BRICS समिट के इतर भारत और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है. दोनों शीर्ष नेताओं की द्विपक्षीय बैठक में चाबहार पोर्ट, तेल-गैस, व्यापार और कनेक्टिविटी प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं.


ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी दिल्ली में कल शनिवार से शुरू हो रहे BRICS समिट के लिए रवाना हो गए हैं. तेहरान से रवाना होने से पहले राष्ट्रपति ने कहा कि BRICS में एकतरफावाद का मुकाबला करने और अपने सदस्यों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की काफी क्षमता है. साथ ही उन्होंने कहा कि आर्थिक लेन-देन में डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जानी चाहिए. साथ ही पेजेश्कियान की पीएम नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में चाबहार पोर्ट, तेल-गैस, व्यापार और कनेक्टिविटी के अलावा खाड़ी संकट पर चर्चा प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं.

 

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने इस वैश्विक समूह के 18वें समिट को बहुपक्षवाद को मजबूत करने की दिशा में एक अहम मौका करार दिया. BRICS के लिए भारत रवाना होने से पहले शुक्रवार को तेहरान में पेजेश्कियान ने कहा कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बहुपक्षवाद के नजरिए को मजबूत करने का एक अहम मौका देगी.

ब्रिक्स का मकसद एकतरफावाद का मुकाबलाः राष्ट्रपति

वैश्विक मामलों में BRICS की स्थिति का जिक्र करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि इस समूह में अभी 21 सदस्य हैं, जिनमें 11 मुख्य सदस्य और 10 नए सदस्य शामिल हैं जिन्हें “BRICS PLUS” के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सदस्य मिलकर दुनिया की 45 फीसदी से अधिक आबादी और करीब 35 फीसदी भू-भाग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे इस समूह को अलग-अलग क्षेत्रों में काफी क्षमता मिलती है.

 

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ईरान के राष्ट्रपति तेहरान से दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले अधिकारियों से मिलते राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद (X)

पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स का एक मुख्य मकसद एकतरफावाद (Unilateralism) का मुकाबला करना है. इस कोशिश का मकसद सदस्य देशों को अपनी आजादी बनाए रखते हुए अपने-अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों तथा गतिविधियों को विकसित करने में सक्षम बनाना है.

डॉलर पर निर्भरता कम करने की कवायदः राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने कहा कि इस साल के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विषय एकजुटता, स्थिरता, प्रतिरोध और इनोवेशन पर केंद्रित है. उन्होंने कहा कि इस नजरिए के तहत, आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक, वैज्ञानिक और व्यापारिक क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग और आदान-प्रदान के और बढ़ने की उम्मीद है. उन्होंने ब्रिक्स की वित्तीय क्षमताओं का भी जिक्र किया और कहा कि मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र में ब्रिक्स बैंक की स्थापना की गई है ताकि इस तंत्र के जरिए सदस्य देशों के बीच निवेश और अन्य संयुक्त गतिविधियों को आसान बनाया जा सके.

आर्थिक लेन-देन में डॉलर पर निर्भरता कम करने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह समूह देशों को “डॉलर पर निर्भरता के बिना” आर्थिक और क्षेत्रीय विकास के लिए हालात बनाने और एकतरफावाद तथा बड़ी ताकतों की अत्यधिक मांगों के खिलाफ खड़े होने में सक्षम बनाने की कोशिश कर रहा है. राष्ट्रपति ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को बड़े और प्रभावशाली सदस्य देशों के साथ बातचीत का एक उपयुक्त मौका बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि मेजबान भारत के अलावा चीन, रूस, ब्राजील और अन्य क्षेत्रीय देशों की भागीदारी सहयोग बढ़ाने और द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय विचार-विमर्श करने के लिए एक उचित मंच प्रदान करेगी. भारत के साथ संबंधों के बारे में पेजेश्कियान ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों का बहुत पुराना इतिहास है और वे एक जैसी सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं, साथ ही सहयोग बढ़ाने की कई संभावनाएं भी हैं.

भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट अहम मुद्दा

BRICS समिट के इतर भारत और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है. दोनों शीर्ष नेताओं की द्विपक्षीय बैठक में चाबहार पोर्ट, तेल-गैस, व्यापार और कनेक्टिविटी प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं.

चाबहार पोर्ट भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है. भारत ने ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में भी निवेश किया है. चाबहार के जरिए भारत पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बना सकता है. आगे इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC से जोड़कर रूस तथा यूरोप तक कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश है.

ईरानी तेल और LPG पर भी नजर

दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी बातचीत का बड़ा मुद्दा हो सकता है. ईरान, भारत को ज्यादा क्रूड ऑयल और LPG सप्लाई करने में दिलचस्पी दिखा रहा है. भारत के लिए ईरान से ऊर्जा आयात बढ़ाना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई में विविधता के लिहाज से अहम हो सकता है. हालांकि, ईरानी तेल की खरीद पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की स्थिति एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी.

इसके अलावा दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और नए क्षेत्रों में विस्तार देने पर भी बात कर सकते हैं. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और BRICS के वित्तीय तंत्र के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है. इससे डॉलर पर निर्भरता कम करने और दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाने में मदद मिल सकती है.

फिलहाल किसी बड़ी डील की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बैठक से चाबहार संचालन, ऊर्जा सहयोग, व्यापार, INSTC और वित्तीय सहयोग में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है. बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, होर्मुज स्ट्रेट में सी ट्रेड की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय शांति का मुद्दा भी उठ सकता है.

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