बिहार में SIR: चुनाव आयोग को मिली 2.41 लाख से ज्यादा दावे-आपत्तियां, कांग्रेस की एक भी नहीं
बिहार में SIR: चुनाव आयोग को मिली 2.41 लाख से ज्यादा दावे-आपत्तियां, कांग्रेस की एक भी नहीं
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच लगभग तीन लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जिनकी नागरिकता "संदिग्ध" होने का संदेह है. बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान के संदिग्ध मतदाताओं को चुनाव वाले राज्यों के विभिन्न जिलों में, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच लगभग तीन लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जिनकी नागरिकता "संदिग्ध" होने का संदेह है. बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान के संदिग्ध मतदाताओं को चुनाव वाले राज्यों के विभिन्न जिलों में, विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले जिलों में, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) द्वारा नोटिस जारी किए गए थे, क्योंकि उनके दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान उन्हें विसंगतियां मिली थीं.
इन "संदिग्ध" मतदाताओं के नाम एक अगस्त को बिहार में मतदाता सूची के मसौदे में प्रकाशित किए गए थे. ऐसा माना जा रहा है कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है, यदि वे भारतीय नागरिक होने का प्रमाण देने वाले दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं, तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा. अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 सितंबर को किया जाना है.
कार्रवाई शुरू करने पर भी विचार कर रहा आयोग
चुनाव आयोग ऐसे मतदाताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने पर भी विचार कर रहा है. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के सूत्रों ने शुक्रवार को ईटीवी भारत को बताया कि, "लगभग तीन लाख नोटिस ऐसे लोगों को भेजे गए हैं जिनकी नागरिकता संदिग्ध है. उनके नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल कर लिए गए हैं. वे बिहार की मतदाता सूची में प्रकाशित 7.24 प्रतिशत मतदाताओं में शामिल हैं."
उन्होंने कहा, "इनमें से कई मतदाताओं के बांग्लादेश और नेपाल से होने का संदेह है. कुछ के म्यांमार और अफगानिस्तान से होने की भी सूचना है." चुनाव आयोग के सूत्रों ने दावा किया कि विभिन्न जिलों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह बात सामने आई कि ऐसे मतदाताओं की नागरिकता संदिग्ध है. इसी आधार पर ईआरओ ने उन्हें नोटिस जारी किए हैं.
दस्तावेज सत्यापन में विसंगति पाई गई
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान ईआरओ द्वारा विसंगतियां पाई गईं. इसके बाद क्षेत्रीय जांच की गई और ईआरओ द्वारा नोटिस जारी किए गए. उन्होंने कहा, "पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सुपौल प्रमुख जिले हैं जहां से इन मामलों की पहचान की गई."
चुनाव आयोग के सूत्रों ने आगे कहा कि "ईआरओ द्वारा बुलाए गए ऐसे मतदाताओं से आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा गया है. यदि संबंधित ईआरओ को ये दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाते हैं, तो उनके नाम नहीं हटाए जाएंगे."
आवश्यक दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराने पर नाम हटाए जाएंगे
उन्होंने कहा, "जो मतदाता आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रहेंगे, उनके नाम मसौदा मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे. उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी." उन्होंने कहा, "इसके बाद चुनाव आयोग के अधिकारी जिला प्रशासन को रिपोर्ट देंगे कि ये मतदाता गैर-नागरिक पाए गए."
उल्लेखनीय है कि बिहार में एसआईआर के आरंभ में ही भारत निर्वाचन आयोग ने कहा था कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी अवैध प्रवासी अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में सफल न हो सके.
एसआईआर के आदेशों के अनुसार, संबंधित ईआरओ/एईआरओ द्वारा मतदाता को सुने बिना तथा उसके बाद लिखित आदेश पारित किए बिना, मसौदा मतदाता सूची से कोई भी नाम नहीं हटाया जा सकता है, जिसके विरुद्ध जिला मजिस्ट्रेट तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील की जा सकती है.
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