शहीद ए आज़म भगत सिंह को सादर कोटि कोटि नमन एवं आदरांजलि ।
शहीद ए आज़म भगत सिंह को सादर कोटि कोटि नमन एवं आदरांजलि ।
आखिर पराड़कर भवन पर ताला क्यों लगाया गया?* दिनांक 27 सितम्बर 2025, वाराणसी।
*इसे बिना पुर्वाग्रहित हुए पढ़ने और चिंतन की आवश्यकता है।*
*आखिर पराड़कर भवन पर ताला क्यों लगाया गया?*
दिनांक 27 सितम्बर 2025, वाराणसी।
वाराणसी कांग्रेस जिला और महानगर कमेटी और नागरिक समाज ने आज मतदाता अधिकार सम्मेलन का आयोजन वाराणसी टाउनहॉल स्थिति पराड़कर भवन के सभागार में अपराह्न 1:30 बजे से किया था। जिला प्रशासन ने पुलिस बल को लगाकर इस कार्यक्रम को वहां आयोजित करने से रोक दिया। सूत्रों की मानें तो प्रशासन द्वारा पराड़कर भवन के पदाधिकारियों को धमकाया भी था और धमकी कुछ इस तरह से थी कि यदि कार्यक्रम हुआ तो पराड़कर भवन पर बुल्डोजर चला दिया जायेगा। इस परिसर के आसपास और मार्केट एरिया में पुलिस का भारी जमावड़ा लगा रहा। कांग्रेस के पदाधिकारियों ने पराड़कर भवन पर कार्यक्रम आयोजित न होने देने के कारण रोष व्यक्त करते हुए, इस कार्यक्रम को जिला कांग्रेस कार्यालय पर शिफ्ट किया। इस कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति सुप्रिया श्रीनेत कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता की रही।
*आखिर तालाबंद क्यों किया गया?*
पराड़कर भवन काशी की बहुत सी स्मृतियों को संजोए हुए है। यहां पत्रकार वार्ता, और सभागार भी मौजूद है जिसमें समय समय पर प्रेस कांफ्रेंस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। पराड़कर भवन एक बौद्धिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। इस
कार्यक्रम (मतदाता अधिकार)का आयोजन न होने पाए और इसके लिए प्रशासन ने तालाबंद करवाया है। यह कृत्य स्पष्ट रूप से संविधान का अनुच्छेद 19 (क),और 19 (ख) का खुला उलंघन है । यह अनुच्छेद सभी नागरिकों को क्रमशः वाक्- स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति -स्वातंत्र्य का, तथा शांतिपूर्ण और निरायुध सम्मेलन का अधिकार प्रदान करता है। आखिर सरकार नागरिकों या नागरिक समाज को इस अधिकार से क्यों मरहूम कर रही है? सरकार को किस कारण भय हो रहा है? सरकार अपनी आलोचना क्यों नहीं सुनना नहीं चाहती?
कांग्रेस के समय हुए आपातकाल का 50 वां काला दिवस किसलिए मनाया गया? क्या यह प्रतियोगिता नहीं हो रही है कि कांग्रेस घोषणा करने के बाद आपातकाल लागू करती है और हम बिना घोषणा के ही आपातकाल से बुरी स्थिति पैदा कर सकते हैं। आप देख सकते हो और महसूस कर सकते हो तो महसूस कर लो। बुल्डोजर का भय दिखाना और बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के बुल्डोजर चलवा देना, यह सरकार की मानसिकता है। ट्रीपल इंजन की सरकार है। शक्ति का प्रयोग केवल कायर करते हैं। राज्य के नागरिकों या राजनीतिक दलों पर राज्य शक्ति का प्रयोग कमजोर राजा करता है । ऐसा राजा तानाशाह होता है और विरोधियों से वार्ता कर समस्या का हल निकालने की बजाय वह विरोधियों की आवाज को ही बंद कर देना चाहता है। यही तो है फासीवाद।
*आखिर कांग्रेस को मतदाता अधिकार सम्मेलन क्यों आयोजित करना पड़ रहा है?*
चुनाव के दौरान फार्म 17 सी यह एक अधिकृत दस्तावेज है जिसे मतदान के बाद तुरंत मतदान अधिकारी द्वारा बुत पर मतदान एजेंटों के उपस्थिति में भरा जाता है जो यह बताता है कि मतदान समाप्त होने के समय कितने वोट बैलेट बाक्स/ EVM में पड़े हैं। यह वोटों की संख्या बढ़ या घट कैसे जाती है? क्या यह वोट चोरी नहीं है?
