क्या 8 लाख रुपए की वार्षिक पैकेज की नौकरी छोड़ कर स्टेशन के बाहर छोले भटूरे की रेड़ी लगाना सही निर्णय होगा
साल में नौकरी से आपकी वार्षिक आय ₹800000 हैं अर्थात महीने की कमाई 66666.00 रुपए होती है। नौकरी से मिलने वाले रकम पर कुछ मासिक कटौती भी होती है। इसके अंतर्गत आपका PF,ESIC,NPS, प्रोफ़ेशनल टैक्स आदि आता है। मान लेता हूं आपकी भी ₹4000 मासिक कटौती इन चीजों में होती होगी। इन कटौतियों के बाद घर ले जाने वाली रकम 62666 रुपए होती होगी।
जहां तक बात रही स्टेशन के बाहर छोले भटूरे की रेढी लगाने की तो मै इसका समर्थन करता हूं। कोई भी काम छोटा नहीं होता है। यह मेरी व्यक्तिगत राय है। अगर आप अपने व्यवसाय को दीर्घकालिक रूप में संयोजित कर एक मुकाम पर ले जाना चाहते हैं तो यह निर्णय बिल्कुल बुरा नहीं है। शुरू में मैं मान सकता हूं थोड़ा कम मुनाफा देखने को मिलेगा किंतु एक बार सही दिशा में मेहनत कर लेंगे तो मुनाफे की चिंता बिल्कुल भी नहीं करनी पड़ेगी और आने वाला नया वंश भी इसको आगे ले जाएगा। शरू में नौकरी के साथ इसे शाम 4 बजे से 10 बजे तक चला सकते है। एक बार व्यवसाय पटरी पर आने के बाद नौकरी त्याग दे। देश में न जाने कितने ऐसे लोगों की कहानी सुनी होगी जिन्होंने एक छोटे से व्यवसाय को आज अन्तर्राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित कर दिया है। इनसे हमें जरूर सीखना चाहिए और अपने सपने को सही साबित करने के क्रम में पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
"एमबीए चायवाला" का नाम आपने जरूर सुना होगा। इनके संस्थापक प्रफुल बिल्लौरे है। जिनकी उम्र मात्र 26 साल है। इन्होंने ठेले से चाय बेचने की शुरुआत 2017 में की थी। आज इनके प्रतिष्ठान का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ से ऊपर का है। भारत के विभिन्न शहरों में 50 से अधिक आउटलेट ओपन कर चुके है और आगे आने वाले दिनों में 100 और आउटलेट खोलने की दिशा में कार्यरत है।
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