500 भारतीय युवाओं को थाईलैंड-म्यांमार से भारत सरकार के एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत छुड़ाकर वापस लाया गया. उनमें से एक है राजस्थान के झुंझुनूं का अविनाश. नौककी के लालच में उसे साइबर गुलाम बना दिया गया. पीड़ित ने जो आपबीती बताई, उसे जानकर आपकी भी रूह कांप जाएगी.


मेरा नाम वहां नैंसी रख दिया गया था. हमें लड़की बनकर अमेरिकन लोगों से चैट करके उन्हें ठगने का टारगेट मिलता था. टारगेट पूरा करो तो ठीक, नहीं तो बंद कमरे में करंट लगाया जाता था… ये खौफनाक कहानी झुंझुनूं के 27 वर्षीय अविनाश ने बताई, जिसे म्यांमार में बंदी बनाकर साइबर ठगी करवाने पर मजबूर किया गया.

 

दरअसल, अविनाश नौकरी की तलाश में म्यांमार गया था. एजेंट ने उसे थाईलैंड की एक बड़ी कंपनी में नौकरी का लालच दिया. वह अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर विदेश जाने तैयार हो गया. पहले उसे थाईलैंड ले जाया गया, फिर जंगलों के रास्ते म्यांमार पहुंचाया गया. वहां पहुंचते ही उसका पासपोर्ट छीनकर उसे एक बड़े परिसर में बंद कर दिया गया, जहां चारों ओर हथियारबंद गार्ड थे. बाहर निकलने की अनुमति बिल्कुल नहीं थी.

सुंदर लड़कियों की फोटो लगाकर फर्जी अकाउंट बनवाए जाते थे

अविनाश ने बताया कि उन्हें अमेरिका के नागरिकों को ठगने का काम कराया जाता था. उनसे सुंदर लड़कियों की तस्वीरों वाले फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनवाए जाते थे. कभी नैंसी तो कभी नताशा नाम से. इन अकाउंटों के जरिए बुजुर्ग अमेरिकन नागरिकों का भरोसा जीतकर उनकी निजी जानकारी और बैंक डिटेल्स निकलवाई जाती थीं.

टारगेट पूरा नहीं किया तो करंट और मारपीट

पीड़ित अविनाश के अनुसार, अगर कोई टारगेट पूरा नहीं होता था, तो उन्हें कठोर सजा दी जाती थी. कभी 7-8 घंटे तक हाथों में बोतल पकड़वाकर खड़ा रखा जाता था. कभी खाना नहीं दिया जाता था. चार लोगों को मिलकर सिर्फ एक पैकेट मैगी दी जाती थी. कई बार करंट तक लगाया जाता था.

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एक महीने में 10 बुजुर्गों को झांसे में डालने का दबाव

अविनाश ने बताया कि एक महीने में कम से कम 10 लोगों को झांसे में डालने का टारगेट होता था. जरा भी कमी रह जाए तो सजा पक्की थी. मैंने 10 में से 3 में कामयाबी हासिल की थी.

भारत सरकार के ऑपरेशन से बचाए गए 500 भारतीय युवा

अविनाश अकेला नहीं था. ऐसे लगभग 500 भारतीय युवाओं को थाईलैंड-म्यांमार से भारत सरकार के एक स्पेशल ऑपरेशन के तहत छुड़ाकर वापस लाया गया. राजस्थान के करीब 20 युवा इस रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल थे, जिनमें से 17 को जयपुर वापस लाया जा चुका है. कुछ युवाओं से इंटेलिजेंस एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं.

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