन के साथ॥

(376)
संविधान का हर शब्द, जैसे दीप उजाल।
अंधियारे को मिटाता, जन के हर सवाल॥

(377)
जाति, वर्ग, लिंग भेद सब, मिट जाएं जहाँ।
यही तो भारत बने, भीमराव का गान॥

(378)
न्याय बिना विकास क्या, केवल धन का ढेर।
संविधान ने दी सिखा, “मानवता ही फेर॥”

(379)
महासंघ के कर्मवीर, रक्षा करें विधान।
अन्यायों के तंतु को, काटें हर आन॥

(380)
भीमराव ने कहा सदा, “कानून का रखो मान।”
लोकतंत्र का रक्षक हो, जनता का अभियान॥

(381)
जो बोले समानता की, वही सच्चा वीर।
जाति के विरुद्ध चला, अडिग और गंभीर॥

(382)
महासंघ का लक्ष्य है, संविधान की रक्षा।
न्याय, नीति, सत्य से, जन को दे शिक्षा॥

(383)
शक्ति वही जो संगठित, नीति वही जो सत्य।
भीमराव की यह वाणी, अमर बने अनुगत्य॥

(384)
कानून ही वह दर्पण है, जिसमें दिखे देश।
महासंघ ने थाम लिया, यही सच्चा वेश॥

(385)
न्याय का दीपक जलाए, महासंघ के वीर।
अंधकार मिटा रहे, भीमपथ अधीर॥

(386)
संविधान का रक्षक जो, वही जननायक नाम।
जो तोड़े भेद-भाव सब, वही सच्चा काम॥

(387)
न्याय नहीं तो क्या भला, लोकतंत्र का मोल।
भीमराव ने समझाया, यही सच्चा गोल॥

(388)
महासंघ ने बाँट दी, चेतना महान।
हर वर्ग को मिल गया, अपना पहचान॥

(389)
अनुच्छेदों की हर पंक्ति, गूंजे न्याय-सुर।
बाबा की वाणी कहे, “भेद मिटाओ दूर॥”

