पीलीभीत जिले के अमरिया कस्बे में हर हफ्ते बृहस्पतिवार का दिन अब बाजार का नहीं,


पीलीभीत जिले के अमरिया कस्बे में हर हफ्ते बृहस्पतिवार का दिन अब बाजार का नहीं, बल्कि जाम और जद्दोजहद का प्रतीक बन चुका है। साप्ताहिक बाजार लगते ही कस्बे की मुख्य सड़क पर ऐसा जाम लगता है कि आम आदमी की रफ्तार थम जाती है।

बाजार के दिन दुकानदारों द्वारा सड़क तक दुकानें फैला देने से रास्ता पूरी तरह संकरा हो जाता है। हालात यह हो जाते हैं कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है, जबकि दोपहिया और चारपहिया वाहन घंटों रेंगते नजर आते हैं।

ऊपर से गन्ने से लदे भारी ट्रक जब बाजार क्षेत्र से गुजरते हैं, तो जाम भीषण रूप ले लेता है। हर पल हादसे की आशंका बनी रहती है, लेकिन न तो ट्रैफिक डायवर्जन है, न कोई ठोस नियंत्रण व्यवस्था।

इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भुगतना पड़ता है। जाम और भीड़ में फंसकर लोग घंटों परेशान रहते हैं। एम्बुलेंस या आपात सेवाओं के लिए रास्ता मिलना किसी चुनौती से कम नहीं।

यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने में प्रशासन और अमरिया पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर सप्ताह हालात एक जैसे रहते हैं, फिर भी कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आता।

सूत्रों के अनुसार, बाजार में दुकानों को सड़क तक फैलाने के बदले प्रत्येक दुकानदार से मोटी रकम वसूले जाने की चर्चा भी है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यह चर्चा प्रशासनिक निष्क्रियता को और संदिग्ध बनाती है।

साप्ताहिक बाजार के लिए अलग स्थान या सख्त नियम क्यों नहीं बनाए जा रहे? जब तक बाजार के लिए अलग व्यवस्था या कड़ा नियंत्रण नहीं होगा, तब तक अमरिया की जनता हर बृहस्पतिवार यूँ ही जाम में फंसी रहेगी। अब जरूरत है ठोस फैसलों की—ताकि बाजार भी चले और जनता को भी राहत मिले।

राजकुमार वर्मा 
अबतक न्याय पीलीभीत

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