मिहींपुरवा में अस्पतालों का ‘खेल’! सीलिंग के बाद भी खुल रहे दरवाजे, प्रसव के बाद महिला की मौत से स्वास्थ्य विभाग कठघरे में राजेंद्र प्रसाद मंडल ब्यूरो देवीपाटन (करीब 70 अस्पतालों के संचालन का दावा, महज छह के पंजीकृत होने की चर्चा; नोडल अधिकारी डॉ. थानेदार और सीएमओ डॉ. संजय कुमार सिंह से


मिहींपुरवा में अस्पतालों का ‘खेल’! सीलिंग के बाद भी खुल रहे दरवाजे, प्रसव के बाद महिला की मौत से स्वास्थ्य विभाग कठघरे में

राजेंद्र प्रसाद मंडल ब्यूरो देवीपाटन

(करीब 70 अस्पतालों के संचालन का दावा, महज छह के पंजीकृत होने की चर्चा; नोडल अधिकारी डॉ. थानेदार और सीएमओ डॉ. संजय कुमार सिंह से उठे सीधे सवाल)


मिहींपुरवा (बहराइच)। तहसील मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर होने का खामियाजा अब क्या ग्रामीणों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ेगा? मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में बिना पंजीकरण अस्पतालों के कथित बढ़ते जाल ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय स्तर पर करीब 70 निजी अस्पतालों के संचालित होने की चर्चा है, जबकि इनमें केवल छह अस्पतालों के पंजीकृत होने की बात सामने आ रही है। हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग से है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अस्पताल बिना पंजीकरण संचालित हो रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है? कार्रवाई के बावजूद ऐसे अस्पतालों का संचालन जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सीज अस्पतालों के फिर खुलने का आरोप
क्षेत्र में चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. थानेदार की निगरानी में कार्रवाई होने के बावजूद कई अस्पतालों के दोबारा खुलने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब पांच माह पहले जिन अस्पतालों पर सीज की कार्रवाई हुई थी, उनमें से कुछ बिना पूरी कागजी प्रक्रिया के फिर संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, इस अवधि में करीब 20 नए अस्पताल खुलने का भी दावा किया जा रहा है।
यदि सीज किए गए अस्पताल वास्तव में बिना अनुमति दोबारा संचालित हुए हैं तो सवाल बेहद गंभीर है—सील किसने खोली? अनुमति किसने दी? निरीक्षण किसने किया और कार्रवाई के बाद निगरानी किसने की?
न्यू इंडिया हॉस्पिटल में महिला की मौत ने खोली व्यवस्था की पोल?
ताजा मामला न्यू इंडिया हॉस्पिटल से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल पर पूर्व में डॉ. थानेदार द्वारा सीज की कार्रवाई की गई थी। बाद में अस्पताल के दोबारा संचालित होने की बात सामने आई। अब प्रसव के बाद एक महिला की मौत ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
महिला की मौत के वास्तविक कारण का निर्धारण जांच से ही हो सकेगा, लेकिन घटना ने अस्पताल के संचालन, चिकित्सकीय व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर तीखे सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि यदि अस्पताल पहले सीज किया गया था तो वह दोबारा किस आधार पर संचालित हुआ?
सीएमओ डॉ. संजय कुमार सिंह के सामने बड़ी अग्निपरीक्षा
मिहींपुरवा में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सीएमओ डॉ. संजय कुमार सिंह की भूमिका और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में कथित धन उगाही की चर्चाएं हैं, लेकिन इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि भी हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकती है।
अब ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग से जवाब चाहते हैं—बिना पंजीकरण अस्पतालों पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी? सीज अस्पताल दोबारा कैसे संचालित हो रहे हैं? कितने अस्पताल वास्तव में पंजीकृत हैं? न्यू इंडिया हॉस्पिटल में महिला की मौत के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
दूरदराज क्षेत्र होना स्वास्थ्य नियमों से छूट का आधार नहीं हो सकता। अब देखना यह है कि सीएमओ डॉ. संजय कुमार सिंह और नोडल अधिकारी डॉ. थानेदार इन सवालों का जवाब जांच और कार्रवाई से देते हैं या मामला फिर कागजी खानापूर्ति तक सिमट जाता है।

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