बेसिक शिक्षा में मस्साब करते नौनिहाल बच्चों के साथ खेल,शिक्षा का स्तर पूरी तरह नजर आ रहा कैमरें में फेल
बेसिक शिक्षा में मस्साब करते नौनिहाल बच्चों के साथ खेल,शिक्षा का स्तर पूरी तरह नजर आ रहा कैमरें में फेल
बेसिक शिक्षा में मस्साब करते नौनिहाल बच्चों के साथ खेल,शिक्षा का स्तर पूरी तरह नजर आ रहा कैमरें में फेल संवाददाता क्षत्रपाल मौर्य
बेसिक शिक्षा में मस्साब करते नौनिहाल बच्चों के साथ खेल,शिक्षा का स्तर पूरी तरह नजर आ रहा कैमरें में फेल
संवाददाता क्षत्रपाल मौर्य
भिटौरा ब्लाक के सैबसी गाँव के प्राथमिक विद्यालय में किया जा रहा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड प्राथमिक विद्यालयों मे गाँव के बच्चों की अच्छी शिक्षा और शहर में भी नगरीय विद्यालय गरीब बच्चों और सुदूर शिक्षा के लिए हमारी सरकार बच्चों के शिक्षा के लिए पानी की तरह पैसे तो बहा रही है लेकिन इसका असर दिखता नजर नही आ रहा है आलम यह है कि विद्यालयों में समय से कुछ समय पहले ही बच्चों को छुट्टी दे जाती है और अपनें शिक्षण कार्य कें नाम सें इतिश्री ले ली जाती है और बच्चो के शिक्षा के साथ मजाँक किया जा रहा है बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय के अधिकतर विद्यालयों का आलम यह है कि बच्चो की जिम्मेवारियो से कोई मतलब नही आम बात हो गयी है वही जब अचानक ही इस भिटौरा ब्लाक के सैबसी गाँव के पढाई के समय लगभग दोपहर 12 बजकर 30मिनट के बाद पत्रकारों की एक टीम रास्ते से गुजर रही थी तो अजब गजब नजारा देखने को मिला,स्कूल के भोजन बेला समाप्त होने के बाद भी बच्चे तलाब मे खेलते नजर आये और कुछ बच्चो से जब शिक्षा के मामले मे पूछा गया कि आज क्या पढाया गया है तो बताया कि अभी इस टाईम कुछ नही पढाया गया है।व टाईम पढाया जायेगा।और स्कूलों के अन्दर शौचालयों की सुविधा होने के बाद भी बच्चें शौचालय बाहर कैसे जाने को मजबूर है।यह तो स्कूल के जिम्मेदार प्रधानाध्यापक ही बता सकते है।12 बजकर 36मिनट पर स्कूल के बाउंड्री दीवार के बाहर से कैमरा की चमक पडी तो अन्दर भाग कर बच्चों ने मस्साब को बताया तो मस्साब और शिक्षामित्रों नें बच्चो को जल्दी जल्दी कमरे और बरामदे में नौनिहाल बच्चों को भेड और बकारियो की तरह घेरे बैठाया। और केवल एक मस्साब बैठे नजर आये। आखिर कक्षा एक से पाँच तक के बच्चों को कैसे शिक्षा देतें होगें और इसके बाद पत्रकारों की टीम ने प्रधानाचार्य के बारे मे जानकारी चाही तो बताया गया कि एक मिट्टी मे गये है।जो किसी अपने उच्चाधिकारियों को सूचित किये गायब रहे। जानकारी के मुताबिक खण्ड शिक्षा अधिकारी भिटौरा ने स्पाष्टी करण माँगने के जानकारी प्राप्त हुई है।इसके बाद उस विद्यालय पहुचकर बच्चो के विद्यालय के शिक्षा समय के पूरे मामले की जानकारी चाही तो वहाँ का नजारा कुछ अलग ही देखनें को मिला,जहाँ पर केवल मात्र एक शिक्षक मौर्या मिलें तो शिक्षक ने टालमटोल जवाब देते हुयें किनारा कर झूठ बोलना चालू कर दिया,जब उनसे जानकारी चाही गई कि स्कूल के समय बच्चें कैसे कैम्पस के बाहर शौचालय के लिए गये और खेल रहें है तो कोई जबाब नही दिये प्रधानाचार्य/मस्साब से जब जरिये मोबाइल से जानकारी चाही तो बताया कि अभी मै मिट्टी मे पहुचा हूँ और एक डेढ घण्टे लग जायेगे तो आप समझ सकते है पौने एक बजे के बाद एक डेढ घण्टे का मतलब है कि स्कूल बन्द होने का समय हो जायेगा।
दूसरा मामला इसी ब्लाक के अन्य स्कूलो मे देर से आना जल्दी जाना भी शिक्षकों का लगा है।यदि कोई क्रास चेकिंग मे कोई भी अधिकारी पहुचा तो जरिए मोबाइल तुरन्त बात लीक हो जाती है।भिटौरा ब्लाक ही नही जनपद के अधिकतर और यमुना जमुना तटवर्ती विद्यालयों का भी हाल बे हाल है ।समय समय पर अधिकारियों के दौरें होते रहतें है पर शिक्षा के हालात जस के तस बने हुयें है।
तीसरा मामला यह है कि अधिकांश मस्साब माध्यान भोजन भोजन अवकाश के समय पर बच्चों को भोजन मे ही समय निकाल देते है। इसके बाद बन रहे भोजन का स्वाद लेने के लिए स्कूल समय मे बच्चों को भोजन कराया जायेगा तों कही न कही तो बच्चों के स्कूल का समय मस्साब खराब तो कर ही रहें है।इनको बस स्कूल और एमडीएम और पेपर मे आनरोल सब चकाचक चाहिए।सूत्रों के हवाले से बेसिक शिक्षा विभाग मे जनपद के अधिकतर विद्यालय का एमडीएम मस्साब ही खा जातें है। जो सबसे हैरान भरा मामला है।होता ये है कि बच्चों के भोजन करने के बाद तुरन्त ऊपास्थित दर्ज करना चाहिए लेकिन यह ऊपास्थित स्कूल बन्द होने के थोडे समय पहलें ही इस कार्य को अन्जाम दिया जाता है।होता यह है कि जैसे 95 बच्चें स्कूल मे पढने के लिए दाखिला लिये/ दर्ज होतें है।और 45बच्चे पढने के लिए विद्यालय आते है और एमडीएम का भोजन करने के लिए स्कूल में उपास्थित रहतें है। तो यह 20से 30बच्चें अधिक चढाकर खेल करतें रहतें है। इसके पहले भी तेलियानी ब्लाक के इस खेल मे माहिर जीटी रोड के प्रयागराज के जानें वाले रास्तें मे एक मस्साब ने प्रधान के साथ मिलकर बडा खेल खेला था,जब मस्साबों का दिमाक एमडीएम के खेल मे लगा रहता है तो आखिर बच्चों को कैसी शिक्षा दे पातें होगें।यह एक बडा और शिक्षा के प्रति चिंन्तनीय विचारणीय प्रश्न शिक्षा विभाग और समाज के बीच में खडा हो रहा है।आखिर सवाल यहाँ उठता है कि ये शिक्षक बच्चों कों कैसी शिक्षा का पाठ पढातें होगें
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