(390)
संविधान का धर्म यह, सबको दे समान।
जाति-पांति के बंधन को, रखो अब निदान॥

(391)
महासंघ के मंच से, उठी जन पुकार।
न्याय-समानता हेतु फिर, लहर उठा विचार॥

(392)
भीमराव ने रच दिया, नीति का आधार।
महासंघ ने जोड़ा सब, जनसेवा विस्तार॥

(393)
संविधान की रक्षा में, बढ़े वीर दल।
अन्यायों को रोकते, जन के संग चल॥

(394)
जो न झुके अत्याचार पर, वही भीम भक्त।
न्याय की राह चले जो, वही सच्चा वक्त॥

(395)
महासंघ ने ठान ली, संविधान की लाज।
जन के हक में बोले जो, वही जन-राज॥

(396)
भीमराव के अनुयायी, रखते जाग विचार।
न्याय, समता, श्रम-पथ, यही उनका आधार॥

(397)
जो न्याय की बात करे, वही देश दुलार।
जो करे विभाजन, उसका अंत अपार॥

(398)
महासंघ का शपथ यही, रक्षण संविधान।
लोकतंत्र की ज्योति से, रोशन हिन्दुस्तान॥

(399)
अधिकारों की रक्षा को, बना महासंघ वीर।
भीम विचार के पथ पर, अडिग और गंभीर॥

(400)
न्याय-समानता धर्म से, बढ़े भारत देश।
संविधान का हो सदा, जन में परिवेश॥

(401)
कानून बना कवच जब, अन्याय भागा दूर।
महासंघ की शक्ति से, जग में फैला नूर॥

(402)
संविधान की मर्यादा, रखनी सबके बीच।
जो इसे निभाए सदा, वही सच्चा नीच॥

(403)
भीमराव के हाथ से, लिखी वह किताब।
जिसमें लिखा जनसेवा, यही सच्चा आब॥

(404)
महासंघ के कर्मवीर, गूंजे हर नगर।
संविधान का नाम लेकर, करें जन को मगर॥

(405)
न्याय, नीति, सत्य संग, महासंघ का भाव।
भीमराव के नाम से, बढ़े हर गाँव॥

(406)
जाति-भेद मिटा दिया, संविधान ने सत्य।
महासंघ ने थाम ली, समानता की गत्य॥

(407)
जो बोले संविधान का, पालन हर क्षण।
वही सच्चा देशभक्त, वही मानव धन॥

(408)
भीमराव की प्रेरणा, संविधान की धारा।
महासंघ ने गाया जो, बनी लोकतारा॥

(409)
न्याय बिना आज़ादी, जैसे नदिया सूखी।
भीमराव ने बहाई थी, समता की दूखी॥

(410)
महासंघ का लक्ष्य यही, जनहित की रक्षा।
संविधान का रक्षक हो, जनभाव साक्षा॥

(411)
लोकतंत्र की नींव है, भीमराव विचार।
महासंघ ने जगाया, यह सच्चा व्यवहार॥

(412)
जो तोड़े संविधान को, उसका अंत निकट।
जो सहेजें इसका मान, बने जन-शिखर॥

(413)
न्याय की वह लहर उठी, लखनऊ के बीच।
महासंघ की पुकार से, काँपे अत्याचारी नीच॥

(414)
संविधान के शब्द में, गूंजे जन-उद्गार।
महासंघ ने रच दिया, नया आकार॥

(415)
भीमराव के मार्ग पर, महासंघ अडिग।
संविधान की छाँव में, जन हुआ निर्भीक॥

(416)
जो बोले समानता की, वही असली धर्म।
महासंघ का यही पथ, यही मानव कर्म॥

(417)
संविधान के अनुयायी, जनता की आवाज़।
भीमराव के सैनिक हैं, करते सबका काज॥

(418)
जात-पात की जंजीरें, तोड़ो शिक्षा से।
न्याय मिले हर प्राणी को, सेवा की इच्छा से॥

