राजेश कुमार सिद्धार्थ ने दलित नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल — कहा, “दलितों की वोट चाहिए लेकिन दलित उत्पीड़न पर मौन क्यों?”


राजेश कुमार सिद्धार्थ ने दलित नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल — कहा, “दलितों की वोट चाहिए लेकिन दलित उत्पीड़न पर मौन क्यों?”

सिधौली (सीतापुर)।
किसान कांग्रेस उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने 152 विधानसभा सिधौली में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए दलित राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आज देश में अनेक तथाकथित दलित नेता केवल चुनाव के समय दलित समाज से वोट मांगने आते हैं, लेकिन जब दलितों पर अत्याचार होता है, तब वे चुप रह जाते हैं।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में देश के चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने की घटना, रायबरेली में एक दलित युवक की हत्या और दलित अधिकारी के उत्पीड़न जैसे मामलों पर तथाकथित दलित नेताओं की चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है। उन्होंने पूछा, “जब संविधान और न्याय की रक्षा के लिए आवाज उठाने की जरूरत होती है, तब मायावती, मनीष रावत, चिराग पासवान, जितिन राम मांझी और अन्य दलित नेता आखिर चुप क्यों हैं?”

उन्होंने कहा कि दलित समाज को अब जागरूक होना होगा और यह समझना होगा कि केवल दलित नाम या चेहरा होने से कोई व्यक्ति समाज का सच्चा हितैषी नहीं बन जाता। “कब तक दलितों के नाम पर वोट लेकर ये नेता मनुवादियों की गोद में बैठे रहेंगे? कब तक दलित जनता इन नेताओं को अपना संरक्षक मानकर धोखा खाती रहेगी?” उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि अब समय आ गया है कि दलित समाज अपने सच्चे और ईमानदार प्रतिनिधियों को पहचाने — वे जो सिर्फ चुनाव के वक्त नहीं, बल्कि हर संकट की घड़ी में दलितों की आवाज बनें। उन्होंने 2027 के चुनावों की ओर इशारा करते हुए जनता से अपील की कि “अबकी बार ऐसे नेताओं को बेनकाब करें जो केवल वोट के सौदागर बन चुके हैं और दलित समाज के अधिकारों पर समझौता करते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के आदर्शों पर चलकर ही समाज की मुक्ति संभव है। “जो नेता इन महापुरुषों की विचारधारा को भूलकर व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति करते हैं, वे दलित समाज के दुश्मन हैं।”

अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा, “उठो, जागो और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करो। अब वक्त आ गया है कि दलित समाज अपने नाम पर राजनीति करने वालों से सावधान रहे और ऐसे नेतृत्व को चुने जो वास्तव में उसके साथ खड़ा हो।”

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