महाराणा प्रताप के वंशजों को फुटपाथ से हटाना होगा अपना डेरा, नगर पंचायत


✍️मोहम्मद रईस रहमानी फतेहपुर
महाराणा प्रताप के वंशजों को फुटपाथ से हटाना होगा अपना डेरा, नगर पंचायत

- जगह के नाम पर लालीपॉप देकर नगर पंचायत ‌‌अधिशाषी अधिकारी जबरन कर रहे कार्रवाई

- लोहार पिटवा अब कैसे करेंगे जीवन यापन अधिशाषी अधिकारी के सामने मुख्यमंत्री का आदेश बौना

फतेहपुर *खागाः खागा में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत फुटपाथ पर कब्जा किये हुुुए लोगों को हटाने की साज़िश जोरों से चल रही है। वही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि गरीबों की झुग्गी झोपड़ी हटाने से पहले उनके रहने के लिए उचित व्यवस्था की जाए, लेकिन यहां तो सब उल्टा ही चल रहा है। जगह देने के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। लोहर पिटवा समुदाय के लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है। अतिक्रमण अभियान के तहत फुटपाथ पर चाट, फल , जूस, जैसी आदि खाद्य सामग्री बेचने वालांे का अक्सर जमावड़ा रहता था। जिसको हटाने का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में फुटपाथ पर तीस वर्षों से ज्यादा समय से महाराण प्रताप के वंशज कहे जाने वाले लोहगड़वा भी अपना जीवन यापन कर रहे हैं अगर इस अभियान में इन्हे हटाया गया तो ये कहां जाकर अपना जीवन यापन करेंगे। नगर पंचायत को चाहिए कि पहले इनके रहने का सही प्रबंध करें। महाराणा प्रताप के वंशज कहे जाने वालों को नगर पंचायत पुल के नीचे जगह दे रहा है जहां पर सब्जी के व्यापारी अपनी सब्जियों की दुकान सजाते हैं ऐसे में कहा जाए कि नगर पंचायत जगह के नाम पर लालीपॉप देकर हटाना चाहता है। खेती के काम आने वाली देसी चीजों जैसे खुरपी, खुरपा, हंसिया फावड़ा बनाने वाले लोहार जाति के ज्यादातर लोग घुमंतू जीवन जीते हैं। खुले मैदान में रहना और रोजी-रोटी के लिए इधर-उधर घूमना इनके जीवन का हिस्सा माना जाता है। इनमें अपने पुरखों का दिया हाथों का हुनर तो है। लेकिन इनमें से अधिकांश को पढ़ना-लिखना नही आता। अक्सर देखा जाता है कि फुटपाथ के किनारे रंग-बिरंगे तिरपालों के दर्जनों झोपड़े बने हुए हैं। यहां रहने वाली ज्यादातर महिलाओं अैर लड़कियां रंग बिरंगे कपड़े पहनती हैं। इनके तंबू से गर्म लोहे पर चलाए जा रहे हथौड़े की आवाजें अक्सर सुनाई देती हैं। जिससे वो लोग अपना जीवन-यापन करते हैं। लोहगड़वा समुदाय की यह एक अस्थाई बस्ती है। ये लोग इतने हुनरमंद होते हैं कि कैसे भी लोहे को कोयले की आंच में तपाकर किसी भी तरह के और कैसे भी लोहे को आकार दे देते हैं।

लोहार पिट्टा जाति का इतिहास

लोहार पिट्टा जाति के लोगों का इतिहास पुराना है। इनकी जड़े राजस्थान के मेवाड़ से जुड़ी हैं। इन समाज के लोगों का पुराना काम तलवार, कटारी, ढाल आदि बनाना था। राजवंश काल में मेवाड के राजा महाराणा प्रताप की प्रजा में इन्हें यही काम मिला था। अकबर से हल्दी घाटी युद्ध के दौरान इन्होने बैल गाडियों में अपना परिवार व गृहस्थी लेकर चले गए थे। महाराणा प्रताप को वीरगति मिलने के बाद ये लोग उत्तर भारत की ओर चले तब से उन्होने खेती किसानी के उपयोग में आने वाली वस्तुएं बनानी शुरू कर दीं। जो आज भी ये लोग कर रहे हैं।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

मामले में एसडीएम अजय नारायण सिंह का कहना था कि फुटपाथ पर रह रहे लोहार पिटवा समाज के लोगों को पुल के नीचे जगह दी जा रही है वहीं पर रह कर यह लोग अपना जीवन यापन करेंगे।

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