बस्ती जिले के बृहस्पति कुमार पाण्डेय ने महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को देहदान करने का संकल्प
बस्ती जिले के बृहस्पति कुमार पाण्डेय ने महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को देहदान करने का संकल्प
छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में सैकड़ों पेड़ों को गर्डलिंग से नुकसान पहुंचा है. अब इन पेड़ों की सर्जरी और ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से जान बचाने का प्रयास किया जाएगा.
छत्तीसगढ़ में उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व (USTR) के अंदर स्थित करका गांव में अतिक्रमणकारियों ने 500 से ज़्यादा पेड़ों को ‘गर्डलिंग’ (पेड़ के तने के
चारों ओर से छाल हटाना) के ज़रिए नुकसान पहुंचाया है. इससे पेड़ों तक पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते और धीरे-धीरे ये सूखकर मर सकते हैं. ऐसे में इन पेड़ों को बचाने के लिए सर्जरी की जाएगी.
रिपोर्ट के मुताबिक वन विभाग पेड़ों को बचाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ले रहा है, जिसमें ‘सर्जरी’ या ‘ब्रिज-ग्राफ्टिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. दरअसल ‘गर्डलिंग’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेड़ के तने के चारों ओर से छाल का कुछ हिस्सा हटा दिया जाता है, जिससे पेड़ तक पोषक तत्वों की आपूर्ति रुक जाती है और अंततः पेड़ सूखकर मर जाता है.
करीब 500 पेड़ों को पहुंचा नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के धमतरी और गरियाबंद ज़िलों में फैले इस रिज़र्व में लगभग 2,500 पेड़, जिनमें मुख्य रूप से साल, बीजा और तेंदू के पेड़ शामिल हैं ‘गर्डलिंग’ की स्थिति में पाए गए. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से कम से कम 500 पेड़ों को हाल ही में इस तरह नुकसान पहुंचाया गया है, इसलिए उन्हें बचाए जाने की संभावना ज़्यादा है.
वन विभाग ने 22 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच एक निरीक्षण किया, जिसमें पेड़ों की इस स्थिति का पता चला. इस निरीक्षण में DGPS-युक्त ड्रोन सर्वे और ISRO की 2010 एवं 2016 की सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया गया. इन तस्वीरों में यहां घने जंगल दिखाई दिए थे, जिससे विभाग इस नतीजे पर पहुंचा कि पिछले एक दशक में हज़ारों पेड़ों को साफ़ कर दिया गया होगा. ये निष्कर्ष बताते हैं कि जंगलों को कितना नुकसान पहुंचा है.
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि जंगलों को बहाल करने और उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की तत्काल कितनी जरूरत है. इसके अलावा, करका (Karka) के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है.पिछले कुछ सालों में कई पेड़ों को नुकसान पहुंचा है, और हाल ही में 500 से अधिक पेड़ों की छाल को चारों तरफ से काट दिया गया है (girdling). इससे यह चिंता पैदा होती है कि अतिक्रमण को और बढ़ाने के लिए जानबूझकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
USTR के उप निदेशक वरुण जैन ने कहा ‘उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व (USTR) के जंगलों की सुरक्षा करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जैव विविधता (biodiversity) के लिए अहम हैं और यहीं से महानदी नदी का उद्गम क्षेत्र भी शुरू होता है’,
नुकसान झेल रहे पेड़ों, खासकर हाल ही में छाल काटे गए पेड़ों को बचाने के लिए एक विशेष संरक्षण पहल शुरू की जा रही है. इसके तहत, ‘प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन’ के माध्यम से संरक्षण का काम करने वाले और ‘ट्री डॉक्टर’ के नाम से मशहूर विजय निशांत जल्द ही टाइगर रिज़र्व का दौरा करेंगे. वो प्रभावित पेड़ों के ‘सर्जिकल’ इलाज और उन्हें फिर से ठीक करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे.
वरुण जैन ने बताया ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ (bridge grafting) तकनीक में पेड़ के छाल कटे हिस्से पर एक स्वस्थ टहनी को ग्राफ्ट किया जाता है, ताकि क्षतिग्रस्त ऊतकों (tissues) को फिर से जोड़ा जा सके. अभी हम पेड़ के घाव पर गोबर और मिट्टी का मिश्रण लगाते हैं और उसे बोरी से लपेट देते हैं. यह प्रक्रिया मानसून से पहले ज्यादा असरदार होती है, क्योंकि उस समय ऊतकों का विकास तेजी से होता है. हालांकि, हमारी सफलता की दर कम रही है, क्योंकि हमें इस तकनीक पर शोध करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. इसलिए, ज्यादा से ज्यादा पेड़ों को बचाने की कोशिश में हम विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं’.
