कार्यालय में आंतरिक परिवाद समिति का गठन अनिवार्य-जिलाधिकारी


कार्यालय में आंतरिक परिवाद समिति का गठन अनिवार्य-जिलाधिकारी

श्रावस्ती,  
 जिलाधिकारी कृतिका शर्मा ने बताया है कि किसी भी कार्यालय पर 10 कार्मिकों से ज्यादा कार्मिकों के कार्य करने पर वहां आंतरिक परिवाद समिति का गठन किया जाना अनिवार्य होगा, वह कमेटी कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न सम्बन्धी शिकायतों की जांच हेतु कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष द्वारा गठित की जायेगी। 
     इस आशय की विस्तृत जानकारी देते हुए जिला प्रोवेशन अधिकारी सुबोध कुमार सिंह ने बताया है कि जनपद स्तर के ऐेसे प्रत्येक शासकीय, अर्धशासकीय एवं अशासकीय (निजी) विभाग, संगठन, उपक्रम, स्थापन, उद्यम, संस्था, शाखा अथवा यूनिट में जहां कार्मिकों की संख्या 10 से अधिक हैं, ऐसे सभी कार्यालयों के नियोजकों द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न सम्बन्धी शिकायतों की जांच हेतु आन्तरिक परिवाद समिति का गठन किया जायेगा। यह समिति व्यथित महिला कार्यस्थल पर हुए लैंगिक उत्पीड़न से सम्बन्धित शिकायत उस कार्य स्थल हेतु गठित आन्तरिक परिवाद समिति में दर्ज करा सकती है। समिति का गठन उस कार्यस्थल पर वरिष्ठ स्तर पर नियोजित महिला की अध्यक्षता में होगा, जिसमें दो सदस्य कार्यालय में एवं एक सदस्य गैर सरकारी संगठन से नियोजक द्वारा नामित किये जायेंगे। समिति के कुल सदस्यों में से आधी सदस्य महिलायें होंगी।

     इसके अतिरिक्त ऐसे कार्यस्थल जंहा कार्मिकों की संख्या 10 से कम है, वहां की व्यथित महिला द्वारा इस प्रकार के लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत जनपद में जिलाधिकारी द्वारा गठित स्थानीय समिति में दर्ज करायी जा सकती है। यदि कोई नियोजक अपने कार्यास्थल में नियमानुसार आन्तरिक समिति का गठन न किये जाने पर सिद्ध दोष ठहराया जाता है, तो उस पर नियमानुसार दण्ड अधिरोपित किया जायेगा। उन्होने अपील किया है कि ऐसे सभी नियोजक अपने स्तर से समिति का गठन अवश्य करा लें।

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