निष्पक्ष जांच की मांग तेज? राकेश त्रिपाठी/ अब तक न्याय


राकेश त्रिपाठी/ अब तक न्याय

महराजगंज। जनपद के सिंदुरिया थाना क्षेत्र को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्र में अवैध नशे के कारोबार और अन्य कथित गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच एक कथित वरिष्ठ पत्रकार के नाम पर ₹5,000 की कथित वसूली का मामला भी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले में ऑडियो और वीडियो जैसे कथित साक्ष्य होने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि सिंदुरिया पुलिस का दावा है कि थाना क्षेत्र में किसी प्रकार का अवैध नशे का कारोबार नहीं हो रहा, तो फिर कथित रूप से ₹5,000 की वसूली आखिर किस आधार पर की गई? यदि कोई अवैध गतिविधि थी ही नहीं, तो कथित लेन-देन का कारण क्या था? यही प्रश्न अब आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कथित ऑडियो और वीडियो वास्तव में उपलब्ध हैं और संबंधित व्यक्ति उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत करने को तैयार है, तो अब तक निष्पक्ष जांच शुरू क्यों नहीं हुई? लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में पारदर्शी जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।

गौरतलब है कि पूर्व में भी वायरल ऑडियो और वीडियो के आधार पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीणा ने मामलों का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की थी। इसी प्रकार मिठौरा क्षेत्र में होटल की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों के खुलासे के बाद भी पुलिस विभाग में कई स्तर पर कार्रवाई और फेरबदल हुए थे। ऐसे उदाहरण यह दर्शाते हैं कि यदि शिकायतों की गंभीरता से जांच हो, तो कार्रवाई संभव है।

इसी क्रम में अब सिंदुरिया थाना क्षेत्र के मामले को लेकर भी लोग यही अपेक्षा कर रहे हैं कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से इसे सार्वजनिक किया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

क्षेत्र के नागरिकों की मांग है कि संवेदनशील स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए। हालांकि कई लोगों का यह भी मानना है कि केवल कैमरे लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सूचना तंत्र की निष्पक्षता, जवाबदेही और समयबद्ध जांच भी उतनी ही आवश्यक है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि कथित ऑडियो-वीडियो और वसूली के दावों के बावजूद यदि अब तक कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है, तो जांच में देरी का कारण क्या है? क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कहीं प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद कार्रवाई करने की प्रतीक्षा तो नहीं कर रहा।

अब लोगों की निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही इन आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट कर सकती है। यदि पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, और यदि आरोप असत्य हैं तो संबंधित पक्षों को भी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए।

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