- IRCTC होटल टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को लालू यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव और पत्नी राबड़ी देवी समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तारीख दी है.
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- इस मामले में लालू परिवार के अलावा सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स समेत अन्य लोगों और संस्थाओं को भी आरोपी बनाया गया है. हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में 7 आरोपियों को आरोपमुक्त भी कर दिया है.
- लालू यादव की भूमिका पर कोर्ट को भी संदेह
- राउज एवेन्यू कोर्ट ने माना ऐसा नहीं लगता है कि लालू यादव के खिलाफ जांच राजनीति से प्रभावित थी. कोर्ट ने कहा लारा प्रोजेक्ट को जिस तरह फायदा पहुंचा वह लालू यादव की भूमिका पर संदेह पैदा करता है. कोर्ट ने कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह है.
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- वहीं, दूसरी तरफ, कोर्ट ने मामले में 7 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया. इनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी और देवकी नंदन तुलस्यान का नाम शामिल है. इसके अलावा राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है.
- साल 2004 से 2009 के बीच का है पूरा मामला
- ये पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी में स्थित IRCTC के दो होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका नियमों को ताक पर रखकर दिया गया. ये ठेका ‘सुजाता होटल्स’ नामक निजी कंपनी को दिया गया था.
- ईडी का आरोप है कि कथित भ्रष्टाचार के बदले सुजाता होटल्स ने जमीन का लेन-देन किया था. पटना में एक कीमती बेनामी जमीन सरला गुप्ता के जरिए बेहद मामूली रकम में लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और उनके छोटे बेटे तेजस्वी की कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को ट्रांसफर की गई थी. वहीं, कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मामले में ट्रायल की राह साफ हो गई है.
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