(419)
महासंघ का अभियान है, जन-जन की रक्षा।
संविधान की राह पर, बढ़े नित साक्षा॥

(420)
जो संविधान निभाएगा, वही बनेगा वीर।
भीमराव की राह पर, पाता आदर गंभीर॥

(421)
न्याय ही वह गंगा है, जो बहती हर ओर।
महासंघ ने साध ली, यह पवित्र डोर॥

(422)
संविधान की छत्रछाया, जन का हो आधार।
भीमराव के वचनों से, बने नया संसार॥

(423)
महासंघ के वीर सब, रक्षक जनतंत्र।
अन्यायों की आँधी में, दीपक अचंचल मंत्र॥

(424)
जो बोले समानता की, वही बने सिपाही।
भीमराव के नाम पर, दे देश गवाही॥

(425)
न्याय बिना विकास क्या, केवल दिखावा।
भीमराव ने सिखाया, जनसेवा ही दावा॥

(426)
संविधान की दीवार को, मजबूत बनाओ।
लोकतंत्र के दुश्मनों को, सदा दूर हटाओ॥

(427)
महासंघ की शक्ति से, उठे नव निर्माण।
न्याय-समानता का बजे, भारत में गान॥

(428)
भीमराव के अनुयायी, सत्य के पुजारी।
संविधान के प्रहरी हैं, जनता के न्यारी॥

(429)
जो बोले संविधान से, बढ़े जन की शान।
महासंघ ने बाँट दी, चेतना महान॥

(430)
न्याय का पर्व मनाओ, संविधान दिवस।
भीमराव को याद कर, रखो जन विश्वास॥

(431)
समानता की राह में, महासंघ अडिग।
संविधान की ज्योति से, जन हुआ निर्भीक॥

(432)
जो बोले सत्य-समान, वही असली सन्त।
महासंघ ने बाँट दिया, न्याय का मंत्र॥

(433)
संविधान की रक्षा में, बनो संगठित जन।
भीमराव का यही वचन, यही जीवन धन॥

(434)
जाति का जो तोड़े बंधन, वही बना आज़ाद।
संविधान ने सिख दिया, यही परमवाद॥

(435)
महासंघ का जयघोष, न्याय-समता गीत।
भीमराव की प्रेरणा, सबमें फैली प्रीत॥

(436)
जो बोले संविधान का, सच्चा आदर्श।
वही रखेगा देश को, एक, अखंड, परिमर्श॥

(437)
न्याय-समानता संग हो, धर्म बने नीति।
भीमराव के अनुयायी, लिखें नई प्रीति॥

(438)
संविधान की छाया में, फलता जनप्रेम।
महासंघ ने बाँट दिया, एकता का नेम॥

(439)
न्याय ही वह धर्म है, जो देता उद्धार।
भीमराव ने बाँट दिया, यह अमर विचार॥

(440)
महासंघ ने थाम ली, संविधान की ज्योति।
अन्यायों के अंधकार में, जलाई सम-विभूति॥

(441)
जो बोले न्याय समान, वही सच्चा जन।
भीमराव के अनुयायी, रचें नया वतन॥

(442)
संविधान की रक्षा ही, सबसे बड़ा धर्म।
महासंघ ने माना इसे, जीवन का कर्म॥

(443)
लोकतंत्र की जड़ वही, जो जनता की बात।
भीमराव ने बोई थी, इसकी हर जात॥

(444)
महासंघ का शौर्य है, न्याय की दीवार।
जिस पर खड़ा है देश ये, अडिग अपार॥

(445)
भीमराव का नाम जब, गूंजे हर दिशा।
संविधान की ध्वजा बहे, जन-जन की निशा॥

(446)
न्याय बिना न समता हो, समता बिना न शांति।
संविधान की राह यही, रखो यही भ्रांति॥

(447)
महासंघ के वीर सब, संविधान के रक्षक।
लोकतंत्र के दीये हैं, जन के सच्चे भक्षक॥

(448)
संविधान का धर्म यही, सबको मिले सम्मान।
भीमराव ने लिख दिया, भारत का विधान॥

(449)
न्याय-समानता गीत ये, गूंजे गाँव-शहर।
महासंघ का नाम अब, जग में अमर॥

(450)
भीमराव की दी हुई, संविधान की रीत।
महासंघ ने निभाई है, सत्य, धर्म, प्रीत॥

(351)
न्याय बिना समाज क्या, केवल एक दिखाव।
भीमराव ने सिखाया, समानता ही भाव॥

(352)
संविधान का सार है, सबको मिले अधिकार।
धर्म, जाति से परे हो, मानव का व्यवहार॥

(353)
कानून के मंदिर में, सबका हो सम्मान।
ग़रीब, अमीर बराबरी से, पाए अपना मान॥

(354)
महासंघ का व्रत यही, संविधान की शान।
हर जन तक पहुँचे सदा, न्याय का विधान॥

(355)
भीमराव के शब्द हैं, "न्याय बिना न शांति"।
समानता से ही बँधे, भारत की भ्रांति॥

(356)
अंधकार में दीप बन, बाबा का संदेश।
न्याय मिले सबको यहाँ, यही सच्चा देश॥

(357)
सत्ता जब अन्याय करे, जनता बोले सत्य।
महासंघ के सैनिक तब, करें नीति की मत्य॥

(358)
जो संविधान को तोड़े, वो शत्रु महान।
जनतंत्र की रक्षा करे, महासंघ अभियान॥

(359)
भीमराव के अनुयायी, करें नहीं अन्याय।
न्याय-पथ ही जीवन है, यही सच्ची राय॥

(360)
न्याय बिना स्वतंत्रता, केवल एक छलावा।
बाबा बोले अधिकार से, मिलती है नव छाया॥

(361)
महासंघ का नारा है, संविधान की लाज।
जो रक्षा को खड़ा रहे, वही सच्चा राज॥

(362)
कानून सबके लिए समान, यही भारत नींव।
भीमराव के शब्द हैं, “यह सत्य अतीव॥”

