राजेश कुमार सिद्धार्थ जी के बारे में उपलब्ध जानकारियों से यह साफ़ होता है कि वे सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। वे डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के अध्यक्ष के रूप में वंचित वर्गों, पिछड़ों और दलित समाज के मुद्दे उठाते हैं।
जहाँ तक किसानों का सवाल है –
वे किसानों के अधिकार, भूमि सुधार और फसल से जुड़े प्रश्नों को समय-समय पर उठाते हैं।
धरना-प्रदर्शन और जनसभाओं में भी उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता दी है।
लेकिन उन्हें "किसानप्रिय नेता" किस हद तक कहा जा सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्थानीय स्तर पर किसान उनके आंदोलनों और नेतृत्व को कितना समर्थन देते हैं।
???? कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि वे किसानों के मुद्दों पर आवाज़ उठाते हैं, पर उनकी प्रमुख पहचान किसान आंदोलनकारी से ज़्यादा संवैधानिक, सामाजिक और दलित-पिछड़ा नेतृत्व वाली अधिक क्षमता देखने को मिलती है
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