उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला है. दोनों नेताओं ने कहा कि PM और गृह मंत्री के खिलाफ मुकदमा हो सकता है, लेकिन CEC के खिलाफ नहीं.


  • महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त रूप से एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व किया. इस दौरान ठाकरे भाइयों ने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया है.
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  • उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अपने-अपने भाषणों में वोटर लिस्ट में बदलाव, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. दोनों नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ मुकदमा हो सकता है, लेकिन CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं. कौन है ये ज्ञानेश कुमार? इस दौरान ठाकरे भाइयों ने SIR को रोकने और बैलेट पेपर से वोटिंग की व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग की।
  • शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह लड़ाई किसी खास व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की कई संस्थाओं को सत्ताधारी पार्टी के अधीन कर दिया गया है और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए.
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  • केंद्र के इशारे पर काम कर रहे ज्ञानेश
  • मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहले चयन समिति में विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे, लेकिन बाद में इस व्यवस्था को बदल दिया गया. उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि वे केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं.
  • उद्धव ठाकरे ने जोर देकर कहा कि जनता तानाशाही की ओर बढ़ने वाले कदम को स्वीकार नहीं करेगी और लोकतंत्र में वोटरों के अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता. वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने बंगाल और तमिलनाडु की स्थितियों का हवाला दिया. उद्धव ने कहा कि देश भर में लगभग 13 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं और इन आंकड़ों को देखते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
  • वोट चोरों के खिलाफ भारत
  • उद्धव ठाकरे ने कहा कि जहां कांग्रेस के शासनकाल में बीजेपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत का नारा दिया था, वहीं अब वोट चोरों के खिलाफ भारत का मुद्दा सामने आया है. उन्होंने बीजेपी पर चुनावों के दौरान वोट चुराने का आरोप लगाया. किसानों की बदहाली का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले का उदाहरण दिया और फसल खराब होने के कारण एक किसान परिवार के सामने आए गंभीर संकट का जिक्र किया. उन्होंने सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया.
  • सत्ता में बैठे लोग सवालों का जवाब दें
  • उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हैं, पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए.
  • चुनाव आयोग तय कर रहा हार-जीत
  • महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग यह तय कर रहा है कि कौन जीतेगा और कौन हारेगा. राज ठाकरे ने बताया कि वह 2017 से ही चुनाव के बहिष्कार की वकालत कर रहे थे, लेकिन उस समय उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया. उनके अनुसार, अब लोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को समझने लगे हैं.
  • ECI को लेकर जनता के मन में सवाल
  • राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में कथित बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान मतदाताओं की संख्या में लगभग एक करोड़ की बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने सवाल किया कि मतदाताओं की संख्या में इतनी तेज़ी से बढ़ोतरी के पीछे कौन सी प्रक्रिया या तंत्र काम कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता में कौन आएगा, यह चुनाव आयोग को नहीं बल्कि जनता को तय करना चाहिए. राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लोगों के मन में गंभीर सवाल उठे हैं.
  • SIR पर सवाल, बैलेट पेपर से वोटिंग की मांग
  • राज ठाकरे ने स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए. पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व मंत्री आरके सिंह के एक कथित बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कानून या संविधान में पूरे देश में एक साथ SIR आयोजित करने का कोई प्रावधान नहीं है. राज ठाकरे ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से लगभग दो करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. उन्होंने सवाल किया कि ये लोग कौन थे और किन आधारों पर उनके नाम हटाए गए. उन्होंने SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने और बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके चुनाव कराने की मांग की

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