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फतेहपुर ब्यूरो:असोथर थाना क्षेत्र में गंगा नहर की पुलिया के पास जाल लगा है उसी में दो गौवंश के शव पानी में तैरते देखा गया। सोशल मीडिया में ट्वीट होते ही फतेहपुर पुलिस और असोथर नगर पंचायत कार्मिकों द्वारा जेसीबी व गोताखोरों की मदद से बाहर निकालकर पशु चिकित्सक की मौजूदगी में सम्मानपूर्वक दफन
असोथर थाने से चंद कदम दूर गंगा नहर में तैरते गौवंशों के शव प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर सम्मानजनक दफनाया
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में गौ संरक्षण के नाम पर बने कानून और गौशालाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गौ सेवा को प्राथमिकता दिए जाने और सख्त कानून बनाने के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही का आलम यह है कि असोथर थाना क्षेत्र में गंगा नहर की पुलिया के पास जाल लगा है उसी में दो गौवंश के शव लस्सी से आपस में बंधे हुए पानी में तैरते देखा गया। सोशल मीडिया में ट्वीट होते ही फतेहपुर पुलिस और असोथर नगर पंचायत कार्मिकों द्वारा जेसीबी व गोताखोरों की मदद से बाहर निकालकर पशु चिकित्सक की मौजूदगी में सम्मानपूर्वक दफनाने की कार्यवाही की गई , एवं परीक्षण हेतु पशुचिकित्सक द्वारा प्रदर्श भी लिया गया है। इस कार्य के लिए धन्यवाद फतेहपुर पुलिस और असोथर नगर पंचायत टीम को तेज कार्रवाई के लिए!
हाल ही में हुसैनगंज थाना क्षेत्र में एक गौवंश का कटा हुआ सिर मिला था, जिसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रोष जताते हुए धरना दिया था। उस समय प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक केवल कागजी कार्रवाई ही चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, जिले की मवई गौशाला में भी लगातार खामियां पाई गई हैं। यहां गौवंशों के लिए पर्याप्त चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। कई बार जिलाधिकारी को इसकी सूचना दी गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने गौ हत्या पर रोक लगाने और गौशालाओं के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार गौ सेवा को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। राज्य में गौशालाओं की संख्या बढ़ाई गई है और गौवंश की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं। लेकिन फतेहपुर जैसे जिलों में इन नीतियों का पालन केवल कागजों तक सीमित है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता से गौवंश सड़कों पर भटकते रहते हैं, और उनकी मौत के बाद शवों का निस्तारण तक नहीं होता। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, ने कहा, "सरकार ऊपर से कितने भी आदेश दे, लेकिन नीचे के अधिकारी उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। गौशालाओं में जानवरों की मौत के बाद उनके शवों को नदियों या नहरों में फेंक दिया जाता है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं गौशालाओं में खानापूर्ति और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं।गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान सही तरीके से उपयोग नहीं होता, जिससे जानवरों की देखभाल प्रभावित होती है।
सभी से अपील: मृत गौवंश मिलने पर तुरंत पुलिस, पंचायत या प्रशासन को सूचित करें। खुले में या नहरों में फेंकने से बचें – यह पर्यावरण, स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के लिए हानिकारक है।
रिपोर्ट:लव सिंह यादव, ब्यूरो चीफ़, फतेहपुर, अब तक न्याय
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