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17 करोड़ के ऋण, ओटीएस में छह करोड़ भुगतान का दावा; हाईकोर्ट में मामला लंबित होने तक मकान की बिक्री व तोड़फोड़ रोकने की मांग
17 करोड़ के ऋण, ओटीएस में छह करोड़ भुगतान का दावा; हाईकोर्ट में मामला लंबित होने तक मकान की बिक्री व तोड़फोड़ रोकने की मांग
गोरखपुर। खजनी बाजार निवासी आद्या त्रिपाठी ने पंजाब नेशनल बैंक से लिए गए ऋण के मामले में उनके पैतृक मकान की नीलामी किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि बैंक की ओर से उन्हें समुचित सूचना दिए बिना उनके पैतृक मकान की नीलामी की कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में वाद लंबित है। ऐसे में न्यायालय का निर्णय आने तक मकान में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ अथवा बिक्री की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है।
प्रेस वार्ता में आद्या त्रिपाठी ने बताया कि वह ग्राम कुटभार, खजनी बाजार, जनपद गोरखपुर के निवासी हैं। उनके अनुसार वर्ष 2002 में उन्होंने अपने पैतृक आवास आराजी संख्या 408ख को बंधक रखकर पंजाब नेशनल बैंक, जिसका पूर्व नाम ओरियन्टल बैंक ऑफ इंडिया था, से अपनी फर्म मे. शेखर ट्रेडर्स के नाम पर करीब 17 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। उनका कहना है कि ऋण की अदायगी वह निर्धारित समय के अनुसार करते रहे, लेकिन बाद में किसी कारणवश खाता डिफाल्ट हो गया।
आद्या त्रिपाठी के मुताबिक डिफाल्ट होने के बाद बैंक के साथ ओटीएस (वन टाइम सेटलमेंट) कराया गया। उनके अनुसार ओटीएस के तहत करीब 13 करोड़ 25 लाख रुपये का भुगतान निर्धारित किया गया था, जिसे सितंबर तक जमा किया जाना था। उनका दावा है कि इस राशि में से लगभग छह करोड़ रुपये विभिन्न तिथियों में बैंक में जमा किए जा चुके हैं, जबकि शेष करीब सात करोड़ रुपये की व्यवस्था कर भुगतान करने के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी बीच बैंक की ओर से उन्हें समुचित जानकारी या सूचना दिए बिना उनके पैतृक मकान की नीलामी की कार्रवाई कर दी गई। प्रेस वार्ता में उन्होंने दावा किया कि करीब आठ करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को कथित रूप से एक करोड़ 16 लाख रुपये में अभिषेक सिंह के पक्ष में नीलाम कर दिया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बैंक और संबंधित व्यक्ति के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया।
आद्या त्रिपाठी ने कहा कि नीलामी की कार्रवाई के विरुद्ध उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में वाद दाखिल किया है, जो वर्तमान में लंबित है। उनका कहना है कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तब संपत्ति को लेकर आगे की कार्रवाई किए जाने से उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर, जिलाधिकारी गोरखपुर तथा क्षेत्राधिकारी खजनी को भी मामले से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।
प्रेस वार्ता के दौरान आद्या त्रिपाठी ने कहा कि उनका मकान पैतृक संपत्ति है और बैंक ऋण के मामले में वह ओटीएस के तहत निर्धारित धनराशि का भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में न्यायालय में मामला लंबित रहने के दौरान संपत्ति पर किसी प्रकार की कार्रवाई किए जाने से उन्हें अपूरणीय क्षति हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि जब तक माननीय उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक मकान में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, कब्जे अथवा बिक्री की कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। उनका कहना है कि इससे न्याय की मर्यादा बनी रहेगी और न्यायालय के निर्णय का सम्मान भी सुनिश्चित होगा।
आद्या त्रिपाठी ने प्रेस वार्ता के माध्यम से प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले के तथ्यों, बैंक अभिलेखों, ओटीएस के भुगतान तथा नीलामी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कदम उठाएंगे।
हालांकि, बैंक की ओर से लगाए गए आरोपों पर कोई पक्ष इस प्रेस वार्ता में सामने नहीं आया है। नीलामी प्रक्रिया और संपत्ति के मूल्य से संबंधित आरोपों की वास्तविकता संबंधित अभिलेखों और न्यायालय में लंबित मामले के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
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