बरेली: स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में हुए बदलाव ने निजी अस्पतालों के संचालकों और डॉक्टरों में खौफ पैदा कर दिया है।


बरेली: स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में हुए बदलाव ने निजी अस्पतालों के संचालकों और डॉक्टरों में खौफ पैदा कर दिया है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह ने डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद से 49 बेड तक के निजी अस्पतालों के पंजीकरण की जिम्मेदारी छीनकर एसीएमओ डॉ. अमित को सौंप दी है। इस बदलाव से जहां एक ओर डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद के चेहरे पर उदासी छाई है, वहीं दूसरी ओर मानकों के विपरीत संचालित निजी अस्पतालों में सख्त कार्रवाई का डर व्याप्त हो गया है।जानकारी के अनुसार, डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद के कार्यकाल में बरेली में कई निजी अस्पतालों का पंजीकरण नियमों को ताक पर रखकर किया गया। इनमें टीन की छत वाली इमारतों में अस्पताल, बेसमेंट में संचालित अस्पताल, और यहां तक कि 55 गज की रिहायशी इमारत में ट्रक ड्राइवर द्वारा संचालित अस्पताल जैसे मामले शामिल हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि दर्जनों निजी अस्पताल बिना मानक पूरे किए संचालित हो रहे हैं, और इनके पंजीकरण में डॉ. लईक अहमद की मेहरबानी रही है।अब एसीएमओ डॉ. अमित को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद निजी अस्पतालों के स्वामियों और डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. अमित के सख्त रवैये और नियमों के पालन पर जोर देने की वजह से कई अस्पतालों पर ताला लगने का खतरा मंडरा रहा है। अगर डॉ. अमित ने नियमों का चाबुक चलाया, तो कई अस्पतालों का पंजीकरण रद्द होने के साथ-साथ उन्हें सील भी किया जा सकता है।विभागीय सूत्रों ने बताया कि डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद इस बदलाव से खासे नाखुश हैं, क्योंकि जिले में 49 बेड तक के निजी अस्पतालों की संख्या काफी अधिक है, और इनमें से अधिकतर उनके कार्यकाल में ही पंजीकृत हुए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती से निजी अस्पतालों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, साथ ही जनहित में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

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Rajesh Kumar Siddharth

अब तक इंडिया लाइव न्यूज़ चैनल

राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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