रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय महमूदाबाद सीतापुर


महमूदाबाद — कहते हैं, डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन जब यह रूप सेवा-भाव और इंसानियत से मिल जाता है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। महमूदाबाद के लोहिया अस्पताल में तैनात कुशल नेत्र चिकित्सक *डॉ. अखिलेश वर्मा* और उनकी धर्मपत्नी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

डॉ. वर्मा, जो अपनी चिकित्सा कुशलता के साथ-साथ समाजसेवा के लिए भी जाने जाते हैं, का क्लिनिक आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान है—गरीब मरीजों के लिए उनका *निःशुल्क उपचार* और *सेवा का जज़्बा*।

अभी कल की ही बात है—महमूदाबाद के पास के एक गांव से एक युवक, घर में नाराज़गी के चलते, गुस्से में निकल पड़ा। पीछे-पीछे परिवार उसे मनाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान बाजार से गुजरते हुए डॉ. अखिलेश वर्मा और उनकी पत्नी की नज़र उस युवक पर पड़ी। उन्होंने तुरंत गाड़ी रोकी, परिवार से बातचीत की और युवक को प्यार से समझाकर घर लौटने के लिए राज़ी कर लिया।

परिवार की स्थिति जानकर, जिसमें पांच छोटी-छोटी बहनें उस युवक पर निर्भर हैं, और रक्षाबंधन के मौके पर बहनों के आंसू देखकर, डॉ. वर्मा और उनकी पत्नी ने न केवल मिठाई दिलाई बल्कि रुपए भी देकर उसे बहनों के पास भेजा।

*"हर घर में कभी न कभी झगड़ा होता है, लेकिन जो उन्हें जोड़ने का काम करे, वही सच्चा इंसान है,"* यह बात डॉ. वर्मा ने अपने कर्मों से सिद्ध कर दी।

यह घटना तो बस एक उदाहरण है, वरना ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जो डॉ. अखिलेश वर्मा के सेवा-भाव की मिसाल पेश करती हैं। महमूदाबाद में लोग उन्हें न केवल एक बेहतरीन डॉक्टर बल्कि एक *सच्चे समाजसेवी* के रूप में जानते हैं, जो हर मुश्किल घड़ी में लोगों के साथ खड़े रहते हैं।

रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व पर उनकी इस पहल ने साबित कर दिया कि इंसानियत के धागे सबसे मजबूत होते हैं, और अगर समाज में ऐसे लोग हों, तो हर दिल में अपनापन और भाईचारा बना रहता है।

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