पुलिस हिरासत में बेटे और भाई से मिलने न देने पर खुद को आग लगाने वाले मेवा विक्रेता बिलाल अहमद वानी की अस्पताल में मौत हो गई है. वानी के भाई और बेटे कथित तौर पर एक आतंकवादी मॉड्यूल मामले में हिरासत में हैं.


अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि आतंकवादी मॉड्यूल मामले में बेटे और भाई को हिरासत में लिए जाने और उनसे न मिलने दिए जाने के बाद खुद 

को आग लगा ली थी. अनंतनाग के एक अस्पताल में रविवार देर रात उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें एसएमएचएस अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई है.

 

जानकारी के मुताबिक वानी ने आधी रात के बाद दम तोड़ दिया. पुलिस ने आतंकवादी मॉड्यूल मामले में पूछताछ के लिए वानी, उसके भाई और उसके बेटे जसीर बिलाल को हिरासत में लिया था. उन्होंने बताया कि बिलाल को बाद में रिहा कर दिया गया था जबकि उसका बेटा और भाई को नहीं छोड़ा गया है. जब वानी की गुहार के बाद भी पुलिस ने उन्हें भाई और बेटे से मिलने और बात करने नहीं दी, तो उन्होंने खुद को आग लगा ली थी.

वानी को बताया जा रहा व्हाइट कॉलर मॉड्यूल के आरोपी का पड़ोसी

खबरों के मुताबिक वानी व्हाइट कॉलर मॉड्यूल मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए डॉ. मुजफ्फर राठेर का पड़ोसी है. माना जा रहा है कि मुजफ्फर फिलहाल अफगानिस्तान में है, जबकि उसके छोटे भाई डॉ. आदील राठेर को छह नवंबर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था.

महबूबा मुफ्ती ने उठाया मुद्दा

बिलाल वानी के खुद को आगे के हवाले किए जाने के बाद रविवार को महबूबा मुफ्ती ने अपील की थी कि हिरासत में लिए गए लोगों के परिवारों को कम से कम उनसे मिलने दिया जाए. महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि इस हद तक की मनमानी ज़ख्मों को और गहरा करती है और निराशा को जन्म देती है. जब युवाओं को बेतरतीब ढंग से उठाया जाता है, तो हम एक पूरी पीढ़ी को भय, निराशा और अंधकारमय रास्तों पर धकेलने का जोखिम उठाते हैं. उन्होंने पुलिस से अपील की कि कम से कम उन्हें हिरासत में लिए गए सदस्यों से मिलने की अनुमति दी जाए.

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