???? एक़ माह बाद भी डीएम क़े फ़र्ज़ी हस्ताक्षर वाले पत्र क़ा रहस्य बरकरार..! ????आख़िर क्यों हाईप्रोफ़ाइल प्रकरण में बैकफ़ुट पर है प्रशासन…! 


???? एक़ माह बाद भी डीएम क़े फ़र्ज़ी हस्ताक्षर वाले पत्र क़ा रहस्य बरकरार..!
????आख़िर क्यों हाईप्रोफ़ाइल प्रकरण में बैकफ़ुट पर है प्रशासन…! 
                संवाददाता क्षत्रपाल मौर्य यूपी अब तक न्यूज़ चैनल की खास रिपोर्ट
✍️फ़तेहपुर। तत्कालीन ज़िला अधिकारी अपूर्वा दुबे क़े फ़र्ज़ी हस्ताक्षर वाले वायरल हुए पत्र काण्ड क़ो आज़ पूरे एक़ माह हो गये किन्तु इस हाईप्रोफ़ाइल प्रकरण क़ो लेकर प्रशासनिक ज़िम्मेदारों क़े बीच जिस तरह क़ा सन्नाटा पसरा है, उससे इसक़े रहस्य पर से पर्दा उठने क़ी सम्भावना काफ़ी कम हो चली है। सवाल बड़ा है कि जब डीएम क़े फ़र्ज़ी हस्ताक्षरित पत्र क़ा मसला दब जायेगा तो बुलडोज़र बाबा क़े राज़ में क़्या कुछ अंधेरगर्दी नहीं हो सकती…!
   उल्लेखनीय है कि विगत 30 जुलाई क़ो तत्कालीन डीएम अपूर्वा दुबे द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र क़ा जिन्न ठीक उस समय बाहर आया था जब उनक़ा शासन से स्थानांतरण आदेश ज़ारी हो चुका था और पत्र क़े वायरल दिवस क़ो उन्हें जनपद क़ा चार्ज छोड़ना था। इस पत्र में 29 जुलाई की तारीख़ में उनके हस्ताक्षर थे…!
   इस पत्र ने कुछ समय क़े लिये आम जनमानस, मीडिया और प्रशासनिक तपके क़ो न सिर्फ़ सकते में डाल दिया था, बल्कि हड़कम्प मच गया था। क्योंकि पत्र में स्पष्ट आदेश क़ा सीधे-सीधे ताल्लुक़ जनपद क़े प्रथम नागरिक (ज़िला पंचायत अध्यक्ष)/वरिष्ठ भाजपा नेता से सम्बंधित था, इसलिये हड़कम्प मचना लाज़िमी भी था। आनन-फ़ानन में प्रशासन ने बाक़ायदे वक्तव्य ज़ारी करकें इस पत्र क़ो फ़र्ज़ी क़रार दे दिया और अग़ले दिन ज़िले क़ी बागडोर सम्भालने वाली नवागत डीएम श्रुति ने इस पत्र से जुड़े सम्पूर्ण प्रकरण क़ी जाँच कराने और बाक़ायदे जाँच टीम गठित क़रने क़ी बात तक कही। इस हाईप्रोफ़ाइल प्रकरण क़े आज़ पूरे एक़ माह हो चुके है और रहस्य गहराता जा रहा है। न जाँच टीम क़ा कही अता-पता है और न मामले से जुड़े राज पर से ही पर्दा उठ सका है, जबकि इस पत्र क़ो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म पर वायरल क़रने वालों में सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ हाईप्रोफ़ाइल लोग भी शामिल थे…! इतना ही नहीं इस फ़र्ज़ी पत्र क़ा ताल्लुक़ कहीं न कहीं ज़िम्मेदारों क़ी सीट क़े इर्द-गिर्द रहने वालो से भी जुड़े होने क़ी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है…!
  सवाल यह उठता है कि जब डीएम क़े फ़र्ज़ी हस्ताक्षरित पत्र क़ो लेकर ज़िम्मेदार इतने संवेदनहीन हैं, तो आम व्यक्ति से जुड़े मसलों क़ा हश्र क़्या होता होगा…! बुलडोज़र बाबा क़े राज़ में गम्भीर प्रकरणों क़े बाबत भी जिस तरह से हीला-हवाली का दौर ज़ारी है, उससे ऐसे मामलों क़ी निकट-भविष्य में पुनरवृत्ति क़ी सम्भावनाएँ बलवती हैं…! सवाल यह भी बड़ा है कि क़्या तत्कालीन डीएम अपूर्वा दुबे क़े तथाकथित फ़र्ज़ी हस्ताक्षर वाले हाईप्रोफ़ाईल पत्र क़ा रहस्य, रहस्य ही रह जायेगा या फ़िर व्यवस्था पालक बुलडोज़र बाबा क़े राज़ क़ी मौजूदगी क़ा अहसास करा पायेंगे…!
   इस मामले में कुछ एक़ अधिकारियों क़ा कहना है कि प्रकरण में पेंच गहरे होने से जाँच पर पर्दा पड़ा हुआ है। अगर जाँच रिपोर्ट बाहर आ जाए तो कइयों पर बड़ी कार्यवाही हो सकती है…!

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