(363)
जिस दिन न्याय बिके नहीं, वही सच्चा पर्व।
महासंघ तब बाँटता, सच्चा जन गर्व॥

(364)
भेदभाव की आग को, ज्ञान करे ठंडा।
संविधान का गान तब, बजे अनमंडा॥

(365)
नारी, दलित, किसान सब, पाए अधिकार समान।
भीमराव की रचना है, यह नव विधान॥

(366)
महासंघ के मंच से, उठा यही नाद।
न्याय ही है जीवन का, सच्चा संवाद॥

(367)
न्याय-समानता जोड़ते, मन को एक साथ।
संविधान के शब्द से, मिटे सभी आघात॥

(368)
कानून की छाया में, जन का हो उत्थान।
भीमराव का भारत तब, बने सच्चा मान॥

(369)
जो बोले संविधान का, वही देशभक्त महान।
अन्यथा केवल शब्द हैं, बिन अर्थ विधान॥

(370)
महासंघ ने ठानी है, न्याय की रखवाली।
हर गाँव में जागे फिर, संविधान की लाली॥

(371)
जात-पात की दीवारें, गिरें समानता से।
भीमराव का स्वप्न फिर, फूले करुणा से॥

(372)
न्याय तभी संभव बने, जब सब हों बराबर।
बाबा बोले यह वचन, बना अमर आधार॥

(373)
संविधान की गोद में, पलता हर इंसान।
महासंघ ने सिखाया, यही उसका मान॥

(374)
शासन-नीति वही सही, जो दे सबको भाग।
भीमराव की दृष्टि में, यही धर्म का राग॥

(375)
न्याय की यह मशाल जो, जन-जन तक पहुँचे।
महासंघ के हाथों से, फिर अंधकार बुझे॥

(376)
संविधान को मानना, सबसे बड़ा धर्म।
जो न माने वह करे, समाज को कर्म॥

(377)
न्याय के रक्षक बनो, यह ही है उपदेश।
भीमराव का यह वचन, जग के लिए विशेष॥

(378)
जाति, धर्म से ऊपर हो, मानव का सम्मान।
यही लिखा संविधान ने, यही भारत मान॥

(379)
महासंघ के कार्यकर्ता, संविधान प्रहरी।
न्याय-समानता की दिशा, रखे सदा सहेरी॥

(380)
भीमराव का एक संदेश, “धर्म न तोड़े साथ।”
जो जोड़े सबको स्नेह से, वही सच्ची बात॥

