महिला नेतृत्व को नई पहचान : शालिनी सिंह पटेल को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी
दिल्ली/बांदा।
आमोद कुमार
आमोद कुमार
बांदा। सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही जनहानि केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भी परीक्षा है। इसी गंभीरता को केंद्र में रखते हुए महर्षि बामदेव सभागार, बांदा में जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ‘जीरो फेटालिटी’ यानी सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु दर के लक्ष्य को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई। बैठक में स्पष्ट संकेत दिया गया कि अब सड़क सुरक्षा के मामले में लापरवाही, अव्यवस्था और नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात विभाग या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से ही इसे प्रभावी बनाया जा सकता है। इसी क्रम में दुर्घटना संभावित ‘क्रिटिकल कॉरिडोर’ का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए, ताकि उन स्थानों की खामियों को समय रहते दूर किया जा सके जहां दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है।
बैठक में शहर की अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण को भी गंभीर समस्या माना गया। सड़क किनारे खड़े अनावश्यक वाहनों को हटाने, एक्सप्रेस-वे के नीचे अवैध रूप से खड़े ट्रकों पर रोक लगाने तथा ‘नो एंट्री’ बोर्ड लगाने के निर्देश प्रशासन की उस मंशा को दर्शाते हैं, जिसमें सड़क को केवल आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि सुरक्षित सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। कालू कुआं चौराहे की विशेष समीक्षा के निर्देश यह संकेत देते हैं कि प्रशासन अब दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को लेकर अधिक सक्रिय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपना रहा है।
सड़क सुरक्षा के साथ विद्युत व्यवस्था से जुड़े जोखिमों पर भी जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। महोखर क्षेत्र में विद्युत पोल हटाने की समयसीमा तय करना तथा स्कूलों के आसपास लटकते तारों और अनावश्यक पोलों को शीघ्र हटाने के निर्देश यह दर्शाते हैं कि प्रशासन अब सुरक्षा को केवल यातायात तक सीमित नहीं देख रहा, बल्कि समग्र नागरिक सुरक्षा के रूप में परिभाषित कर रहा है।परिवहन व्यवस्था और स्कूली वाहनों की फिटनेस को लेकर दिए गए निर्देश विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। आरटीओ को 18 मई तक सभी स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच पूर्ण करने के आदेश तथा ओवरलोड वाहनों और बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले छात्र-छात्राओं के खिलाफ सख्ती के निर्देश इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन दुर्घटनाओं के मूल कारणों पर प्रहार करने की रणनीति अपना रहा है। विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाने की पहल सड़क सुरक्षा को सामाजिक शिक्षा से जोड़ने का सकारात्मक प्रयास मानी जा रही है।तकनीकी दृष्टि से हॉटस्पॉट क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने, रोडवेज बस स्टैंड को शहर के बाहर स्थानांतरित करने तथा जिला अस्पताल में समुचित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश प्रशासनिक दूरदृष्टि को भी दर्शाते हैं। इससे न केवल यातायात दबाव कम होगा, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की गति भी बेहतर हो सकेगी।
बैठक का सबसे मानवीय और प्रेरणादायी पक्ष ‘नेक आदमी’ अथवा ‘गुड सेमेरिटन’ योजना को लेकर दिखाई दिया।जिलाधिकारी ने सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले नागरिकों को सम्मानित करने की बात कहकर यह संदेश दिया कि संवेदनशील समाज ही सुरक्षित समाज की नींव होता है। दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वालों को सार्वजनिक सम्मान देना निश्चित रूप से समाज में मानवीय मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करेगा।बैठक में पलस बंसल, कुमार धर्मेंद्र, शिवराज सिंह सहित लोक निर्माण, स्वास्थ्य, परिवहन एवं विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप देने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश भी बनकर सामने आई।
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दिल्ली/बांदा।
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