NFHS 5 के मुताबिक, 18-49 साल की करीब 6% विवाहित महिलाओं ने पति की यौन हिंसा का अनुभव बताया है. मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले जानिए कानून, आंकड़े और पूरा विवाद.


शादी को अक्सर सुरक्षा, भरोसे और साथ का रिश्ता माना जाता है, लेकिन देश में बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए यही रिश्ता हिंसा की वजह भी बन रहा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि 18 से 49 साल की विवाहित महिलाओं में करीब 6 फीसदी ने पति की ओर से यौन हिंसा का अनुभव किया है. यह आंकड़ा ऐसे समय में फिर चर्चा में है, जब सुप्रीम कोर्ट ने पति के यौन हिंसा को अपराध बनाने की मांग वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार का पक्ष जानने के बाद सुनवाई की तारीख तय करने की बात कही है.

देश में शादी के रिश्ते के भीतर महिला की सहमति और उसके कानूनी अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रही बहस अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. 7 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्र के रुख का इंतजार करेगा और उसके बाद मामले की सुनवाई के लिए उचित तारीख तय की जाएगी. इन याचिकाओं में उस कानूनी व्यवस्था को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वयस्क पत्नी के साथ उसकी इच्छा के खिलाफ पति के यौन संबंध बनाने को मौजूदा कानून में रेप की परिभाषा से बाहर रखा गया है.

महिलाओं के खुद बताए अनुभवों पर सर्वे

ऐसे में NFHS-5 का डेटा इस बहस को केवल कानून तक सीमित नहीं रखता, बल्कि यह भी दिखाता है कि शादी के रिश्ते के भीतर महिलाओं के साथ जबरदस्ती का अनुभव कितना बड़ा मुद्दा है. डेटा में बताया गया है कि हर 16 में से करीब 1 विवाहित महिला ऐसी है, जिसने पति की ओर से उसकी इच्छा के खिलाफ यौन संबंध या यौन व्यवहार का सामना किया. सर्वे का ये डेटा महिलाओं के खुद बताए अनुभवों पर आधारित है.

 


 

मामले में अब तक क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट का रुख: अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं की है. पहले केंद्र सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आने का इंतजार किया जा रहा है.

नवंबर में सुनवाई की मांग: वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने मामले को नवंबर में किसी निश्चित तारीख पर सुनवाई के लिए रखने की मांग की है.

केंद्र का जवाब अभी बाकी: अदालत को बताया गया कि केंद्र की ओर से अभी केवल प्रारंभिक आपत्ति आई है, जबकि मामले के मूल मुद्दे पर विस्तृत जवाब अभी दाखिल नहीं हुआ है.

नए कानून में भी प्रावधान: IPC की जगह 2024 से लागू हुए भारतीय न्याय संहिता में भी वयस्क पत्नी के साथ पति के यौन संबंध को बलात्कार की सामान्य धारा से अलग रखने वाला अपवाद मौजूद है.

दिल्ली हाई कोर्ट का बंटा फैसला: मई 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट में इस मुद्दे पर दो जजों की अलग-अलग राय सामने आई थी. जस्टिस राजीव शकधर ने वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को असंवैधानिक मानने की राय दी थी, जबकि जस्टिस सी. हरि शंकर ने इसे असंवैधानिक नहीं माना. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

इस मामले का असल विवाद क्या है?

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल है कि क्या शादी के बाद पति को पत्नी की इच्छा के खिलाफ यौन संबंध बनाने का कानूनी अधिकार मिल जाता है? याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शादी के बाद भी महिला की सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनी रहती है. इसलिए उसकी इच्छा के खिलाफ बनाए गए यौन संबंधों को सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर बलात्कार की कानूनी परिभाषा से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि इस तरह के बदलाव का फैसला संसद को करना चाहिए. कानून बदलने से विवाह संस्था, परिवार, शिकायतों और सबूतों से जुड़े कई सवाल उठ सकते हैं.

राज्यों ने क्या कहा?

राज्यों ने इस मामले में क्या राय दी है?

पति के यौन हिंसा को दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में अपराध माना जाता है. वहीं भारत उन करीब तीन दर्जन देशों में शामिल है, जहां शादी के बाद पत्नी की सहमति के बिना पति द्वारा बनाए गए यौन संबंध को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा गया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि पति-पत्नी के बीच बिना सहमति बने संबंध को रेप मानना एक ‘अत्यधिक कड़ी व्यवस्था’ होगी. केंद्र ने अपने जवाब में अलग-अलग राज्यों की राय भी शामिल की थी. कुल 19 राज्यों ने जवाब दिया. इनमें दिल्ली, त्रिपुरा और कर्नाटक ने मौजूदा कानूनी अपवाद हटाने का समर्थन किया, जबकि 10 राज्यों ने इसे बनाए रखने की बात कही. छह राज्यों ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी.

