डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा भाग–1 : समता-सूर्य उदय (100 दोहे) (1) जय भीम का ऊँचा ध्वज, जग में फैले शोर। संविधान का दीप यह, उजियारे हर ओर॥ (2) जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, फोड़ी अंधी राह। ज्ञान दिया हर जन को, कर दी जीवन चाह॥ (3) श्रमिक, किसान, दलित निराश, सबको दी पहचान। भीम विचा


डा. भीमराव अंबेडकर संवैधानिक महासंघ गाथा

भाग–1 : समता-सूर्य उदय (100 दोहे)

(1)
जय भीम का ऊँचा ध्वज, जग में फैले शोर।
संविधान का दीप यह, उजियारे हर ओर॥

(2)
जाति-भेद की बेड़ी तोड़ी, फोड़ी अंधी राह।
ज्ञान दिया हर जन को, कर दी जीवन चाह॥

(3)
श्रमिक, किसान, दलित निराश, सबको दी पहचान।
भीम विचार का नाद है, भारत की शान॥

(4)
अंधकार में दीप थे, जब नभ था बेजान।
भीमराव ने की जगत में, नव संविधान॥

(5)
कानूनी भाषा में लिखा, जनमन का इतिहास।
न्याय-समानता का दिया, अमर उपदेश प्रकाश॥

(6)
महासंघ की शपथ यही, मानवता का धर्म।
संविधान ही देवता, सेवा ही कर्म॥

(7)
अशिक्षा की जंजीर को, तोड़ा ज्ञान पुकार।
साक्षरता से नव युग आया, भीम थे आधार॥

(8)
दलितों के मस्तक चढ़ी, आत्मगौरव माला।
संविधान की छत्रछाया, भीम की दीवाला॥

(9)
सत्य अहिंसा का पथ दिखाया, बुद्ध विचार अपनाए।
भीमपथ का जो भी चलता, मानव धर्म निभाए॥

(10)
संविधान के अक्षर बोले, न्याय-समान विचार।
हर नागरिक का हो सम्मान, यही भीम उपहार॥

(11)
भूख-प्यास से जूझता, श्रमिक जब रोया रात।
भीम उसे अधिकार दिलाए, दी नव सौगात॥

(12)
कर्मभूमि संसद बनी, लेखनी बनी तलवार।
अन्यायों के विरुद्ध चली, जनशक्ति अपार॥

(13)
भीमराव का जीवन है, संघर्षों की गाथा।
हर आँसू ने गढ़ दिया, नव युग की परिभाषा॥

(14)
महासंघ का स्वर गूंजे, संविधान का मान।
दलित-पिछड़ों संग उठे, भारत महान॥

(15)
शिक्षा-संघर्ष-संगठन, तीन दीप प्रज्वाल।
भीम का यह मंत्र अमर, जन जन में लाल॥

(16)
कायम रहे संविधान का, हर अक्षर साकार।
लोकतंत्र की नींव यही, सबसे मजबूत आधार॥

(17)
महासंघ के हर सदस्य का, एक यही संदेश।
न्याय-समानता बिन नहीं, सच्चा देश विशेष॥

(18)
अंधभक्ति का अंत कर, विवेक दीप जलाए।
भीमविचार के अनुयायी, जग में मान बढ़ाए॥

(19)
सत्ता का जब खेल हुआ, छला गया इंसान।
भीम खड़े थे सच्चाई से, बोले संविधान॥

(20)
संविधान के पृष्ठों में, जन का जीवन बसता।
हर अनुच्छेद में चमके, भीम का नाता सच्चा॥

(21)
अंग्रेजों की बेड़ी टूटी, पर मन अब भी दास।
भीम उठे जब मंच पर, गूंजा नव विकास॥

(22)
समान अवसर हर जन को, यह था भीम विचार।
कर्म से ही ऊँचाई मापो, यही जग का सार॥

(23)
जात-पात को दूर कर, मानवता का नाम।
भीम ने भारत में किया, समता का प्रचाम॥

(24)
नारी को सम्मान दे, शिक्षा का वरदान।
संविधान ने खोलीं राहें, जग में पहचान॥

(25)
महासंघ का गीत यही, सेवा धर्म महान।
भीमविचार अमर रहे, जन जन के प्राण॥

(26)
न्याय-समानता के बिना, लोकतंत्र अधूरा।
भीमराव का स्वप्न था, हर मन हो पूरा॥

(27)
धन नहीं, ज्ञान ही असली, शक्ति बने समाज।
भीमपथ यह सिखलाए, तोड़े हर लाज॥

(28)
संविधान की शपथ लेकर, चलें सदा औदार्य।
मानवता के व्रत धरे, करें नव निर्माण कार्य॥

(29)
महासंघ का दीप जले, भीम विचार समेट।
हर दलित के स्वप्न में, न्याय का गीत बहे॥

(30)
जय संविधान! जय भीम! यही महासंघ नाद।
भारत भू पर गूंज उठे, मानवता प्रसाद॥

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।