केंद्र सरकार की ओर से रुपये का डिजिटल अवतार सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को लॉन्च किया जा चुका है। डिजिटल रुपये के फायदे आम जनता को सरकार की ओर से काफी सारे गिनाए गए हैं, जिसमें तेज लेनदेन और लेनदेन की लागत कम आना शामिल हैं। फिलहाल इसका पायलट बेसिस पर कुछ चुनिंदा शहरों में ट्रायल किया जा रहा है।
ऐसे में लोगों को मन में सवाल उठ रहा है कि आखिरी इसका अर्थव्यवस्था और बैंकों पर क्या असर हो रहा है?
CBDC का अर्थव्यवस्था पर असर?
डिजिटल करेंसीआने का भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव हो रहा है। आइए जानते हैं।
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यह आरबीआई की ओर से जारी किए जाने वाले कुल रुपयों की आपूर्ति का हिस्सा है, जिस कारण मांग और कीमत पर इसका असर होता है।
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रुपये में आने वाले उतार- चढ़ाव डिजिटल करेंसी के आने का प्रभाव होता है।
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इससे लेनदेन की लागत घट गई है और यह अधिक किफायती हो गया है।
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पेपर करेंसी को छपाने में होने वाला खर्च घट सकता है।
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CBDC के आने से लोगों का क्रिप्टोकरेंसी के रिप्लेसमेंट के तौर पर देखा जा रहा है।
बैंकों पर क्या हुआ असर?
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बैंकों को बड़े स्तर पर डिजिटल करेंसी आने से फायदा हो रहा है। भविष्य में बैंक सराकारी प्रतिभूतियों में नहीं बल्कि जमाकर्ताओं और लेनदारों से भी डिजिटल करेंसी में लेनदेन कर पाएंगे।
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इससे रुपये के ट्रांसपोर्टेशन और उसे वितरण करने की लागत में कमी आ रही है। इससे बैंक चलाने में आने वाला खर्च भविष्य में कम हो सकता है।
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डिजिटल करेंसी में लेनदेन करने से नकली नोट की समस्या नहीं रहती है।
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इससे बैंकिंग सर्विसेज को आसानी से देश के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
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इससे फंड का किफायती तरीके से उपयोग किया जा रहा है।
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CBDC की मदद से बैंकों के बीच होने वाले लेनदेन आधिक किफायती हो गया है।
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पेपर करेंसी से कितना अलग है डिजिटल रुपया
डिजिटल रुपये को आरबीआई की ओर से लॉन्च किया गया है। इसके पीछे केंद्र सरकार की पूरी गांरटी होती है। इसमें में भी 5, 10, 50, 100 और 500 रुपये के नोट डिजिटल फॉर्म में होते हैं। इनकी वैल्यू भी पेपर करेंसी जितनी ही होती है।
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