(381)
संविधान का ज्ञान ही, समाज का आधार।
अज्ञानता मिटा सके, यही सच्चा संसार॥

(382)
न्याय वहीं है जीवित जब, भय न करे वजूद।
महासंघ का काम है, बनना जन-दूत॥

(383)
जो बोले सबका हक़ है, वो ही सच्चा वीर।
भीमराव के अनुयायी, जन के अधीर॥

(384)
नारी का सम्मान भी, संविधान की देन।
महासंघ ने बाँधी है, समानता की रेन॥

(385)
कानून सबका एक है, भेद नहीं कोई।
भीमराव के अनुशासन में, न्याय सदा होई॥

(386)
संविधान है दीपक सा, जो अंधकार मिटाए।
महासंघ की रैली में, हर जन दीप जलाए॥

(387)
जो न माने संविधान, वही करे अधर्म।
भीमराव ने कहा था, यह है जीवन कर्म॥

(388)
न्याय-समानता जब मिले, तब जन सुख पावे।
महासंघ उस राह पर, दीप सदा जलावे॥

(389)
जातिवाद की जंजीरें, तोड़ो सत्य के साथ।
संविधान का पथ यही, यही सच्ची बात॥

(390)
न्याय तभी साकार हो, जब हर मन उजियार।
महासंघ का कार्य यह, हर जन का अधिकार॥

(391)
भीमराव का अमर ग्रंथ, संविधान महान।
इसकी रक्षा कर सका, वही सच्चा इंसान॥

(392)
महासंघ के कार्य में, जन का उत्थान भाव।
संविधान का पालन ही, उसका था लगाव॥

(393)
कानून को आदर दो, मत बनो अंधकार।
भीमराव के संदेश में, यही प्रकाश अपार॥

(394)
न्याय जब हर द्वार पे, पहुँचे समभाव।
भारत होगा विश्व में, सच्चा नव प्रभाव॥

(395)
महासंघ का ध्वज उठे, संविधान के नाम।
न्याय की रक्षा करे, यही उसका काम॥

(396)
भीम-संविधान एक है, जैसे सूरज-दीप।
जिससे जग का हर जन, पाए नवल अनीप॥

(397)
भेद मिटा के जो करे, न्याय समान भाव।
महासंघ की रचना है, जनहित का चाव॥

(398)
संविधान के अनुयायी, जन-जागरण वीर।
न्याय-समानता हेतु वे, सदा रहे अधीर॥

(399)
महासंघ ने ठानी है, हर दिल तक पहुँच।
भीमराव की सीख से, जन को दे अनुग्रह॥

(400)
न्याय-समानता बाँटे जब, हर भारतवासी।
तब बने यह भूमि पुनः, बुद्ध भूमि अविनाशी॥

(451)
बहुजन का जो एक स्वर, वही भारत गीत।
भीमराव ने जो सिखाया, वही सच्ची प्रीत॥

(452)
संगठित जब जन हुआ, टूटा हर अन्याय।
महासंघ की शक्ति ने, लिखी नयी परछाय॥

(453)
लोकतंत्र की नींव है, जनता का विश्वास।
भीमराव ने गढ़ दिया, इसका सच्चा त्रास॥

(454)
जन-जागरण का दीपक, जलता गाँव-गाँव।
महासंघ के कार्य से, जागे नव प्रभाव॥

(455)
जो बोले बहुजन एक हो, वही करे उपकार।
संविधान की राह पर, यही सच्चा सार॥

(456)
भीमराव का मंत्र है, “संगठित हो जनता।”
भेद-भाव की दीवारें, तोड़ो यही संतता॥

(457)
महासंघ की वाणी में, जागे नव अरमान।
बहुजन एकता बने, जन-जन का सम्मान॥

(458)
लोकतंत्र का धर्म है, जनता की भागीदारी।
भीमराव के सिद्धांत से, यही है तैयारी॥

(459)
जो बोले सत्य-समान, वही सच्चा नेता।
महासंघ ने गढ़ा नया, भारत का चेहरा॥

(460)
जन-जागरण का स्वर उठे, शिक्षा बने शस्त्र।
भीमराव का अनुशासन, बने नव अस्त्र॥

(461)
बहुजन जब संग हुए, शक्ति हुई अपार।
महासंघ ने सिखाया, यही सच्चा विचार॥

(462)
जाति नहीं इंसान को, जोड़ता उसका कर्म।
भीमराव की सोच से, बदल गया धर्म॥

(463)
जन-जागरण अभियान है, नव चेतना दीप।
महासंघ की राह पर, चले हर सदी निप॥

(464)
लोकतंत्र का रक्षक वो, जो जनता से जुड़ा।
भीमराव ने दिखाया, यही भारत खड़ा॥

(465)
बहुजन का यह नारा है, “हम सब एक समान।”
महासंघ का यही ध्येय, यही महान पहचान॥

(466)
भीमराव की छाया में, खिले जन का भाग।
समानता के फूल से, सजे भारत राग॥

(467)
लोकतंत्र का यह घर है, सबकी साझेदारी।
महासंघ के मंच पर, है यही तैयारी॥

(468)
बहुजन एकता की डगर, कठिन मगर महान।
बुद्ध-भीम के अनुयायी, चलें उसी पहचान॥

(469)
जन-जागरण का अर्थ है, चेतना का जन्म।
भीमराव के संदेश से, मिटा अंधा कर्म॥

(470)
महासंघ की सभा में, बजता यह उदघोष।
“बहुजन हिताय बने जग, यही जन घोष॥”

