छत्तीसगढ़ की संस्कृति का प्रतीक छेरछेरा तिहार शिवरीनारायण मठ में लोक परंपरा के अनुरूप मनाया गया।


छत्तीसगढ़ की संस्कृति का प्रतीक छेरछेरा तिहार शिवरीनारायण मठ में लोक परंपरा के अनुरूप मनाया गया। महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर  दास जी महाराज छेरछेरा तिहार के अवसर पर शिवरीनारायण मठ में थे। सुबह लगभग 7:00 बजे से छेरछेरा मांगने वालों का आगमन प्रारंभ हुआ। इसमें छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक सभी उम्र के लोग अपने-अपने साथियों के साथ "छेरछेरा कोठी के धान ल हेर हेरा" कहते हुए मठ में आने लगे। राजेश्री महन्त जी महाराज ने उन्हें छेरछेरा प्रदान किया। बच्चे काफी उत्साहित होकर प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त कर हर्षित हुए। छेरछेरा त्यौहार के संदर्भ में अपने संदेश में राजेश्री महन्त जी महाराज ने कहा कि - छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोक पर्व है, इसे काफी श्रद्धा भक्ति पूर्वक उत्साह के साथ प्रत्येक वर्ष पौष पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह कृषि कार्य के संपन्न होने का प्रतीक है। इस त्यौहार में अन्नदान की परंपरा है। वेद शास्त्रों में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। जीवों की उत्पत्ति, उनका विकास अन्न से ही होता है, इसलिए अन्न दान को महादान माना गया है। हम सभी को अपने सामर्थ के अनुसार लोगों को अन्न का दान करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राजेश्री महन्त जी महाराज जांजगीर-चांपा जिले के प्रवास पर थे। उन्होंने रात्रि विश्राम शिवरीनारायण मठ में किया, सुबह छेरछेरा त्यौहार मनाने के बाद रायपुर के लिए रवाना हुए।

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