POCSO अधिनियम 2012 के प्रति विद्यार्थियों को किया जागरूक
रिपोर्ट हरिपाल सिंह रिपोर्टर ।
मथुरा :- रिफाइनरी / जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय, मथुरा द्वारा आज दिनांक 29 सितंबर 2026 को दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रिफाइनरी में विद्यार्थियों को ‘POCSO अधिनियम, 2012’ के प्रावधानों एवं उसके विधिक परिणामों के संबंध में जागरूक करने हेतु एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विकास कुमार जी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनुराग शर्मा जी, श्रीमती अनीता सिंह, सिविल जज एवं वरिष्ठ सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) तथा श्री राधवेंद्र सिंह जी, DIOS मथुरा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सलेन्दर सिंह ग्रेवाल जी ने मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं पटका पहनाकर हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विकास कुमार जी ने विद्यार्थियों को POCSO Act, 2012 के बारे में जागरूक करते हुए बताया कि यह अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करता है। उन्होंने बच्चों को ‘Good Touch’ और ‘Bad Touch’ के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि किसी भी असहज या अनुचित स्पर्श की स्थिति में बच्चे को चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को अपनी व्यक्तिगत सीमाओं एवं शरीर की निजता के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनुराग शर्मा जी ने विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार, यौन उत्पीड़न या शोषण गंभीर कानूनी अपराध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुचित संदेश, फोटो/वीडियो साझा करने, ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले शोषण तथा सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने के लिए भी सचेत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में कड़े प्रावधान हैं तथा पीड़ित बच्चे की पहचान एवं गरिमा की रक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि किसी घटना की जानकारी होने पर उसे छिपाने के बजाय विश्वसनीय वयस्क अथवा सक्षम प्राधिकारी को सूचित करना आवश्यक है। बच्चों को अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों की गरिमा, सहमति और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया गया।
इसी विषय पर विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से बाल सुरक्षा, संरक्षण, जागरूकता एवं सुरक्षित स्पर्श का प्रभावी संदेश प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल POCSO Act के कानूनी प्रावधानों से परिचित कराया, बल्कि उन्हें सतर्क, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सजग नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।
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