USTR ने 2022 में टुरेंगा रेंज में, छाल छिल जाने के कारण क्षतिग्रस्त हुए पेड़ों पर ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ (bridge grafting) का काम किया था. हालांकि, इस प्रयास की सफलता दर लगभग 10% ही रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसके लिए विशेष विशेषज्ञता और उपचार की बेहतर तकनीकों की आवश्यकता है.
विजय निशांत के प्रस्तावित दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रभावित पेड़ों का आकलन करना, उन पेड़ों की पहचान करना जिन्हें बचाया जा सकता है, और उनके लिए उचित ‘सर्जिकल’ उपचार (जैसे ब्रिज ग्राफ्टिंग और पेड़ों को पुनर्जीवित करने की अन्य उपयुक्त तकनीकें) सुझाना होगा.
इस पहल से USTR के कर्मचारियों को उपचार की विशेष प्रक्रियाएं सीखने और पेड़ों की आगे की देखभाल एवं निगरानी के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने का अवसर भी मिलेगा. इसके अलावा, USTR इस रिज़र्व और उसके आस-पास रहने वाले आदिवासी समुदायों एवं वनवासियों से भी परामर्श कर रहा है, ताकि पेड़ों की देखभाल और उन्हें ठीक करने से जुड़ी उनकी पारंपरिक पारिस्थितिक जानकारी और स्थानीय तौर-तरीकों का लाभ उठाया जा सके.करीब 500 पेड़ों को पहुंचा नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के धमतरी और गरियाबंद ज़िलों में फैले इस रिज़र्व में लगभग 2,500 पेड़, जिनमें मुख्य रूप से साल, बीजा और तेंदू के पेड़ शामिल हैं ‘गर्डलिंग’ की स्थिति में पाए गए. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से कम से कम 500 पेड़ों को हाल ही में इस तरह नुकसान पहुंचाया गया है, इसलिए उन्हें बचाए जाने की संभावना ज़्यादा है.
वन विभाग ने 22 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच एक निरीक्षण किया, जिसमें पेड़ों की इस स्थिति का पता चला. इस निरीक्षण में DGPS-युक्त ड्रोन सर्वे और ISRO की 2010 एवं 2016 की सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया गया. इन तस्वीरों में यहां घने जंगल दिखाई दिए थे, जिससे विभाग इस नतीजे पर पहुंचा कि पिछले एक दशक में हज़ारों पेड़ों को साफ़ कर दिया गया होगा. ये निष्कर्ष बताते हैं कि जंगलों को कितना नुकसान पहुंचा है.
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि जंगलों को बहाल करने और उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की तत्काल कितनी जरूरत है. इसके अलावा, करका (Karka) के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है.पिछले कुछ सालों में कई पेड़ों को नुकसान पहुंचा है, और हाल ही में 500 से अधिक पेड़ों की छाल को चारों तरफ से काट दिया गया है (girdling). इससे यह चिंता पैदा होती है कि अतिक्रमण को और बढ़ाने के लिए जानबूझकर पेड़ों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है.
USTR के उप निदेशक वरुण जैन ने कहा ‘उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व (USTR) के जंगलों की सुरक्षा करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जैव विविधता (biodiversity) के लिए अहम हैं और यहीं से महानदी नदी का उद्गम क्षेत्र भी शुरू होता है’,
नुकसान झेल रहे पेड़ों, खासकर हाल ही में छाल काटे गए पेड़ों को बचाने के लिए एक विशेष संरक्षण पहल शुरू की जा रही है. इसके तहत, ‘प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन’ के माध्यम से संरक्षण का काम करने वाले और ‘ट्री डॉक्टर’ के नाम से मशहूर विजय निशांत जल्द ही टाइगर रिज़र्व का दौरा करेंगे. वो प्रभावित पेड़ों के ‘सर्जिकल’ इलाज और उन्हें फिर से ठीक करने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे.
वरुण जैन ने बताया ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ (bridge grafting) तकनीक में पेड़ के छाल कटे हिस्से पर एक स्वस्थ टहनी को ग्राफ्ट किया जाता है, ताकि क्षतिग्रस्त ऊतकों (tissues) को फिर से जोड़ा जा सके. अभी हम पेड़ के घाव पर गोबर और मिट्टी का मिश्रण लगाते हैं और उसे बोरी से लपेट देते हैं. यह प्रक्रिया मानसून से पहले ज्यादा असरदार होती है, क्योंकि उस समय ऊतकों का विकास तेजी से होता है. हालांकि, हमारी सफलता की दर कम रही है, क्योंकि हमें इस तकनीक पर शोध करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. इसलिए, ज्यादा से ज्यादा पेड़ों को बचाने की कोशिश में हम विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं’.
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