आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स की यूएई बिजनेस एंड स्ट्रेटेजी की प्रमुख तनवी कंचन ने कहा कि भारत में विदेशी निवेशकों की बिक्री के मुकाबले 24 मई तक घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) द्वारा 40,986 करोड़ का निवेश किया गया है।


आम चुनाव अंतिम चरण में पहुंच गया है। 4 जून को लोकसभा के रिजल्ट आएंगे। उसके पहले बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। बाजार में अस्थिरता की एक वजह विदेशी निवेशकों की ओर से की जा रही जमकर बिकवाली भी है। भारतीय बाजार से मई में अबतक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) करीब 2.89 अरब डॉलर (24,082 करोड़ रुपये) निकाल चुके हैं। यह एशिया में विदेशी निवेशकों द्वारा निकाली गई सबसे बड़ी राशि है। वहीं, जनवरी 2024 के बाद सबसे बड़ा एफआईआई आउटफ्लो है। अगर यह ट्रेंड आगे भी रहा तो बाजार में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। 

क्यों बाजार से पैसा निकाल रहे एफपीआई? 

आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स की यूएई बिजनेस एंड स्ट्रेटेजी की प्रमुख तनवी कंचन ने कहा कि भारत में विदेशी निवेशकों की बिक्री के मुकाबले 24 मई तक घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) द्वारा 40,986 करोड़ का निवेश किया गया है। बड़ी बिकवाली के बाद एफआईआई की ओर से भी पिछले हफ्ते 6,195 करोड़ की खरीदारी की गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा बड़ी बिकवाली की वजह हांगकांग के बाजारों में तेजी होना है। एफआईआई भारत के महंगे बाजार से पैसा निकालकर सस्ते हांगकांग के बाजार में निवेश कर रही है।

चुनाव परिणाम से पहले सर्तक रुख 

मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि विदेशी निवेशक आम चुनाव से पहले सर्तक रुख अपना रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हुई है। इसके चलते विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसका असर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अगर एक​ बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी तो अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। हालांकि, अभी कुछ दिन हालात ऐसे ही बने रहेंगे। इसलिए छोटे निवेशकों को बड़ी सावधानी से निवेश करने की जरूरत है। 

इन बाजारों में किया निवेश

भारत के अलावा एफआईआई की ओर से इंडोनेशिया में 700 मिलियन डॉलर, वियतनाम से 415 मिलियन डॉलर, थाईलैंड से 210 मिलियन डॉलर और फिलीपींस से 58 मिलियन डॉलर की राशि निकाली गई है। एफआईआई की ओर से जापान में 7.59 अरब डॉलर, ताइवान में 6.26 अरब डॉलर, दक्षिण कोरिया में 1.44 अरब डॉलर और मलेशिया में 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया गया है।

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