भाजपा का मिशन 2024 और राष्ट्रपति चुनाव : भाजपा ने साधा एक तीर से कई निशान


भाजपा का मिशन 2024 और राष्ट्रपति चुनाव : भाजपा ने साधा एक तीर से कई निशान

देश को पहली बार मिल सकता है आदिवासी राष्ट्रपति, विपक्षी खेमे में मची खलबली

भाजपा का मिशन 2024 और राष्ट्रपति चुनाव : भाजपा ने साधा एक तीर से कई निशान

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रांची: भाजपा ने झारखंड की राज्यपाल रहीं द्रौपद्री मुर्मू को एनडीए का प्रत्याशी बनाकर एक तीर से कई निशान साधने का प्रयास किया है. इसके पीछे मिशन 2024 भी शामिल है. आदिवासी महिला को प्रत्याशी बनाकर आदिवासियों की राजनीतिक करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी भाजपा ने दबाव बढ़ा दिया है. वैसे तो संख्या बल के आधार पर द्रौपदी मुर्मू का देश के ऊंचे सिंहासन पर पहुंचना तय है. मगर अब विपक्ष भी हैरत में पड़ गया है. उड़ीसा निवासी होने के कारण बीजेडी ने अब एनडीए प्रत्याशी का समर्थन देने का मन बना लिया है. कई और राजनीतिक दल भी अब पाला बदल सकते हैं.

 

एक तीर से कई निशान साधने की मंशा

दरअसल इसके पीछे भाजपा का हिडेन एजेंडा है. जिसमें एक तीर से कई निशान साधने की है. अगर राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार किसी आदिवासी को बनाया जाता  है तो विपक्षी दल भी सकते में आ जाएंगे, उनके पास समर्थन करने और सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुने के जाने के अलावे और ज्यादा विकल्प नहीं बचेगा. दूसरा इसके पीछे 2024 में आदिवासी वोट बैंक को साधने पर रहेगी.

 

झारखंड सहित कई आदिवासी बहुल राज्य में डैमेज कंट्रोल की रणनीति

जानकारी के अनुसार लोकसभा की 553 सीटों में 47 एसटी आरक्षित सीट है. जिसमें 62 लोकसभा सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है. इसके पीछे कई राज्य जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और झारखंड में आदिवासी वोट बैंक पर है. झारखंड में रघुवर शासन के दौरान विधानसभा की 28 आदिवासी आरक्षित सीट में भाजपा 26 हार गयी थी. इससे झारखंड भी डैमेज कंट्रोल हो सकता है. बतातें चलें कि इसी साल गुजरात और अगले साल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनाव के पूर्व इन राज्यों का चुनाव भाजपा के लिए अहम है.

 

पार्षद से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का सफर

ओडिशा में सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक से लेकर भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार नामित होने तक का सफर आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू के लिए बेहद लंबा और मुश्किल सफर रहा है. निर्वाचित होने पर मुर्मू आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति होंगी. झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू आगामी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार होंगी. भाजपा की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था, संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की.

 

1997 में पार्षद के रूप में अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की

संथाल समुदाय में जन्मीं मुर्मू ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में एक पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और वह वर्ष 2000 में ओडिशा सरकार में मंत्री बनीं. 2015 में झारखंड के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी भी संभाली. रायरंगपुर से दो बार विधायक रहीं मुर्मू ने 2009 में तब भी अपनी विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया था, जब बीजद ने राज्य के चुनावों से कुछ हफ्ते पहले भाजपा से नाता तोड़ लिया था, जिसमें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजद ने जीत दर्ज की थी. 20 जून 1958 को जन्मीं मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव भी रखती हैं.

 

बेहद पिछड़े परिवार से उठी हैं द्रौपदी

बेहद पिछड़े और दूरदराज के जिले से ताल्लुक रखने वालीं मुर्मू ने गरीबी और अन्य समस्याओं से जुझते हुए भुवनेश्वर के रमादेवी महिला कॉलेज से कला में स्नातक किया और ओडिशा सरकार के सिंचाई और बिजली विभाग में एक कनिष्ठ सहायक के रूप में अपना करियर शुरू किया था. मुर्मू को 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा वर्ष के सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके पास ओडिशा सरकार में परिवहन, वाणिज्य, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे मंत्रालयों को संभालने का अनुभव है.

 

त्रासदियों से भरा रहा है द्रौपदी का जीवन

मुर्मू भाजपा की ओडिशा इकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष भी रहीं. उन्हें 2013 में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एसटी मोर्चा) के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था. मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ और दंपती के तीन संतान, दो बेटे और एक बेटी हुईं. मुर्मू का जीवन व्यक्तिगत त्रासदियों से भरा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने पति और दोनो बेटों को खो दिया है. उनकी बेटी इतिश्री का विवाह गणेश हेम्ब्रम से हुआ है.

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Rajesh Kumar Siddharth

अब तक इंडिया लाइव न्यूज़ चैनल

राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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