(471)
लोकतंत्र तभी खिला, जब सब हों बराबर।
भीमराव ने यह कहा, बना अमर आधार॥

(472)
बहुजन का जो संगठन, वही बने उजियार।
महासंघ की ज्योति से, चमके हर परिवार॥

(473)
संविधान की गोद में, पलती जनता ताकत।
भीमराव ने दिखाया, जनता की अकालत॥

(474)
जन-जागरण की मशाल, जलती हर गली।
महासंघ के युवाओं ने, दी नई कली॥

(475)
बहुजन जब शिक्षित हुआ, टूटी हर बेड़ी।
भीमराव के पथ पर तब, चली जन खड़ी॥

(476)
लोकतंत्र का पर्व यही, जनता का है हक।
महासंघ ने सिखाया, मत बनो भक॥

(477)
संविधान का अर्थ है, जनता की आवाज़।
भीमराव ने गाया यह, जन-जन का साज़॥

(478)
बहुजन एकता बनी जब, टूटा अन्याय।
महासंघ की रैली में, उठा जन नाद॥

(479)
लोकतंत्र का फूल वही, जो सबको महके।
भीमराव का संविधान, सदा अमर रहे॥

(480)
जन-जागरण का मंत्र है, शिक्षा और विचार।
महासंघ ने जगाया, यह नव आचार॥

(481)
बहुजन चेतना बढ़े, मिटे भेदभाव।
भीमराव की नीति से, आए नव प्रभाव॥

(482)
जन की शक्ति अजेय है, यदि एक हो मन।
महासंघ ने बाँधा तब, सच्चा बंधन॥

(483)
लोकतंत्र की मशाल है, जनता का अधिकार।
भीमराव के पथ पे चल, मिले जन उद्धार॥

(484)
जो बोले “हम सब एक”, वही सच्चा ज्ञानी।
महासंघ की भाषा में, यही मानवता जानी॥

(485)
बहुजन का इतिहास है, संघर्षों की आग।
भीमराव ने सिखाया, सहनशीलता राग॥

(486)
जन-जागरण से ही बने, भारत की पहचान।
महासंघ ने रचा नया, बुद्धिमान जहान॥

(487)
लोकतंत्र का प्राण है, जनता की सुनवाई।
भीमराव के संविधान में, यही सच्चाई॥

(488)
बहुजन एकता बोले अब, "जाति की ना बात।"
संविधान का पालन ही, सच्ची सौगात॥

(489)
महासंघ के युवाओं ने, शिक्षा ली यह धार।
लोकतंत्र की रक्षा में, रहें सदाचार॥

(490)
जन-जागरण की धारा से, बहा नव विचार।
भीमराव के नाम से, जागा संसार॥

(491)
बहुजन चेतना जागे जब, टूटे अन्याय जाल।
महासंघ तब बने नया, युग का मशाल॥

(492)
लोकतंत्र की सुंदरता, जनता का है मेल।
भीमराव ने बाँधा यह, एकता का खेल॥

(493)
जन-जागरण का लक्ष्य है, शिक्षा का प्रसार।
महासंघ का दीपक है, जन में उजियार॥

(494)
बहुजन एकता का गीत, गूँजे हर दिल में।
भीमराव का संविधान, चमके नील गगन में॥

(495)
लोकतंत्र की साँस में, बहुजन का स्वर।
महासंघ ने गाया यह, भारत अमर॥

(496)
जन-जागरण का संदेश, सत्य का उजियार।
भीमराव की सीख से, बढ़े मानव प्यार॥

(497)
बहुजन चेतना जगाओ, मिटे भय अज्ञान।
संविधान की राह पे चल, हो जन कल्याण॥

(498)
लोकतंत्र की ढाल यही, जनता की शक्ति।
महासंघ के वीर सभी, जनसेवा भक्ति॥

(499)
जो बहुजन का दुख समझे, वही बने नेता।
भीमराव ने कहा यही, सच्चा चेहरा॥

(500)
जन-जागरण अभियान से, गूँजा हर संसार।
महासंघ ने लिख दी फिर, जन की सरकार॥

(501)
लोकतंत्र की राह पर, जनता हो जागरूक।