ऐसा न हो पाए, यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त की है कि पारदर्शिता बनी रहे। मगर यहां तो ऐसे भ्रष्टाचार में चुनाव आयोग और उनका तंत्र ही सम्मिलित है। बहुत से उदाहरण मिलते हैं कि जिला प्रशासन पर सत्तारूढ़ दलों का पूरा दबाव बना रहता है कि उनके उम्मीदवार के पक्ष में ही परिणाम रहना चाहिए, और प्रशासन के लोग नामांकन से ही आका को प्रसन्न करने में लग जाते हैं। आखिर क्यों? ये अधिकारी लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए क्यों नहीं समर्पित हैं? इसका एक ही कारण है स्वार्थ और भ्रष्ट आचरण। हमाम में सब नंगे हैं क्या नेता और क्या अधिकारी, सब एक दूसरे को देखते हैं और एक दूसरे के स्वार्थ पूर्ति के साधन बने हुए हैं। नुकसान व्यक्ति का नहीं होता, नुकसान लोकतंत्र के मूल्यों का होता है।
आज यदि लोकतंत्र के रास्ते देश में फासीवाद सत्ता में है तो यह केवल स्वार्थी राजनेताओं और भ्रष्ट आचरण वाले प्रशासनिक अधिकारियों, न्यायाधीशों और न्यायमूर्तियों के कारण है।
मैं जनता को दोषी नहीं ठहराता आखिर उनके अंदर धर्म के नाम पर नफरत कौन भरता है, बंधुत्व भाव को बढ़ाने की जगह नफ़रत कैसे बढ़ती है। जनता को औपचारिक शिक्षा से बेदखल क्यों किया जा रहा है? निःशुल्क शिक्षा के बजाय शिक्षा को महंगा क्यों किया जा रहा है? शिक्षा का व्यापार क्यों फल-फूल रहा है? स्वास्थ्य सेवाओं को भी आम जनता की पहुंच से दूर क्यों किया जा रहा?
महंगाई चरम सीमा पर, विनिर्माण क्षेत्र में सीयापा छाया हुआ है, मजदूरी भी आम जनता को नहीं मिलती । देश का साधन- संसाधन कुछ परिवारों में संकेंद्रित हो चुका है। सरकारी, अर्धसरकारी क्षेत्रों के आर्थिक संस्थानों के हालात पतले हैं, घाटे में चल रहे हैं। सकल घरेलू उत्पाद में योगदान शुन्य के आस पास है।
कहने को तो 4 ट्रीलियन की अर्थव्यवस्था है लेकिन 80 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या 5 किलो अनाज पर निर्भर पड़ी हुई है। क्या यह सत्ता में बने रहने के लिए षडयंत्र चलाया जा रहा है? आपरेशन लोटस के जरिए सरकार गिराई और बनाई जा रही है? क्या यही है लोकतंत्रात्मक गणराज्य? क्या यही सपना देखा था संविधान निर्माताओं ने? क्या ऐसे ही राष्ट्र के लिए लोगों ने फांसी के फंदे को चुमा था?
फासीवाद और फासीवादी सरकार के पास धर्म और आस्था का हथियार सबसे मारक हथियार है। हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व का धर्म से कोई लेना देना नहीं है। यह सत्ता पर कब्जा पाने का एक टूल किट है। अभी जो जातिवाद है उसको सुदृढ़ बनाने का प्रयास हो रहा है। यह प्रक्रिया इतिहास में हो चुकी है और इसका परिणाम आज भी भुगता जा रहा है, यही फासीवाद जातिवाद को और मजबूत बनाने के लिए लगा हुआ है। जातिवाद से शासक वर्ग को लाभ होता है, हिंदू समाज व्यवस्था का अभिन्न अंग है जातियां, जातियां बनी रहें उनके बीच भेदभाव बना रहे इसलिए भी हिन्दू राष्ट्र और हिंदुत्व का ढोल पीटा जा रहा है और इसका टूल किट है हिंदू बनाम मुस्लिम। इसका तरोताजा उदाहरण पांच वर्षों से नेपथ्य में चले गये विनय कटियार ने बयान जारी किया कि मुसलमान अयोध्या छोड़ दें। इस बयान की जरूरत क्यों पड़ी? यह केवल कांग्रेस द्वारा उठाए गये मुद्दों (वोट चोरी, मंहगाई, बेरोजगारी, धार्मिक नफ़रत, धन का संकेंद्रीकरण आदि) को कमजोर करने के लिए इस टूल किट का प्रयोग किया गया है। किसी भी सरकार के टूल किट में ED, IT, CBI, और पुलिस प्रमुख टूल्स होते हैं और आवश्यक होने पर इसका प्रयोग किया जाता है। यह राजनीतिक हिंसा है। मगर फासीवाद जो कि सैद्धांतिक रूप से एक तानाशाही सरकार को पैदा करती है वह लोकतंत्र के स्तंभ न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया के साथ- साथ चुनाव आयोग, आडिट जनरल, सैन्य प्रमुख ( CDS), को भी अपनी गिरफ्त में ले लेती है। आज देश में यही हुआ है।
वास्तव में भाजपा और एन.डी.ए शासन वोटों में हेराफेरी करके केंद्र में बैठी है और वह वास्तविकता का सामना करने से डर रही है, इसलिए जरा सी भी आहट होने पर डर जाती है और लाठी का प्रयोग करने लगती है। यही तालाबंदी की वास्तविकता है।
डॉ. उमेश चन्द्र
प्रदेश अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश आदिवासी कांग्रेस
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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप
शहीद ए आज़म भगत सिंह को सादर कोटि कोटि नमन एवं आदरांजलि ।
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