​रिपोर्ट मंगल धुर्वे /लोकेशन खंडवा


​रिपोर्ट मंगल धुर्वे /लोकेशन खंडवा

ये मामला खंडवा के खालवा थाने के ग्राम जूनापानी का है! नाबालिग आदिवासी जीतेन्द्र पाटिल पिता कमलसिंह पाटिल का एक ही बैठा था कमलसीह पाटिल अपना भरण पोषण भिक्षा लेकर किया करता था आज एक गरीब को न्याय की आस में एक दिव्यांग पिता पिछले 5 दिनों से दर-दर भटक रहा है, लेकिन खालवा पुलिस की फाइलों में उसके इकलौते बेटे की हत्या का मामला अभी तक दर्ज नहीं हो सका है। आज खंडवा जिले का खालवा थाना परिसर उस समय गूंज उठा जब पीड़ित पिता के समर्थन में आदिवासी समाज और जयस (जय आदिवासी युवा शक्ति) के कार्यकर्ता भारी संख्या में थाने पहुँच गए।"


घटना को बीते 5 दिन हो चुके हैं, लेकिन खालवा पुलिस ने अब तक हत्या का मामला दर्ज करना तो दूर, पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेना भी उचित नहीं समझा। पीड़ित दिव्यांग पिता का कहना है कि उन्होंने पुलिस के सामने गिड़गिड़ाकर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन ही मिले।

​(कानून की अनदेखी पर प्रहार):

सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) के तहत दिव्यांग व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा और सम्मानजनक न्याय मिलने का प्रावधान है। लेकिन खालवा थाने में जिस तरह से इस कानून को दरकिनार किया जा रहा है, उससे साफ है कि यहाँ कानून को लचीला बना दिया गया है।
​अधिकार अधिनियम का उद्देश्य दिव्यांगों को सशक्त बनाना था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आए दिन दिव्यांग पीड़ित अपने ही कानूनी अधिकारों के लिए थाने के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें न्याय के नाम पर केवल उपेक्षा मिल रही है।

आज जयस के नेतृत्व में आदिवासी समाज ने थाने को घेरकर साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज नहीं हुआ और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।

क्या एक दिव्यांग पिता को न्याय पाने के लिए सड़क पर उतरना और समाज को एकजुट करना ही एकमात्र रास्ता रह गया है? प्रशासन कब जागकर अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, यह बड़ा सवाल है।

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