शादी में यौन हिंसा पर कानून का अपवाद क्यों?

पुराने भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 375 में यह अपवाद था और अब नए कानून भारतीय न्याय संहिता यानी BNS में भी इसी तरह का अपवाद रखा गया है. BNS की धारा 63 के अपवाद 2 के तहत 18 साल या उससे ज्यादा उम्र की पत्नी के साथ पति के यौन संबंध को बलात्कार की कैटेगरी से बाहर रखा गया है. इसी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. अदालत ने जनवरी 2023 में केंद्र से जवाब मांगा था और बाद में नए कानून के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया था.

पति की हिंसा सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं

NFHS-5 के मुताबिक, देश में 18 से 49 साल की शादीशुदा महिलाओं में करीब 32 फीसदी ने पति की ओर से शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का अनुभव किया. यानी लगभग हर तीन में से एक महिला ने वैवाहिक जीवन में किसी न किसी तरह की हिंसा झेली. इनमें सबसे ज्यादा मामले शारीरिक हिंसा के हैं. करीब 28 फीसदी महिलाओं ने पति की ओर से शारीरिक हिंसा का अनुभव बताया, जबकि 14 फीसदी ने भावनात्मक हिंसा की बात कही. शारीरिक हिंसा में थप्पड़ मारना सबसे आम था. करीब 25 फीसदी विवाहित महिलाओं ने बताया कि उनके पति ने उन्हें थप्पड़ मारा.

पति की यौन हिंसा से पीड़ित

इसके अलावा 12 फीसदी महिलाओं ने धक्का देने, झकझोरने या कोई चीज फेंकने की बात कही. करीब 10 फीसदी महिलाओं ने हाथ मरोड़ने या बाल खींचने का अनुभव बताया. 8 फीसदी ने मुक्का मारने, लात मारने, घसीटने या बुरी तरह पीटने की बात कही. कुछ मामलों में हिंसा और भी गंभीर रही. करीब 2 फीसदी महिलाओं ने बताया कि पति ने उनका गला दबाने या जानबूझकर जलाने की कोशिश की. 1 फीसदी महिलाओं ने चाकू, बंदूक या किसी दूसरे हथियार से धमकाने या हमला करने की बात कही.

महिलाओं के साथ हिंसा कैसी थी?

 

पति ने थप्पड़ मारा25%
धक्का दिया/झकझोरा/चीज फेंकी12%
हाथ मरोड़ा या बाल खींचे10%
मुक्का, लात या बुरी तरह पीटा8%
गला दबाने/जलाने की कोशिश2%
हथियार से धमकाया या हमला किया1%

यौन हिंसा में सबसे ज्यादा क्या हुआ?

NFHS-5 में महिलाओं से यौन हिंसा के अलग-अलग अनुभवों के बारे में भी पूछा गया. करीब 5 फीसदी विवाहित महिलाओं ने बताया कि पति ने उनकी इच्छा न होने के बावजूद शारीरिक ताकत का इस्तेमाल करके उनके साथ यौन संबंध बनाए. करीब 4 फीसदी महिलाओं ने कहा कि पति ने धमकी या किसी दूसरे तरीके से उन्हें ऐसा यौन व्यवहार करने के लिए मजबूर किया, जिसे वे नहीं करना चाहती थीं. वहीं करीब 2 फीसदी महिलाओं ने पति के उनकी इच्छा के खिलाफ दूसरे यौन कृत्य के लिए मजबूर किए जाने की बात बताई.

बहुत कम महिलाओं ने मांगी मदद

NFHS-5 यह भी बताता है कि पति की ओर से शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव करने वाली महिलाओं में करीब एक-चौथाई ने किसी न किसी तरह की शारीरिक चोट की बात कही. इसके बावजूद हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में मदद मांगने वाली संख्या काफी कम रही. सर्वे के अनुसार शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव करने वाली महिलाओं में केवल 14 प्रतिशत ने हिंसा रोकने के लिए मदद मांगी. सर्वे की एक और अहम बात यह है कि पति से डर और वैवाहिक हिंसा के बीच मजबूत संबंध दिखाई देता है. जिन महिलाओं ने बताया कि वे अपने पति से अक्सर डरती हैं, उनमें 59 प्रतिशत ने वैवाहिक हिंसा का अनुभव बताया. वहीं कभी-कभी डरने वाली महिलाओं में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत था.

 

Violence Against Women

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