विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने बताया कि संस्था ऊर्जा और कीमतों में उछाल से प्रभावित देशों को सहायता देने के लिए लगभग 30 से 40 देशों के साथ बातचीत कर रही है। रॉयटर्स की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व के संघर्ष से ऊर्जा और उर्वरक की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
विश्व बैंक ने इस वर्ष संकट सहायता के लिए 25 अरब डॉलर का कोष उपलब्ध कराया था। शुरुआती दौर में इस कोष की मांग अपेक्षा से कम रही, लेकिन अब डीजल और उर्वरक महंगे होने तथा संभावित गंभीर जलवायु परिस्थितियों के कारण विकासशील देशों की चिंता बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, जरूरत पड़ने पर सहायता की उपलब्धता को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है। कई देश तत्काल नया कर्ज लेने के बजाय पहले से चल रही परियोजनाओं के धन का पुनर्विनियोजन करना चाहते हैं।
विकासशील देशों के लिए महत्व: सहायता का उद्देश्य आर्थिक झटकों का सामना करना, जरूरी सेवाओं को बनाए रखना और कमजोर परिवारों पर बढ़ते खर्च का असर कम करना है।
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