खंड में तैनात कार्यालय सहायक राजकुमार (पुत्र बाबूलाल, निवासी इंद्रलोक, कृष्णानगर, लखनऊ) को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषी को अतिरिक्त 3 माह की कैद भुगतनी होगी।


लखनऊ: रिश्वत लेते पकड़े गए विद्युत विभाग के कर्मचारी को 4 वर्ष की सजा


विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत, लखनऊ ने विद्युत वितरण खंड में तैनात कार्यालय सहायक राजकुमार (पुत्र बाबूलाल, निवासी इंद्रलोक, कृष्णानगर, लखनऊ) को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए 4 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषी को अतिरिक्त 3 माह की कैद भुगतनी होगी।

मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला वर्ष 2014 का है। शिकायतकर्ता की मां ने चक्की के संचालन के लिए बिजली कनेक्शन लिया था, जो बाद में बंद होने पर स्थायी रूप से कटवाया गया और सिक्योरिटी राशि वापस मांगी गई।
वर्ष 2018 में विच्छेदन टीम ने कथित बकाया बताकर कार्रवाई शुरू की। शिकायतकर्ता नितिन पटेल द्वारा सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद आरोपी राजकुमार ने पीडी रसीद देने के बदले 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।

ट्रैप कार्रवाई
दिनांक 6 फरवरी 2019 को भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की टीम ने पूर्व नियोजित ट्रैप में राजकुमार को रंगे हाथ 10,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
यह प्रकरण फौजदारी वाद संख्या 2386/2019, मुकदमा संख्या 82/2019, धारा 7, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था।

अदालत की कार्यवाही
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्ण कान्त शुक्ला (के.के.) ने प्रभावी पैरवी की। उनकी दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राजकुमार को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

न्यायालय का निर्णय
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट कोर्ट-3) विनीत नारायण पाण्डेय ने सुप्रीम कोर्ट के पुरुषोत्तम दशरथ बोराडे फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उम्र, पारिवारिक परिस्थितियाँ या पूर्व आपराधिक इतिहास, भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराधों में सजा कम करने के आधार नहीं हो सकते।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोषी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को धारा 428 सीआरपीसी के तहत उसकी सजा में समायोजित किया जाएगा। निर्णय की प्रति जिला मजिस्ट्रेट, लखनऊ को प्रेषित कर दी गई है।

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