संविधान का पालन ही, जन का सुख-दूक॥

(502)
बहुजन चेतना जगती, जब शिक्षा फैलती।
भीमराव के वचन से, दुनिया सँवरती॥

(503)
जन-जागरण की राह में, सच्चाई का साथ।
महासंघ ने बोला है, यही भारत की बात॥

(504)
लोकतंत्र तभी सजे, जब जनता स्वतंत्र।
भीमराव की यह सीख, रहे युग-युग केंद्र॥

(505)
बहुजन जब उठ खड़े, तो न्याय हुआ जीवित।
महासंघ ने दी दिशा, बुद्धि से विनीत॥

(506)
जन-जागरण की बयार, फैले देश-दिशा।
भीमराव के विचार से, मिटे हर निशा॥

(507)
लोकतंत्र की ज्योति अब, बहुजन संग बसी।
महासंघ ने कर दिखाई, भारत की हँसी॥

(508)
जो बोले शिक्षा जरूरी, वही सच्चा वीर।
भीमराव की वाणी में, यही है नीर॥

(509)
बहुजन जब एक हुए, बदला भारत मान।
महासंघ ने रच दिया, नव संविधान॥

(510)
जन-जागरण का पर्व है, बुद्ध-विचार महान।
भीमराव के नाम से, खिला हिन्दुस्तान॥

(511)
लोकतंत्र की नींव में, बुद्ध-भीम विचार।
महासंघ ने संभाली यह, सच्ची जिम्मेदार॥

(512)
बहुजन चेतना बने अब, जन जन का आधार।
संविधान की रेखा में, सजे नया संसार॥

(513)
जन-जागरण के दीपक से, चमके हर गाँव।
महासंघ ने दी नई, आशा की छाँव॥

(514)
लोकतंत्र का धर्म यही, जनता की रक्षा।
भीमराव ने बोला था, यही है सच्चा॥

(515)
बहुजन एकता लहर, फैले देशभर।
महासंघ का ध्वज उठे, बने नव स्वर॥

(516)
जन-जागरण की रचना में, शिक्षा का है भाग।
संविधान का पालन ही, भारत का राग॥

(517)
लोकतंत्र का ताज वही, जो जन से सजा।
भीमराव ने सिखाया यह, सच्चा सजा॥

(518)
बहुजन चेतना बढ़े, जब शिक्षा फैले।
महासंघ के संदेश से, सब मन खेले॥

(519)
जन-जागरण की पुकार, “संविधान अमर।”
भीमराव का नाम रहे, जग में सदा स्वर॥

(520)
लोकतंत्र की लहर उठे, बहुजन संग चले।
महासंघ ने दिखाया मार्ग, सत्य से भरे॥

(521)
बहुजन जब जागे सब, मिटे अंधकार।
भीमराव की वाणी से, फैले उजियार॥

(522)
जन-जागरण से ही बने, भारत का उत्थान।
महासंघ के पथ पर चले, बुद्धिमान जहान॥

(523)
लोकतंत्र की शपथ लो, संविधान को मान।
भीमराव के चरणों में, सच्चा हिन्दुस्तान॥

(524)
बहुजन एकता की धार, मिटाए भेदभाव।
महासंघ ने बाँधी फिर, नव न्याय प्रभाव॥

(525)
जन-जागरण की जीत है, शिक्षा की पुकार।
भीमराव ने कहा यही, सच्चा संस्कार॥

(526)
लोकतंत्र के रक्षक सब, जन के प्रहरी वीर।
महासंघ का लक्ष्य यही, जन हित अधीर॥

(527)
बहुजन चेतना बोले, “हम सबका एक नाम।”
संविधान की रक्षा में, लगे हर प्राण॥

(528)
जन-जागरण से जागे, हर गाँव हर थान।
महासंघ ने लिख दिया, नया विधान॥

(529)
लोकतंत्र की ध्वजा रहे, संविधान के साथ।
भीमराव के अनुयायी, सच्चे जनपथ॥

(530)
बहुजन चेतना बढ़े, सजे समानता रंग।
महासंघ की धुन बजे, भीमराव संग॥

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